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पहलू ख़ान लिंचिंग मामले में दो नाबालिग दोषी करार: प्रेस रिव्यू
राजस्थान के अलवर ज़िले में साल 2017 में हुए पहलू ख़ान मॉब लिंचिंग मामले में दो नाबालिगों को दोषी करार दिया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार अलवर की जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने यह फ़ैसला सुनाया.
55 वर्षीय पहलू खान के लिंचिंग मामले में 6 अभियुक्त बरी हो चुके हैं. विपिन यादव, रविंद्र यादव, कालू राम यादव, दयानंद यादव, योगेश खाटी और भीम राठी को बेनिफिट ऑफ़ डाउट (पुख्ता सबूत न होने के कारण) देते हुए सत्र अदालत ने बरी कर दिया था.
अब जिन दो नाबालिगों को इस मामले का दोषी करार दिया गया है उनकी सज़ा का ऐलान शनिवार को किया जाएगा.
YES BANK की हालत सुधारेगा SBI?
भारी वित्तीय संकट झेल रहे यस बैंक में निवेश करने के लिए अब भारतीय स्टेट बैंक ने इच्छा जताई है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी समाचार के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने इस संबंध में जानकारी दी है.
रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को यस बैंक की पुनर्गठन योजना का मसौदा सामने रखा और कहा कि जो भी बैंक यस बैंक में निवेश करना चाहेगा उसे बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी लेनी होगी.
निवेशक बैंक यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी को पूंजी डालने के दिन से तीन साल तक 26 प्रतिशत से नीचे नहीं ला सकता है.
एक अनुमान के मुताबिक़ यस बैंक की अधिग्रहण राशि लगभग 11,760 करोड़ रुपए हो सकती है.
बायोमेट्रिक हाजिरी पर लगी रोक
केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए अपने सभी मंत्रालयों और विभागों में कर्मचारियों के बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. यह रोक 31 मार्च 2020 तक जारी रहेगी.
दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि देश में कोरोना वायरस के फैलने के तरीकों को देखते हुए यह आवश्यक है कि इसे रोकने के लिए सभी उपाय किए जाएं.
अख़बार के अनुसार सरकार ने कहा है कि सभी मंत्रालयों/विभागों को निवेदन है कि वो अपेन कर्मचारियों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस से 31 मार्च 2020 तक छूट दें. सभी कर्मचारियों को रजिस्टर में अपनी अटेंडेंस दर्ज करनी होगी जैसा कि बायोमेट्रिक सिस्टम के शुरू होने से पहले हुआ करता था.
'भ्रष्टाचार के आरोप हुए' तो सरकारी अधिकारी नहीं मिलेगा पासपोर्ट
जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार सरकार ने फ़ैसला किया है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है या फिर उसके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है उन्हें पासपोर्ट नहीं मिलेगा.
कार्मिक मंत्रालय ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि ऐसे सरकारी बाबुओं को पासपोर्ट की मंज़ूरी के लिए सतर्कता अनापत्ति की जांच कराना अब ज़रूरी होगा.
आदेश जारी करने से पहले कार्मिक मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिल कर इस संबंध में मौजूदी दिशानिर्देशों की समीक्षा की है.
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