शाहीन बाग़: आख़िरी दिन की चर्चा कहां तक पहुंची?

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहीन बाग़ मामले में वार्ता के लिए नियुक्त किये गए वरिष्ठ वकील संतोष हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों से मिलकर उन्हें आश्वस्त किया कि वे उनकी सुरक्षा की माँग को अदालत में रखेंगे.
दोनों वार्ताकार पिछले तीन दिन से शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत के ज़रिये कोई हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
शुक्रवार को हेगड़े ने प्रदर्शनकारियों से सड़क खोलने की अपील करते हुए कहा, 'ना सिर्फ़ सड़क, बल्कि अपने दिलों को भी खोलें.'
दोनों वार्ताकारों ने इस तरह के संकेत दिये हैं कि शीर्ष अदालत अगर उनकी सुरक्षा की माँग को मानती है तो प्रदर्शनकारी एक तरफ की सड़क खोलने के लिए मान जायेंगे.
हालांकि शुक्रवार को भी अधिकांश प्रदर्शनकारी शाहीन बाग़ के मौजूदा प्रदर्शनस्थल पर बने रहने के पक्ष में ही दिखे.

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प्रदर्शनकारियों से बातचीत के दौरान साधना रामचंद्रन ने कहा, "मैंने यहाँ आसपास की सड़कों का दौरा किया और पाया कि नोएडा और फ़रीदाबाद को जोड़ने वाली सड़क को बेवजह ही बंद किया हुआ है."
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दोनों वार्ताकारों ने इस बात की जानकारी भी लेनी चाही कि दूसरी तरफ़ की सड़क को आख़िर किसने बंद कर रखा है.
शुक्रवार की मुलाक़ात, दोनों वार्ताकारों और प्रदर्शनकारियों के बीच अंतिम मुलाक़ात थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अब अगली सुनवाई 24 फ़रवरी को करेगा.
नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों की वजह से शाहीन बाग़ देश में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बीते कुछ हफ़्तों से चर्चा का विषय बना हुआ है.
साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े का बयान
आज शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों से बातचीत का हमारा तीसरा दिन था. चूंकि आज हम प्रदर्शनकारियों के ज़्यादा करीब थे इसलिए हम उनकी घबराहट, तकलीफ़ और डर को ज़्यादा बेहतर तरीके से समझ पाए. वो अपनी सुरक्षा को लेकर ख़ास तौर डरे हुए लगे.
पहले कदम के तौर पर हमने सड़क का वो एक हिस्सा खोलने के बारे में चर्चा की जो पहले प्रदर्शनकारियों ने बंद नहीं की थी.
उन्होंने फिर से स्पष्ट किया कि जहां प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं वहां भी दिल्ली पुलिस ने सड़क रोक रखी है, उन्होंने नहीं. हालांकि बाद में प्रदर्शनकारियों ने उस जगह का बंद किया जाना उनकी सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है, ख़ासकर हाल में हुई गोलीबारी की घटना को देखते हुए.
सैद्धांतिक तौर पर प्रदर्शनकारी धरने के दूसरी तरफ़ का रास्ता खोलने के ख़िलाफ़ नही हैं. बस वो इतना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार दिल्ली पुलिस लिखित में उनकी सुरक्षा की गारंटी ले.
आज सुबह हम पुलिस के नोएडा-फ़रीदाबाद रोड खोले जाने से बहुत ख़ुश थे. इससे फ़रीदाबाद आने-जाने वाले लोगों को भी बहुत राहत मिली थी.
हालांकि कुछ ही देर बाद हमें बताया गया कि पुलिस ने इस रोड को बिना किसी स्पष्ट कारण के फिर से बंद कर दिया.
ये हमारे लिए बहुत परेशान करने वाला है और दोबारा ज़ोर देकर कहना चाहते हैं कि रास्तों को दोबारा बैरिकेड कर दिए जाने से दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों में भरोसा बनाने के हमारे मकसद को नाकामयाब कर दिया है.
शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और वॉलंटियर्स ने आज जैसी अनुशासित बातचीत की, उसके लिए हम उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं.
हम मीडिया के अनुशासन और हमारी प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत को रिकॉर्ड न करने के लिए, उसे भी धन्यवाद कहना चाहते हैं.
हम कल कोई सार्वजनिक बातचीत नहीं करेंगे ताकि प्रदर्शनकारी आपस में विचार-विमर्श करके आगे के लिए किसी स्वतंत्र फ़ैसले पर पहुंच सकें. हम रविवार को बातचीत के लिए तभी लौटेंगे जब हमें ऐसा करना ज़रूरी लगेगा.

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उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य के साथ पीएम मोदी से मिले
महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिव सेना के पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में औपचारिक मुलाक़ात की.
इस मुलाक़ात के दौरान उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे भी उनके साथ थे.
इस संक्षिप्त भेंट की कुछ तस्वीरें ट्वीट करते हुए आदित्य ठाकरे ने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के रिश्तों के अलावा कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला. जीएसटी, पीएम फ़सल बीमा योजना, केंद्रीय रोड फ़ंड, बालीराजा संजीवनी योजना और पीएमसी बैंक के बारे में उनसे बात हुई. इसके साथ ही पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दों, जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन, प्लास्टिक पर बैन और पुनरुपयोगी ऊर्जा संबंधित कोई नीति बनाने की हमने माँग की."
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इस बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता भी की जिसमें पार्टी के नेता संजय राउत भी नज़र आये.
प्रेस वार्ता में उद्धव ने कहा कि 'सीएए पर उनका स्टैंड कायम है, उन्हें नहीं लगता कि इस नये क़ानून से किसी को भी डरने की ज़रूरत है क्योंकि नया क़ानून विदेशों में रह रहे अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है.'
उन्होंने कहा कि 'नागरिकता संशोधन अधिनियम से भारत में रह रहे किसी भी शख़्स की नागरिकता को कोई ख़तरा नहीं है.'
हालांकि इस क़ानून की उपयोगिता और क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने कहा कि 'सरकार ने किस तरह के बन्दोबस्त किये हैं, इसका जवाब केंद्र सरकार को देना चाहिए.'
ठाकरे ने ये भी कहा कि 'एनआरसी एक जटिल और मुश्किलें पैदा करने वाली व्यवस्था है जिसे वे महाराष्ट्र में लागू नहीं होने देंगे.'

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प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के बाद शिवसेना के तीनों नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने भी उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाक़ात की.
प्लेटफ़ॉर्म टिकट मुफ़्त देने की रेलवे की नई मुहिम
रेल मंत्रालय ने दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर फ़िटनेस को प्रोत्साहन देने के लिए एक प्रयोग किया है.
यहाँ एक मशीन लगाई गई है जिसके सामने उठक-बैठक करने पर प्लेटफ़ॉर्म टिकट फ्री मिलेगा. भारत में रेलवे प्लेटफॉर्म टिकट की क़ीमत फ़िलहाल 10 रुपये है.
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इस पहल की जानकारी देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें एक शख़्स इस नई मशीन के आगे उठक-बैठक करता दिखाई देता है.
बताया गया है कि रेलवे स्टेशन के भीतर जाने का इच्छुक व्यक्ति जितनी बार मशीन के सामने उठक-बैठक करेगा, मशीन उसे गिनेगी.
फ़िट इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए रेलवे मंत्रालय ने यह मुहिम शुरू की है.
अगर आप 180 सेकंड में 30 बैठक पूरी कर लेते हैं तो आपके लिए प्लेटफ़ॉर्म टिकट फ़्री होगा.

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भारत के लिहाज़ से यह प्रयोग भले ही नया है लेकिन मास्को और दुनिया के कई देशों में इस तरह का प्रयोग पहले किया जा चुका है.
मॉस्को में सब-वे टिकट औसतन 30 रूबल यानी क़रीब 30 रुपये का होता है. लेकिन कोई शख़्स अगर इस मशीन के आगे 30 स्क्वाएट्स लगा लेता है तो उसे टिकट नहीं लेना पड़ता.
गुमनामी बाबा का रहस्यः मामले में नया मोड़
गुमनामी बाबा कौन थे? उनकी पहचान से जुड़ा रहस्य कोलकाता स्थित सीएफ़एसएल के जवाब के बाद और गहरा गया है.
सेंट्रल फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी ने एक आरटीआई जवाब में बताया है कि रहस्यमयी गुमनामी बाबा के दांत का इलेक्ट्रोफ़ेरोग्राम उनके रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है.

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कई लोग ये मानते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस गुमनामी बाबा के भेष में छिपकर रह रहे थे.
इलेक्ट्रोफ़ेरोग्राम का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के डीएनए जांच के नतीज़ों को समझने के लिए किया जाता है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ नेताजी की मौत की जांच के लिए गठित विष्णु सहाय कमीशन ने सीएफ़एसएल, कोलकाता के रिपोर्ट हवाले से ये दावा किया था कि गुमनामी बाबा नेताजी बोस नहीं थे.
राजस्थान में सड़क हादसा
राजस्थान में हुए एक सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गई है.

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समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस के हवाले से बताया कि हनुमानगढ़ ज़िले में एक ट्रक और गाड़ी की टक्कर से ये दुर्घटना हुई.
पुलिस ने बताया कि हादसे में 12 साल की एक लड़की घायल हो गई है जिसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
दुर्घटना हनुमानगढ़ ज़िले के पल्लू पुलिस थाने में हुई.

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