शाहीन बाग़ पर सुप्रीम कोर्ट: सार्वजनिक सड़क को प्रदर्शन के लिए नहीं रोक सकते

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सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ दिल्ली के शाहीन बाग़ में चल रहे विरोध प्रदर्शन को हटाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है.
शाहीन बाग़ में बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध से दूसरों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि अनिश्चित काल के लिए प्रदर्शन नहीं होना चाहिए.
बीजेपी नेता और पूर्व विधायक डॉक्टर नंद किशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में मांग की गई थी कि अदालत केंद्र सरकार और दूसरी संस्थानों को आदेश दे कि शाहीन बाग़ का प्रदर्शन ख़त्म कराया जाए.
याचिका में ये भी मांग की गई थी कि अदालत भारत सरकार को निर्देश दे कि वो धरना प्रदर्शन के संबंध में एक समग्र गाइडलाइन तय करे ताकि सार्वजनिक जगहें बाधित न हों.
जस्टिस किशन कॉल और जस्टिस केएम जोसेफ़ ने याचिका की सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, ''यह धरना प्रदर्शन कई दिनों से चल रहा है. एक कॉमन क्षेत्र में यह जारी नहीं रखा जा सकता, वरना सब लोग हर जगह धरना देने लगेंगे. क्या आप पब्लिक एरिया को इस तरह बंद कर सकते हैं. क्या आप पब्लिक रोड को ब्लॉक कर सकते हैं. प्रदर्शन बहुत लंबे अरसे से चल रहा है और प्रदर्शन को लेकर एक जगह सुनिश्चित होनी चाहिए.''
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अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है और 17 फ़रवरी को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया है.
शाहीन बाग़ में 15 दिसंबर के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इसके कारण कालिंदी कुंज के पास दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाली सड़क बंद है और आम लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
धरने पर बैठने वालों में सबसे ज़्यादा महिलाएं हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार सीएए क़ानून वापस नहीं लेती वो प्रदर्शन करती रहेंगी.
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