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बंदूक के बीच पनपा प्यार, नक्सली ने डाले हथियार!
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
कहते हैं कि प्रेम में समर्पण ज़रूरी है, लेकिन माओवाद प्रभावित छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में प्रेम का यह समर्पण, एक महिला माओवादी के आत्मसमर्पण तक जा पहुंचा.
यह आत्मसमर्पण वैलेंटाइन डे के दिन लिखी गई चिट्ठी के कारण संभव हो सका.
दंतेवाड़ा के पुलिस उप महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बीबीसी को बताया, "एक आत्मसमर्पित इनामी माओवादी लक्ष्मण अटामी ने अपनी प्रेमिका जयो, जो नक्सल सीएनएम कमांडर थी, को वेलेंटाइन डे के दिन आत्मसमर्पण के लिये चिट्ठी लिखी थी. शनिवार को अपने प्रेमी की बात मान कर उस महिला माओवादी ने आत्मसमर्पण कर दिया."
पिछले साल 19 जून को बीजापुर के पलेवाया गांव के रहने वाले एक लाख के इनामी जनमिलिशिया सदस्य लक्ष्मण अटामी ने तीन अन्य माओवादियों के साथ दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया था.
पुलिस का दावा है कि इसके बाद लक्ष्मण अटामी को राज्य सरकार ने पुनर्वास योजना का लाभ दिया था.
बंदूक के बीच प्रेम
लक्ष्मण अटामी अपनी प्रेम कहानी और आत्मसमर्पण की बात को कुछ यूं बताते हैं, ''मैं आत्मसमर्पण के बाद दंतेवाड़ा में आराम से रह रहा था. लेकिन मुझे हमेशा अपनी प्रेमिका जयो की चिंता सताती रहती थी, जो अब भी माओवादी संगठन से जुड़ी हुई थी."
नारायणपुर के कोकेर गांव की रहने वाली जयमती उर्फ़ जयो साल 2013 से प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी से जुड़ी हुई थी. बाद में जयो को इलाके में चेतना नाट्य मंडली का अध्यक्ष बना दिया गया था.
संगठन में रहते हुए ही लक्ष्मण अटामी और जयो के बीच प्रेम संबंध बना.
अटामी का कहना है कि सुख की ज़िंदगी जीने के लिए उन्होंने माओवादी संगठन छोड़कर 19 जून 2019 को आत्मसमर्पण कर दिया. इसी दौरान उन्होंने जयो से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई.
इसी दौरान एक घटना ने लक्ष्मण को हिला कर रख दिया. लक्ष्मण अटामी के साथ आत्मसमर्पण करने वालों माओवादियों में ओड़िशा की एक प्लाटून का कमांडर सुरेश उर्फ़ वासुदेव भी शामिल था.
बीजापुर ज़िले के दोरागुड़ा गांव के रहने वाले आठ लाख के इनामी सुरेश ने संगठन में रहते हुए रजनी नामक माओवादी से प्रेम और फिर विवाह किया था. लेकिन संगठन में अलग-अलग ज़िम्मेदारी होने के कारण दोनों एक-दूसरे से दूर हो गए.
बाद में जून में सुरेश ने आत्मसमर्पण कर दिया और इस बीच रजनी पुलिस मुठभेड़ में मारी गई. इस ख़बर के बाद लक्ष्मण अटामी को भी जयो की चिंता सताने लगी.
वैलेंटाइन डे के दिन चिट्ठी
इसी साल 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे के दिन लक्ष्मण अटामी ने एक लाख रुपये की इनामी जयो के नाम टूटी-फूटी गोंडी भाषा में एक चिट्ठी लिखी.
गोंडी में लिखी इस चिट्ठी के बारे में भाषाविद् सिकंदर ख़ान ऊर्फ दादा जोकाल ने बीबीसी को बताया कि जयो के नाम से लिखी चिट्ठी में लक्ष्मण ने उससे आत्मसमर्पण करने का अनुरोध किया था.
दादा जोकाल के अनुसार चिट्ठी में लक्ष्मण ने लिखा था, "मैं सोच रहा हूं कि अभी कम से कम अच्छा जीवन व्यतीत करें. तुम भी आत्मसमर्पण करो, ऐसा मैं चाह रहा हूं. आत्मसमर्पण के बाद हम अच्छे से जिएंगे. मैं आत्मसमर्पण के बाद दंतेवाड़ा में अच्छे से जी रहा हूं और मुझे सरकार से नौकरी भी मिली है."
बंदूक थामे जंगल-जंगल भटकने वाली माओवादी ज़िंदगी को लेकर लक्ष्मण ने चिट्ठी में लिखा, "मैं यह सोच रहा हूं कि पहले मुझे कितनी तकलीफ़ झेलनी पड़ती थी. तुम्हारी स्थिति भी मैं जानता हूं. दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण के बाद अब जंगल की बात क्या सोचें. यहां आत्मसमर्पण करने से सोने की जगह भी मिलेगी और हम अच्छे से रहेंगे. बच्चों को पढ़ा भी सकेंगे."
लक्ष्मण अटामी ने किसी तरह यह चिट्ठी जंगलों के भीतर जयो तक पहुंचाई. फिर दोनों के बीच संवाद शुरू हुआ.
लक्ष्मण अटामी की चिट्ठी के जवाब में जयो ने चिट्ठी लिखी कि आत्मसमर्पण की सज़ा सबको भुगतनी पड़ेगी. उसने इस फ़ैसले पर अफ़सोस जताया और आत्मसमर्पण से भी इंकार कर दिया.
लेकिन लक्ष्मण अटामी ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने प्रेम का वास्ता और अच्छी ज़िंदगी का हवाला देकर फिर से चिट्ठी लिखी और इस बार बात बन गई. इसके बाद शनिवार को जयो ने आत्मसमर्पण कर दिया.
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