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दिल्ली हिंसाः बर्बाद हो चुके शिव विहार का आंखों देखा हाल
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार की ओर बढ़ते ही जलने के बाद रह जाने वाली बू आने लगती है. आसमान से धुआं छट चुका है लेकिन ज़मीन पर बर्बादी के निशान बाक़ी हैं.
दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में सबसे ज़्यादा प्रभावित यही इलाक़ा हुआ है. हालांकि यहां कितने घर जले हैं या कितने लोग मारे गए हैं इसका सही हिसाब अभी नहीं लग सका है.
यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. सुरक्षाबलों की मौजूदगी में हालात सामन्य से लगते हैं लेकिन लोगों से बात करते ही तनाव का अंदाज़ा हो जाता है.
सोमवार (2 मार्च) दोपहर जब हम यहां पहुंचे तो पूर्वी दिल्ली नगर निगम की गाड़ियां जला हुआ सामान उठाती दिख रही थीं.
यहां स्थानीय लोग दोबारा अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने की कोशिशें कर रहे हैं.
यहां की पतली गलियों में अभी कांच के टुकड़े पड़े हैं, जली हुई बाइकें और जले हुए मकान दिख रहे हैं.
जिस गली में हम घुसे हैं वहां सभी घर ख़ाली पड़े हैं. जिन घरों में कभी ज़िंदगियां हंसती थीं वो अब वीरान पड़े हैं.
एक घर के बाहर ख़ाली ब्रीफ़केस पड़ा नज़र आया. सभी घरों में लूटपाट की गई है.
जिनके घर लुटे हैं उनका कहना है कि लूटपाट करने वाले सब लूट कर ले गए. अपने पिता के साथ अपना घर देखने आई एक लड़की दबी हुई आवाज़ में कहती है कि उनके घर में जो जूलरी रखी थीं वो भी लूट ली गईं.
लुटी हुई दुकानों के शटर टूटे हुए हैं.
यहां जगह-जगह जले हुए वाहन नज़र आते हैं. कई गलियों के बाहर बैरिकेडिंग की गई है.
अपने लुटे हुए घर पर ताला लगाने आए एक पीड़ित ने बताया, "सबकुछ टूट फूट गया है. सारा सामान लूट लिया गया है. अपना घर देखने आए हैं, शाम होते ही यहां डर लगने लगता है, कि कहीं कोई आ ना जाए, मार न दे."
एक व्यक्ति ने कहा, "हम पैंतीस साल से यहां एकता से रहते थे. जो हादसा हुआ है ये हमने कभी सोचा भी नहीं था. हमारे घर के ज़ेवरात और पैसे लूट कर ले गए."
"हमारा बचपन साथ में बीता था, लेकिन अब ऐसी दहशत हो गई है कि बच्चे बीमार पड़ गए हैं, घर लौटने का सोचते ही कांपने लगते हैं."
यहां जिन लोगों में से हमने बात की उनका कहना था कि हिंसा और आगज़नी करने वाले लोग बाहर से आए थे.
एक चश्मदीद ने बताया, "हमलावर पूरी तैयारी से आए थे. उनके पास सिलेंडर थे जो उन्होंने मस्जिदों में, मुसलमानों के घरों में फोड़ दिए. वो यहां के नहीं थे."
ऐसा नहीं है कि शिव विहार में सिर्फ़ मुसलमानों के ही घरों को निशाना बनाया गया हो. हिंदूओं के घरों में भी लूटपाट हुई है.
स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि वो हमलावरों को नहीं पहचानते हैं.
एआईएमआईएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने भी शिव विहार में हुई हिंसा पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ये हिंसा पूरी तरह से सरकार की ओर से प्रायोजित थी.
उन्होंने कहा, "अगर कहीं फ़साद होता है और वो चार घंटों से ज़्यादा चलता है तो समझ जाना चाहिए कि सरकार फ़साद कराना चाहती थी."
उन्होंने कहा, "मै भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कह रहा हूं, मैं आपके साथ चलने को तैयार हूं, शिव विहार एक बस्ती है, जिसमें बड़ी तादाद में मुसलमान रहते हैं, आज वो खंडहर बन गई है. ऐसा लग रहा था जैसे कोई फ़ौज आकर उसे बर्बाद करके चली गई."
उन्होंने कहा, "अंकित शर्मा नाम का एक आईबी का अधिकारी मारा गया. मैं उसकी मां के साथ हूं. मैं प्रधानमंत्री से पूछता हूं कि आपने फ़साद को क्यों नहीं रोका. आपका 56 इंच का सीना है और आप दिल्ली में फ़साद को नहीं रोक पाते."
ओवैसी ने कहा, "मैंने अपनी आंखों से देखा कि दिल्ली की एक मस्जिद की मीनार पर शैतानों ने चढ़कर अपना भगवा झंडा लहरा दिया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपनी ज़िंदगी में मुझे ऐसा नज़ारा देखना पड़ेगा."
ओवैसी ने कहा, "ऐसी नफ़रत पैदा कर दी गई है मुसलमानों के ख़िलाफ़ कि कोई मदद को भी नहीं आता."
उन्होंने कहा, "अनीस नाम के एक बीएसएफ़ के जवान के उस घर को भी जला दिया जिसपर बीएसएफ़ का निशान लगा था. क़र्ज़ लेकर ली गई जूलरी लूट ली गई. उसकी शादी के लिए रखे गए दस लाख रुपए लूट लिए गए."
ओवैसी ने कहा, "मैं मोदी से पूछता हूं कि मुसलमान करें तो क्या करें? हमारी ज़बान सच को बयान करती आई हैं, और करती रहेंगी. अगर हमारी ज़बान से निकलने वाले अल्फ़ाज़ आपको तकलीफ़ पहुंचाते हैं, अगर हमारे भाषण आपके ज़मीर को जगाते हैं तो याद रखो, हमारी ज़बान तब ही बंद होगी जब अल्लाह के हुक्म से हमारी आंखें बंद होंगी."
दिल्ली में तीन दिनों तक हुई सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 46 लोग मारे गए हैं और क़रीब तीन सौ घायल हैं. इस हिंसा के दौरान सैकड़ों घरों, दुकानों और वाहनों को भी आग लगा दी गई.
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