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बिहार: भूमिहार और ब्राह्मण छात्रों को आईआईटी की फ्री कोचिंग देंगे अभयानंद
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के लिए बच्चों को फ्री कोचिंग देकर चर्चा में आयी संस्था सुपर-30 के संस्थापकों में से एक बिहार के पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस अभयानंद की मेंटरशिप में एक नयी संस्था की शुरुआत पटना में की गई है.
लेकिन यह संस्था सुपर-30 जैसी नहीं होगी बल्कि इसमें केवल उन्हीं ग़रीब छात्र-छात्राओं को आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए फ्री कोचिंग दी जाएगी जो या तो भूमिहार जाति के होंगे या ब्राह्मण.
संस्था को नाम दिया गया है, "ब्रह्मजन-100". इसमें 100 छात्रों और 50 छात्राओं को न सिर्फ़ कोचिंग दी जाएगी बल्कि उनका रहना-खाना भी फ्री होगा.
"ब्रह्मजन चेतना मंच" ने इसकी स्थापना की है. और पूर्व डीजीपी अभयानंद को संस्था का एकेडमिक मेंटर बनाया गया है.
गुरुवार को पटना के आईएमए हॉल के एक कार्यक्रम में ब्रह्मजन - 100 के उद्घाटन के मौक़े पर स्वयं अभयानंद भी मौजूद थे.
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह एक सामाजिक प्रयास है. इससे ब्राह्मण और भूमिहार समाज के उन छात्र-छात्राओं को फ़ायदा होगा जो पैसे की कमी या अन्य किसी दूसरी वजहों से पिछड़े हैं."
अभयानंद ने यह बात ज़ोर देते हुए कही कि, "इसमें सरकार का कोई योगदान नहीं है." उन्होंने समाज के समर्थवान लोगों से इसमें सहयोग देने की अपील भी की.
उद्घाटन के मौक़े पर ब्रह्मजन- 100 के कार्यक्रम के बारे में भी बताया गया. 2020 की मैट्रिक (दसवीं की) परीक्षा में हिस्सा लिए छात्र इसमें प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं.
प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन पटना, मुज़फ़्फ़रपुर, आरा, गोपालगंज, जहानाबाद, गया, बेगूसराय, मोकामा, बरबीघा, लखीसराय, औरंगाबाद, नवादा, भागलपुर और मोतिहारी में किया जाएगा.
इन जगहों को इसी आधार पर चुना गया है क्योंकि यहां भूमिहार जाति की आबादी अधिक है. प्रवेश के लिए आवेदन ऑनलाइन (संस्था की वेबसाइट) और ऑफ़लाइन (संस्था के कार्यालय) दोनों तरीक़े से किया जा सकता है.
जब से इस कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ है, तभी से इसे लेकर सवाल भी उठने लगे हैं, सोशल मीडिया पर चर्चाएं होनी शुरू हो गई हैं.
इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाला है. इसलिए जातिगत आधार पर शुरू हुए इस कार्यक्रम को लेकर सवाल हो रहे हैं.
उठ रहे हैं सवाल
इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि केवल एक जाति विशेष के छात्रों के लिए ही ऐसा कार्यक्रम क्यों शुरू हुआ?
यदि शुरू भी हुआ तो उस शख्सियत के मार्गदर्शन में जो इससे पहले सुपर-30 के साथ जुड़ा रहा है. और सुपर-30 की पहचान समाज के हर जाति-वर्ग के ग़रीब छात्रों को आईआईटी प्रवेश परीक्षा की ट्रेनिंग के लिए दुनिया भर में विख्यात है.
डीजीपी अभयानंद इन सवालों पर कहते हैं, "मैंने पहले ही कहा है कि यह एक सामाजिक प्रयास है जो एक ख़ास समाज के लोगों के ज़रिए अपने ही समाज के ग़रीब छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए हो रहा है."
अभयानंद कहते हैं, "इससे पहले साल 2008 में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भी एक पहल अपने समाज के छात्रों के लिए की थी. मैंने उनका भी मार्गदर्शन किया है. "
सुपर-30 की बात पर अभयानंद कहते हैं, "जिस सोच को लेकर सुपर-30 की शुरूआत हुई थी, ये उसी दिशा में एक क़दम है. मैंने सुपर-30 को शुरू किया था, उसे आगे बढ़ते देखा. बाक़ी तो दुनिया जानती है कि क्या हुआ नहीं हुआ! "
ब्रह्मजन-100 पर उठ रहे सवालों को लेकर सुपर-30 के दूसरे संस्थापक गणितज्ञ आनंद कुमार कहते हैं, "सबसे पहले तो ये कि सुपर-30 उनका नहीं है. यह बात दुनिया जानती है कि मेरे ही घर शुरू हुआ, मेरे ही घर चला और मेरे ही घर के पते पर रजिस्टर्ड भी है."
आगे कहते हैं, "मैं ऐसी किसी संस्था को सुपर-30 से नहीं जोड़ना चाहूंगा जो एक किसी वर्ग, जाति या धर्म विशेष के लिए काम कर रही है. हमारा विचार "सबका साथ-सबका विकास" वाला है. और केवल नारों में नहीं है, बल्कि व्यवहार में भी है."
चुनावी कनेक्शन तो नहीं
वैसे आनंद कुमार ने इसी साल से सुपर-30 का संचालन बंद कर दिया है. सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की थी और एक साल का ब्रेक लिया था.
आनंद कुमार के मुताबिक़ उन्होंने सुपर-30 से सिर्फ़ एक साल के लिए ब्रेक लिया है. इस दौरान घूम रहे हैं और यात्राएं कर रहे हैं. अगले साल वे सुपर-30 से भी आगे का और अलग तरह का एक कार्यक्रम लेकर आएंगे.
सोशल मीडिया पर कुछ चर्चाएं ऐसी भी हो रही हैं जिनके अनुसार अभयानंद द्वारा यह क़दम विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है.
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़ आगामी विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण अहम होने वाले हैं.
चुनाव से पहले इस तरह के कार्यक्रम सवर्णों की गोलबंदी के लिए किए जा रहे हैं. सवर्ण जातियों में भी राजपूतों और भूमिहारों के समाज के कार्यक्रम बढ़ गए हैं.
हाल ही मे पटना के गांधी मैदान में भूमिहार जाति के लोगों ने बड़ी रैली की थी. श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में उनका एक सम्मेलन भी हुआ था जिसमें शासन और प्रशासन से जुड़े भूमिहारों ने शिरकत की थी.
पिछले महीने ही बिहार सरकार में शामिल राजपूत समाज के नेताओं ने मिलकर वीरचंद पटेल स्थित मिलर स्कूल के ग्राउंड में एक कार्यक्रम किया था. इस कार्यक्रम में ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिस्सा लिया था. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शामिल लोगों का अभिवादन घोड़े पर चढ़ कर किया था.
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