You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कपिल गुज्जर के पिता बोले, 'बेटा मोदी-अमित शाह का सेवक'
- Author, सिंधुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"कपिल तो बहुत सीधा-सादा लड़का है. वो अपने काम से काम रखता है. भगवान जाने किस ग्रह-दशा में उसने ऐसा काम कर दिया. उसने हिंदुत्व के लिए ऐसा किया. ग़लत क्या किया? अगर उसे किसी को मारना होता तो वो हवा में फ़ायरिंग नहीं करता. वो बस ग़ुस्सा था. शाहीन बाग़ की वजह से कितने दिनों से रास्ता जाम है. लोगों को कितनी परेशानी हो रही है."
शाहीन बाग़ में फ़ायरिंग करने वाले कपिल गुज्जर के गांव दल्लूपुरा जाने पर उसके रिश्तेदारों और पड़ोसियों से कुछ ऐसी ही बातें सुनने को मिलीं.
24 वर्षीय कपिल ने शाहीन बाग़ में प्रदर्शन स्थल के पास गोली चलाई थी. हवा में फ़ायरिंग करने और पुलिस की गिरफ़्त में आने के बाद उसने कहा था, "हमारे देश में किसी और की नहीं चलेगी, सिर्फ़ हिंदुओं की चलेगी."
एक अन्य वीडियो में कपिल को 'जय श्रीराम' का नारा लगाते भी देखा जा सकता है. कपिल को गिरफ़्तार करने के तीन दिन बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दावा किया कि वो आम आदमी पार्टी का सदस्य है.
सबूत के तौर पर पुलिस ने कुछ तस्वीरें जारी कीं जिनमें कपिल आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और आतिशी मार्लेना के साथ नज़र आ रहा है.
पुलिस के इस दावे के बाद आम आदमी पार्टी और बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है. दोनों पार्टियां एक दूसरे पर झूठ बोलने और दंगे भड़काने का आरोप लगा रही हैं.
इधर, कपिल के परिजनों ने आम आदमी पार्टी से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है. ताज़ा बयान कपिल के पिता गजे सिंह का आया है जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से प्रभावित है.
एक वीडियो इंटरव्यू में गजे सिंह ने कहा, हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. हां, ये ज़रूर है कि मेरा लड़का कपिल गुज्जर थोड़ा मोदी समर्थक है. वो मोदी और अमित शाह जी का थोड़ा सेवक है...वो शहीन बाग़ की वजह से लगे जाम से परेशान था. वो हमेशा हिंदू, हिंदुत्व और हिंदुस्तान की बात करता था. लेकिन उसने ऐसा कदम कैसे उठाया, मुझे नहीं मालूम.''
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कपिल के पिता के इस इंटरव्यू को ट्वीट किया और लिखा है, ''भाजपा दिल्ली की क़ानून व्यवस्था और देश की सुरक्षा के साथ गंदी राजनीति और खिलवाड़ कर रही है. चुनाव के दो दिन पहले आम आदमी पार्टी पर झूठा आरोप लगाना गंदी राजनीति थी. आज सच सामने आ गया.''
दल्लूपुरा में क्या कहते हैं लोग
इन सबके बीच कपिल के रिश्तेदारों, पड़ोसियों और उसे जानने वालों का क्या कहना है? यही समझने के लिए हम उसके गांव दल्लूपुरा पहुंचे.
पूर्वी दिल्ली में स्थित दल्लूपुरा, कोंडली विधानसभा के अंतर्गत है. गांव में दिल्ली की चुनावी फ़िज़ा का अहसास बख़ूबी होता है. कपिल के पिता गजे सिंह रसूखदार शख़्स हैं. उनके घर का पता पूछने पर लोग तुरंत इशारा करके बताते हैं: वो सफेद तिमंज़िला बिल्डिंग.
तिमंज़िला बिल्डिंग के पास पहुंचने पर एक नीला साइन बोर्ड दिखता है, जिस पर लिखा है: निवास स्थान, चौधरी गजे सिंह, ज़िला अध्यक्ष.
घर के बाहर दरवाजे पर दो युवक बैठे मिलते हैं. दोनों ख़ुद को कपिल का रिश्तेदार बताते हैं. इनमें से एक युवक कहता है, "घर में कोई नहीं है. गजे सिंह कहां हैं, हमें नहीं मालूम. कपिल की मां की तबीयत ख़राब है. वो अस्पताल में भर्ती हैं. किस अस्पताल में. ये नहीं मालूम."
रिश्ते में कपिल के चाचा लगने वाले परवीन कुमार उसके आम आदमी पार्टी से जुड़े होने का ज़ोर-शोर से खंडन करते हैं.
उन्होंने कहा, "कपिल के परिवार का अगर किसी पार्टी से रिश्ता रहा है तो वो है बसपा. साल 2008 में उन्होंने बसपा के टिकट पर जंगपुरा से विधायक का चुनाव लड़ा था लेकिन वो हार गए थे. उन्होंने दो बार नगर निगम का चुनाव भी लड़ा था लेकिन यहां भी उन्हें हार ही मिली थी."
परवीन कुमार बताते हैं, "जब हमारे ताऊ जी (गजे सिंह) चुनाव लड़े थे तब कपिल बहुत छोटा था. चुनाव में हार मिलने के बाद उन्होंने राजनीति छोड़कर डेयरी के बिज़नेस पर ध्यान देना शुरू कर दिया था. कपिल भी डेयरी के काम में ही लगा रहता था. वो रोज़ सुबह चार बजे उठकर डेयरी पहुंचने वाला लड़का है."
परवीन कुमार का कहना है कि एक ज़माने में राजनीति में सक्रिय होने की वजह से आज भी हर पार्टियों के नेता कपिल के परिवार से मिलने-जुलने आते रहते हैं.
उन्होंने कहा, "वो तस्वीर लोकसभा चुनाव के समय की है, जब आतिशी यहां प्रचार करने आई थीं. अगर कपिल का आम आदमी पार्टी से कोई ताल्लुक है तो पुलिस हमारे विधायक कुलदीप कुमार के साथ उसकी कोई तस्वीर ढूंढकर दिखाए, किसी रैली में उसकी तस्वीर निकालकर दिखाए."
बातचीत में मालूम हुआ कि कपिल शादीशुदा है और उसकी एक साल की बेटी भी है. अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे कपिल की शादी लगभग चार साल पहले हुई थी.
लेकिन अगर कपिल इतना ही सीधा-सादा है तो उसने फ़ायरिंग करने जैसा कदम क्यों उठा लिया?
इसके जवाब में परवीन कहते हैं, "कपिल को काम के सिलसिले में अक्सर शहीन बाग़ वाले रास्ते से जाना पड़ता था. हमारी कुछ रिश्तेदारियां भी उधर हैं. इसलिए आना-जाना लगा रहता है. हम वहां घंटों-घंटों जाम में फंसे रहते हैं. हो सकता है उसे ग़ुस्सा आ गया हो."
कपिल के 'इस देश में सिर्फ़ हिंदुओं की चलेगी...' वाली बात पर उसके दूसरे चाचा अमित कहते हैं, "उसने ऐसा हिंदुत्व के लिए कहा होगा. सबके अपने विचार होते हैं. हम किसी को रोक नहीं सकते. लेकिन मैं इतना पक्के तौर पर कह सकता हूं कि वो किसी को नुक़सान नहीं करना चाहता था. वो सिर्फ़ जाम ख़त्म करवाना चाहता था. उसका इरादा ग़लत नहीं था. हां, उसका तरीका ज़रूर ग़लत हो सकता है."
गोली चलाने के बारे में कपिल के एक अन्य रिश्तेदार नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, "अगर आप 10 हिंदुओं से पूछेंगे तो 10 में से आठ उसके गोली चलाने को सही बताएंगे. लेकिन अगर 10 मुसलमानों से पूछेंगे तो 10 में दसों मुसलमान इसे ग़लत बताएंगे. उसने हिंदुओं के पक्ष में बोला तो हिंदुओं को ये अच्छा ही लगेगा."
कपिल के पास पिस्तौल कहां से आई? ये पूछने पर परवीन और अमित कहते हैं कि इसका जवाब तो सिर्फ़ कपिल ही दे सकता है. दोनों ये भी कहते हैं कि परिवार में किसी के पास पिस्तौल या कोई दूसरा हथियार कभी नहीं रहा.
परवीन का आरोप है कि कपिल के ग़ुस्से में लिए एक कदम का फ़ायदा राजनीतिक पार्टियां उठा रही हैं. वो कहते हैं, "आप देखिएगा, चुनाव के बाद ये मामला ठंडा पड़ जाएगा. कपिल घर आएगा तो मैं ख़ुद आपको उसका इंटरव्यू दिलवाऊंगा. तब आपको समझ में आएगा कि वो कितना अच्छा लड़का है."
कपिल के कई रिश्तेदारों और पड़ोसियों से बात करने पर बार-बार एक ही तरह बात सुनने को मिलती है, "कपिल भोला-भाला है. हम उसके साथ खड़े हैं."
कपिल के घर में कई अरसे तक किराएदार के तौर पर रहने वाले सुनील कुमार कहते हैं कि उसका पूरा परिवार काफ़ी मददगार और सुलझा हुआ है. वो कहते हैं, "जो कुछ हुआ, मुझे उस पर भरोसा नहीं हो रहा है."
50 वर्षीय ओमवती कहती हैं, "वो तो मेरे सामने का लड़का है. न जाने किस ग्रह-दशा में ये सब कर बैठा. सब ग़लत हो रहा है. मीडिया में ग़लत-ग़लत बातें कही जा रही हैं."
नागरिकता क़ानून को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बारे में पूछने पर ओमवती कहती हैं, "मैं इन सबके बारे में कुछ नहीं जानती बिटिया. बच्चे जिसे कहेंगे, उसे वोट दे दूंगी बस. वैसे तो मोदी जी अच्छा काम कर रहे हैं. केजरीवाल भी अच्छा काम कर रहे हैं. सब अपनी-अपनी जगह अच्छा ही काम कर रहे हैं."
राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच दल्लूपुरा में चुनावी फ़िज़ा को बख़ूबी महसूस किया जा सकता है. कपिल गुज्जर पर चर्चा जारी ही है कि अचानक एक आवाज़ सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती है: आपका अपना अक्षय कुमार! अक्षय कुमार! अक्षय कुमार!
ये रिकॉर्डेड आवाज़ बैटरी से चलने वाले रिक्शेनुमा छोटी सी गाड़ी से आ रही है. इसे लिए एक शख़्स दल्लूपुरा की गलियों में घूम-घूमकर निर्दलीय उम्मीदवार अक्षय कुमार का प्रचार कर रहा है, जिनका चुनाव चिह्न सीटी है.
साइकिल पर एक पोस्टर लगा है, जिस पर अक्षय कुमार की तस्वीर है और लिखा है-फूटपरस्त, सांप्रदायिक, मौकापरस्त एवं भ्रष्ट राजनीति को परास्त करें.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)