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दिल्ली हिंसा: तीन रिपोर्टें, अलग-अलग दावे, किसका करें यकीन?
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली में पिछले दिनों हुई हिंसा पर तीन अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं. इनमें से एक दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट है, एक इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडेमेशियन्स (जीआईए) ने जारी की है, वहीं एक रिपोर्ट कांग्रेस की भी है.
आइए इन रिपोर्टों पर नज़र डालते हैं.
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली का दौर किया. इस प्रतनिधिमंडल में आयोग के चेयरमैन डॉ. ज़फरुल-इस्लाम खान और सदस्य करतार सिंह कोचर भी शामिल थे.
रिपोर्ट की मुख्य बातें -
- उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एकतरफ़ा और सुनियोजित तरीके से हिंसा हुई, जिसमें सबसे ज़्यादा नुकसान मुसलमानों के घरों और दुकानों का हुआ.
- भजनपुरा में मुसलमानों की दुकानें लूटी और जलाई गईं, जबकि हिंदुओं की दुकानों को छुआ तक नहीं गया.
- यमुना विहार में सड़क के एक तरफ मुसलमानों के घर और दुकानें हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंदुओं के घर और दुकानें हैं. दोनों के साथ ही लूटपाट हुई और संपत्ति को जलाया गया.
- खजूरी खास की गली नंबर 5 के स्थानीय लोगों ने बताया कि कपिल मिश्रा की धमकी और अल्टीमेटम के कुछ देर बाद 23 फरवरी की देर रात को हिंसा शुरू हो गई. यहां बीएसएफ़ जवान मोहम्मद अनीस के घर में बुरी तरह तोड़-फोड़ हुई.
- खजूरी खास के ई-ब्लॉक में मुसलमानों की दुकानें जली हुई थीं. एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि इलाके के डीसीपी ने 350 मुसलमानों को बचाया.
- 3/51 खजूरी एक्सटेंशन में जमील अहमद का कार रिपेयर का गैरेज है. जहां सात कारों, छह ऑटोरिक्शा और नौ मोटरसाइकलों को आग लगा दी गई. उन्होंने बताया कि हिंदू अपनी कारें, गैराज में आगजनी और लूटपाट के कई घंटे पहले ही ले गए थे.
- खजूरी खास की गली नंबर 29 में मस्जिद फातिमा है, जहां लोगों ने भीड़ के डर से पनाह ले ली थी. मस्जिद से सटे मासूम अली के घर पर भी हमला हुआ था.
- बृजपुरी में हम तीस साल पुराने अरुण मॉडर्न स्कूल पहुंचे. इसके मालिक भीष्म शर्मा कई बार कांग्रेस से विधायक रहे हैं. ये स्कूल 25 फरवरी की शाम बुरी तरह जलाया गया. कम्प्यूटर, स्टील की रेलिंग और सीसीटीवी कैमरा लूट लिए गए.
- शिवपुरी में मुस्लिम आबादी कम है. ये इलाका सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा. यहां कई मुस्लिमों के घरों को चुन-चुनकर नुकसान पहुंचाया गया और जलाया गया. यहां एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचाया गया.
आयोग की मांग
जिन लोगों का नुकसान हुआ, उन्हें अपनी ज़िंदगी दोबारा शुरू करने के लिए भारी मदद की ज़रूरत होगी. हमें लगता है कि दिल्ली सरकार ने जो मुआवज़ा देने की घोषणा की है, वो इसके लिए काफी नहीं है.
जीआईए की रिपोर्ट
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंसा के पीछे 'अर्बन नक्सल और जिहादी नेटवर्क' का हाथ था. 'उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शाहीन बाग मॉडल - धरने से दंगे तक' नाम की रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुस्लिमों के लंबे वक्त से चल रहे रेडिकलाइजेशन की वजह से ये हिंसा हुई.
जीआईए के बारे में कहा जाता है कि इसके सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं या उससे सहमति रखते हैं, क्या उनका संबंध आरएसएस है? यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "वकीलों और प्रोफ़ेसरों का ग्रुप है और हम पहले भी ऐसी रिपोर्टें करते रहे हैं."
जीआईए की वेबसाइट देखकर समझा जा सकता है कि वह उनका रुझान साफ़ तौर पर भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की ओर है.
ये रिपोर्ट ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडेमेशियन्स (जीआईए) की पांच महिला सदस्यों ने 29 फरवरी से सात दिन तक हिंसा प्रभावित इलाकों में जाकर तैयार की.
रिपोर्ट तैयार करने वालों में सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और चार अन्य महिला प्रोफ़ेसर शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक जीआईए की टीम उत्तर-पूर्व दिल्ली के खजूरी खास, भजनपुरा, चांद बाग, करावल नगर, मुस्तफाबाद, शिव पुरी और ब्रिजपुरी इलाकों में गई और वहां के स्थानीय लोगों से बात की. जिनमें दुकानदार और पीड़ित परिवार तथा अन्य लोग शामिल थे. इसके अलावा इस टीम ने हिंसा प्रभावित छह स्कूलों का भी दौरा किया.
रिपोर्ट की ख़ास बातें
- उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा सुनियोजित साजिश थी और इसमें 'लेफ्ट-जिहादी मॉडल' के सबूत मिलते हैं.
- दिल्ली हिंसा किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की गई. बल्कि इसकी वजह से दोनों ही समुदायों को नुकसान हुआ है.
- 15 दिसंबर से धरनों पर बैठी महिलाएं सड़कों पर आ गईं, मेट्रो का रास्ता रोका और इसके बाद भीड़ की पत्थरबाज़ी से दंगे भड़के.
- धरनों में महिलाओं का ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया. ढाल के पीछे पुरुष काम करते रहे.
- 'शाहीन बाग मॉडल' - ज़्यादातर प्रदर्शनों में लेफ्ट-विंग जिहादी और एंटी- सीएए, एनआरसी, एनपीआर एक्टिविज़्म हुआ. अमित शाह विरोधी, मोदी विरोधी और फासिज़्म विरोधी नारे लगाए जा रहे थे. इंकलाबी नारे दीवारों पर लिखे गए.
- बाहरी लोग कौन थे? उत्तर पूर्व दिल्ली की कुछ गलियां उत्तर प्रदेश में खुलती हैं. कोई सील्ड बॉर्डर नहीं है. बाहरवालों से मतलब ये भी हो सकता है कि कोई दूसरी गली-मोहल्ले से आया हो. उदाहरण के लिए खजूरी खास में लोगों ने कहा कि बाहरी मुस्तफ़ाबाद से आए. भजनपुरा में लोगों ने कहा कि बाहरी लोग चांद बाग से आए.
- दिल्ली के कई विश्वविद्यालयों से आए बाहरी- चांद बाग और मालवीय नगर के लोगों ने बताया कि 23 फरवरी से पहले के कई हफ्तों तक जेएनयू की महिला छात्राएं लागातार भीड़ को उकसा रही थीं. सीएए विरोधी प्रदर्शनकारी सड़कों पर आए.
- अमरीकी राष्ट्रपति के दौर के वक्त बीजेपी हिंसा भड़काने में शामिल हो ही नहीं सकती. ये देश तोड़ने वाले 'अर्बन नक्सलों और जिहादी नेटवर्क' का काम था.
जीआईए की मांगें
दिल्ली हिंसा की एनआईए जांच हो. एनआईए को दिल्ली में हुई हिंसा की विदेशी फंडिंग और सहयोग को लेकर जांच करनी चाहिए. एनआईए 'बाहरी नेटवर्क' की जांच करे. जीआईए की सिफारिश है कि छात्रों, शिक्षकों, कलाकारों, धरना/प्रदर्शन मार्च के ज़रिए नफरत फैलाने के लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं, सोशल मीडिया पोस्ट, भड़काऊ भाषणों की भी जांच की जानी चाहिए. शाहीन बाग़ जैसे प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच हो.
कांग्रेस की रिपोर्ट
कांग्रेस ने भी एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के हिंसा प्रभावित इलाकों में भेजा था. जिसने 28 फ़रवरी को हालात का जायज़ा लिया और रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपी.
इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता तारिक अनवर, कुमारी सेलजा, सुष्मिता देव, शक्ति सिंह गोहिल और मुकुल वासनिक शामिल थे. इनके मुताबिक इन्होंने जीटीबी अस्पताल, अल हिंद अस्पताल, अरविंद नगर, बाबूनगर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी, बृजपुरी चांद बाद, दयालपुर, गुकुलपुरी, गोंडा चौक, जौहरपुर, जाफराबाद, कबीर नगर, करावलनगर, खजुरी खास, ओल्ड मुस्तफाबाद, सीलमपुर, शिव विहार और यमुना विहार का दौरा किया और हिंसा प्रभावित लोगों - घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की.
रिपोर्ट की ख़ास बातें
- स्थानीय लोगों के मुताबिक पूरी हिंसा में बीजेपी के ध्रुवीकरण की अहम भूमिका रही. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'कपड़ों से पहचानने' वाला बयान, गृह मंत्री अमित शाह का 'ईवीएम इतनी ज़ोर से दबाओ की करंट शाहीन बाग में लगे' वाला बयान, कपिल मिश्रा का अल्टीमेटम और अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के भड़काऊ नारे शामिल हैं.
- ऐसा लगाता है कि किसानों की परेशानियों, रुपए की गिरती कीमतों, चरमराती अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी के संकट, महिलाओं के उत्पीड़न, दलित-आदिवासियों पर बने संकट- जैसी समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ये बीजेपी की कोई साजिश हो सकती है.
- दिल्ली की कानून-व्यवस्था का ज़िम्मा गृह मंत्री अमित शाह पर है. वो अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे. दिल्ली हिंसा की स्थिति को रोकने के लिए गृह मंत्री ने कोई कोशिश नहीं की.
- बाबरपुर में लोगों ने बताया कि दुर्गावाहिनी की एक नेता ने वहां आकर लोगों को आकर उकसाया. जिससे वहां पत्थरबाज़ी हुई. बाबरपुर के एक तरफ हिंदू तो दूसरी तरफ मुस्लिम रहते हैं.
- कई लोगों ने शिकायत की कि पुलिस अधिकतर इलाकों में मूक दर्शन बनी रही.
- आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहे. उन्होंने ज़िम्मेदारी से कोई कदम नहीं उठाया. हिंसा के बाद भी लोगों को राहत और पुनर्वास देने में भी सरकार फेल है.
- बाबरपुर में मुस्लिमों ने हिंदूओं के मंदिर की रक्षा भी की. ऐसे ही गोंडा चौक में कुछ हिंदुओं ने मुस्लिमों की रक्षा की.
कांग्रेस की मांगें
समाज के दो प्रमुख समुदायों में अविश्वास का माहौल बना. ख़ास तौर पर बच्चों और महिलाओं की काउंसलिंग करने का काम शुरू होना चाहिए, ताकि समुदायों के बीच आई दूरी को कम किया जा सके.
बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा पर एफआईआर हो और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र न्यायाकि जांच हो.
अपनी ज़िम्मेदारी ठीक ना निभाने वाले सरकारी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई हो.
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