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अरविंद केजरीवाल के शपथ ग्रहण समारोह का आंखों-देखा हाल: ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए लोगों का दिल्ली के रामलीला मैदान में आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था.
आम आदमी पार्टी ने इस समारोह में शामिल होने के लिए किसी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री को न्यौता नहीं दिया.
सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही इस समरोह के लिए आम आदमी पार्टी ने आमंत्रित किया था.
शपथ ग्रहण के बाद बोलते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा, "हमने प्रधानमंत्री जी को समारोह में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था लेकिन वो किसी दूसरे कार्यक्रम में पहले ही व्यस्त हैं. लेकिन हमें प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार का आशीर्वाद चाहिए."
लोगों का हुजूम रामलीला मैदान की तरफ़ बढ़ता रहा. ढोल नगाड़े और बैंड पार्टी की धुन पर थिरकते हुए कार्यकर्ता अपनी अपनी जगहों पर पहले पहुँचने की होड़ में थे.
प्रशासन की तरफ़ से इंतज़ाम
हाथों में तिरंगा और आम आदमी पार्टी का झंडा लिए कार्यकर्ता जश्न मनाते हुए समरोह स्थल पर पहुँच रहे थे.
दिल्ली के दूर-दराज़ इलाक़ों से रामलीला मैदान तक आने के लिए प्रशासन ने डीटीसी की बसों का इंतज़ाम भी किया था.
कई कार्यकर्ता बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से भी दिल्ली पहुंचे. ऐसा लग रहा था कि कोई उत्सव का माहौल हो.
इस बार आम आदमी पार्टी को सबसे ज़्यादा युवाओं और महिलाओं ने वोट दिया था.
कार्यकर्ता अपने बच्चों को अरविंद केजरीवाल के लुक में यानी मफ़लर और चश्मा पहनाकर लाये थे.
सरकारी सर्कुलर
लेकिन मंत्रिमंडल में किसी भी महिला के शामिल नहीं होने पर भी सवाल पूछे जा रहे हैं जबकि चुनावी प्रचार में भी आम आदमी पार्टी ने महिलाओं के मुद्दों को सामने रखा था.
ये पहला मौक़ा भी था जब दिल्ली के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आधिकारिक तौर पर न्यौता दिया गया था.
इस मामले में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के 'केयर टेकिंग ब्रांच' द्वारा 14 फ़रवरी को ही अधिसूचना जारी की गई थी.
ये अधिसूचना 'केयर टेकिंग ब्रांच' के ओएसडी रविंदर कुमार द्वारा जारी की गई है जिसमें कहा गया कि 'दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह 16 फ़रवरी को है जिसमें बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होंगे.'
अधिसूचना में जिनको शपथ ग्रहण समारोह के लिए बुलाया गया उनमें शिक्षा निदेशालय, 'एससीईआरटी' और 'डीईआईटी' के अधिकारियों के अलावा स्कूलों के हेडमास्टरों को कहा गया कि वो अपने-अपने स्कूलों से बीस-बीस शिक्षकों के साथ शपथ ग्रहण समारोह में आने के बाद वहां मौजूद अधिकारियों के समक्ष अपनी हाज़िरी भी लगवाएं.
लेकिन विपक्ष ने इस अध्यादेश को लेकर आम आदमी पार्टी की आलोचना की और कहा कि ऐसा शपथ ग्रहण में भीड़ जुटाने के उद्देश्य से इस तरह के निर्देश जारी किये गए हैं.
फिर शनिवार की देर शाम पहले अध्यादेश में संशोधन कर कहा गया कि ये अध्यादेश 'केवल न्योते के लिए है और इसमें ना हाज़िरी लगेगी और ना ही आना ही अनिवार्य होगा.'
अभिज्ञराज सिंह पूर्वी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में 'हेड मास्टर' हैं.
वो भी अपने साथ शिक्षकों के दल को लेकर सुबह-सुबह ही रामलीला मैदान पहुँच गए थे.
उनका कहना था कि वो स्वेच्छा से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने आए हैं.
कई शिक्षक कुछ कहने से बचे
गीता गोस्वामी भी एक सरकारी स्कूल में पढ़ाती हैं. वो कहती हैं कि वो ड्यूटी पर आई हैं.
ज़ाहिर सी बात है कि सरकारी स्कूल के शिक्षक शिक्षा निदेशालय के बारे में कुछ खुलकर नहीं बोलना चाहते हैं.
सुधांशु भी गांधीनगर के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं. वो ज़्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते हैं. बस इतना कहते हैं कि वो शपथ ग्रहण समारोह देखने आए हैं.
लेकिन वो और उनके साथ आये शिक्षक पहली बार इस तरह के समारोह में शामिल होने आए हैं.
द्वारका सेक्टर 2 स्थित सरकारी स्कूल के प्राध्यापक एसके सिंह कहते हैं कि छुट्टी के दिन वो समारोह में शामिल होने आए हैं क्योंकि दिल्ली ने पिछले पांच सालों में शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी ऊचाइयां हासिल कीं हैं.
वो कहते हैं कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के मॉडल का दूसरे राज्य भी अनुसरण करना चाहते हैं.
ये पूछे जाने पर कि समरोह में शामिल होने के लिए कोई औपचारिक निर्देश जारी किया गया है, एक महिला शिक्षक कहतीं हैं कि सर्कुरल में साफ़ लिखा हुआ है कि हमें 'समारोह में शामिल होने के लिए न्योता' भेजा गया है.
रामलीला मैदान के गेट नंबर 6 से अंदर जा रहीं महिला शिक्षकों में से एक स्नेहा का कहना था कि वो इस तरह के समारोह में पहली बार आई हैं क्योंकि हाल ही में उनकी नियुक्ति हुई है.
वैसे उन्होंने भी दिल्ली के सरकार स्कूलों में शिक्षा के स्तर की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्हें समारोह में आना अच्छा लगा.
शपथ लेने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने रामलीला मैदान में मौजूद लोगों से पूछा, "क्या आपको मालूम है दिल्ली कौन चलाता है? नहीं मालूम दिल्ली को चलाने वाले यहाँ सामने बैठे हैं. शिक्षक....... ये चलाते हैं दिल्ली...." वो सामने बैठे शिक्षकों की तरफ़ इशारा करते हुए उनके काम की सराहना करते हैं.
आम आदमी पार्टी के एक नेता का कहना था कि शिक्षकों को न्योता भेजकर बुलाया गया था.
मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उनके काम की सरहाना सबके सामने करना चाहते थे.
समारोह में जिनके कार्यों की सराहना मुख्यमंत्री ने की उनमें दिल्ली की मेट्रो रेल की महिला पायलट और सिविल डिफ़ेन्स के जवान थे जिन्होंने एक 6 साल की लड़की की उसके अपहरणकर्ताओं से जान बचाई थी.
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