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शरजील इमाम के समर्थन में नारे, मुंबई में 51 पर राजद्रोह का केस
- Author, मयूरेश कोण्णूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई पुलिस ने जेएनयू के छात्र शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाने पर 51 लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस दर्ज किया है.
दिल्ली पुलिस ने बीते दिनों शरजील इमाम को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आपत्तिजनक बयान देने के मामले में बिहार के जहानाबाद से गिरफ़्तार किया है.
शरजील इमाम के ख़िलाफ़ राजद्रोह का अभियोग लगाया गया है और उनसे पूछताछ जारी है.
बीती 1 फरवरी को मुंबई के आज़ाद मैदान में LGBTQ समूह की प्राइड परेड के दौरान शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए थे.
ये मामला सामने आने के बाद परेड के आयोजकों ने अपने आप को इससे दूर कर लिया. लेकिन पुलिस ने एक बीजेपी नेता की शिकायत पर इस मामले की जाँच शुरू कर दी है.
मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी प्रणय अशोक ने बीबीसी को बताया, "हमने 1 फरवरी को आज़ाद मैदान में 'क्वीर आज़ादी सम्मेलन 2020' के दौरान लगे नारों को लेकर आईपीसी सेक्शन 124A, 153B, और 34 के तहत मामला दर्ज किया है. अब तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. लेकिन जाँच जारी है."
इस मामले में जिन लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है, उनमें सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी चूड़ावाला भी शामिल हैं. मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हर साल क्वीर परेड का आयोजन किया जाता है.
इस परेड में LGBTQ समुदाय के लोग भाग लेते हैं और कुछ दूरी तक मार्च करते हैं. लेकिन इस बार सीएए और एनआरसी से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की संभावना को देखते हुए पुलिस ने अंतिम समय तक परेड के आयोजन की इजाज़त नहीं दी थी.
हालांकि बाद में पुलिस ने परेड को आयोजित करने की इजाज़त दे दी, लेकिन पुलिस ने एक शर्त रखी कि इसे आज़ाद मैदान में ही आयोजित करना होगा और परेड के दौरान किसी तरह का लॉन्ग मार्च आयोजित नहीं किया जाएगा.
शिक़ायतकर्ताओं का दावा है कि चूड़ावाला समेत कई अन्य लोग भी इस समुदाय का समर्थन करने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन्होंने शरजील इमाम के समर्थन में नारेबाज़ी की थी.
आयोजन के बाद क्या हुआ?
इस आयोजन के एक दिन बाद बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर परेड से जुड़े कुछ वीडियो जारी किए जिनमें कथित रूप से शरजील इमाम के समर्थन वाले नारे भी थे, जिससे सोशल मीडिया पर एक विवाद पैदा हो गया.
महाराष्ट्र में बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने ट्वीट किया, "मैंने मुंबई पुलिस से 1 फ़रवरी को एलजीबीटी कार्यक्रम के दौरान शरजील इमाम के समर्थन में लगे देशविरोधी नारों को लेकर शिकायत की थी. लेकिन ठाकरे सरकार ने पुलिस से तीन दिनों तक एफ़आईआर रजिस्टर नहीं करने को कहा. अगर तीन दिनों के अंदर पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगी तो मैं आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन पर धरना दूंगा."
पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ट्विटर पर वीडियो शेयर करके उद्धव सरकार को घेरने की कोशिश की है.
पुलिस ने इसके बाद उर्वशी चूड़ावाला समेत 51 अन्य लोगों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया है. लेकिन चूड़ावाला की माँ ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "उसने एक ग़लती की है लेकिन किसी ने उसे भड़काया है. पुलिस ने मेरा बयान ले लिया है."
उधर दूसरी ओर, साल 2020 मुंबई प्राइड के आयोजक 'क्वीर आज़ादी मुंबई' (क्यूएएम) ने ख़ुद को इस विवाद से अलग कर लिया है और आज़ाद मैदान में हुए कार्यक्रम के दौरान लगे नारों की आलोचना की है.
देशद्रोह क़ानून पर बहस
वहीं पुलिस द्वारा लगाए जाने वाले राजद्रोह के मुक़दमे को लेकर इस बीच काफ़ी बहस चल रही है.
सुप्रीम कोर्ट के वकील और 'द ग्रेस रिप्रेशन: द स्टोरी सेडिशन इन इंडिया' के लेखक चित्रांशुल सिन्हा से हमने इस मामले पर बात की.
उन्होंने कहा, "आईपीसी का सेक्शन 124ए, जिसे हम राजद्रोह कहते हैं और जो पुलिस ने इस मामले में लगाया है, सुप्रीम कोर्ट के 1962 के एक फ़ैसले की रोशनी में देखें तो इसे यहां नहीं लगाया जा सकता था."
चित्रांशुल कहते हैं, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये तभी लगाया जा सकता है कि अगर किसी बयान के कारण हिंसा होती है या फिर हिंसा भड़कने या व्यवस्था भंग होने का ख़तरा हो. इस मामले में ऐसा नहीं लगता. साथ ही 124-ए को तभी लगाया जा सकता है जब राष्ट्र के ख़िलाफ़ कुछ किया जाए या फिर देश की एकता और अखंडता के लिए सीधा ख़तरा पैदा किया जाए. मुझे नहीं लगता कि यहां ऐसी कोई बात हुई. बल्कि यहां तो लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार को इस्तेमाल कर रहे थे."
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