जम्मू कश्मीर: पीर पंजाल में बंदूक के साये में कैसे हो रही है राजनीति

जम्मू कश्मीर

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पीर पंजाल, जम्मू कश्मीर से
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5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के ऐलान के बाद से अब तक भारत प्रशासित पीर पंजाल में राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं. नेता आरोप लगाते हैं कि इसके लिए मौजूदा केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है.

जब हम पीर पंजाल के पुंछ ज़िले से पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के पूर्व नेता शाह मोहम्मद तंत्रे के घर पहुंचे, वो अपने घर पर पार्टी के चार-पांच कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे थे. उनकी चर्चा का विषय था कि पूरे इलाके में मार्शल लॉ जैसे हालात हैं, ऐसे में वो पार्टी का काम कैसे कर सकते हैं.

बीते 60 दिनों से तंत्रे अपने ही घर में नज़रबंद हैं. अनुच्छेद 370 को हटाने के ऐलान से एक दिन पहले ही उन्हें पुंछ शहर में मौजूद उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया था.

वो बताते हैं कि 4 अगस्त 2019 तक हमें भारतीय होने पर गर्व था, लेकिन 4 अगस्त 2019 के बाद से मैं भारतीय तो रह गया हूं लेकिन मुझे अब भारतीय होने पर गर्व नहीं रह गया है.

वो कहते हैं, "नरेंद्र मोदी की सरकार के आने से पहले हमें भारतीय होने पर गर्व था. हमने कभी भारत के ख़िलाफ़ उंगली तक नहीं उठाई. कश्मीर और जम्मू के पीर पंजाल में काफी फर्क है. जब इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी मेरे पास आए थे, मैंने उनसे कहा था कि हम सभी मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. बीते साल 4 अगस्त के बाद से मैं खुद को भारतीय तो कहता हूं लेकिन अब मैं ये नहीं कह सकता कि मुझे खुद पर गर्व है."

वो कहते हैं, "जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी मेरे पास आए थे, मैंने उनसे कहा जो काम चीन और पाकिस्तान नहीं कर पाए, वो बीजेपी कर रही है. मैंने उनसे ये भी कहा कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी आज जो काम कर रहे हैं, उसका लाभ छह सात साल बाद ही देखने को मिलेगा. बीते सत्तर सालों से यही कहा जाता रहा है कि जम्मू कश्मीर भारत के मुकुट का हीरा है, अब इसको दो हिस्सों में बांट दिया गया है और दोनों को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा भी दिया गया है."

पीडीपी के पूर्व नेता शाह मोहम्मद तंत्रे

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मैंने उनसे पूछा कि नज़रबंद रहते हुए क्या वो अपने रोज़ाना के राजनीतिक काम कर पाते हैं?

उन्होंने कहा, "आप देख सकते हैं कि हम डर के माहौल में हैं. जो लोग अपनी राजनीतिक गतिविधियां फिर से शुरु करना चाहते हैं, वो बदले माहौल के कारण घबराए हुए हैं."

उन्होंने कहा, "कोई भी इस बारे में बात नहीं करना चाहता क्योंकि सभी को डर है कि उन्हें पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया जाएगा. केवल जम्मू कश्मीर में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में एक तरह से मार्शल लॉ की स्थिति है. हम गणतंत्र में नहीं रह रहे हैं. लोगों को लगता है कि हम काम शुरू करेंगे तो गिरफ्तार कर लिए जाएंगे, बेहतरी इसी में है कि शांत रहा जाए."

वो कहते हैं कि 5 अगस्त के बाद से उन्होंने न तो किसी सार्वजनिक सभा में शिरकत की है और न ही किसी रैली में शरीक हुए हैं.

जम्मू का लाल चौक

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पीर पंजाल इलाक़े में दो ज़िले आते हैं- पुंछ और राजौरी. जहां पुंछ में 90 फीसद आबादी मुसलमानों की है, वहीं राजौरी में कुल आबादी का क़रीब 60 फीसदी हिस्सा मुसलमानों का है.

5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का ऐलान किया और पूरे इलाक़े में तनाव की स्थिति पैदा हो गई. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को ख़ास दर्जा मिला हुआ था.

अनुच्छेद 370 ख़त्म करने के बाद से कश्मीर में लगभग सभी प्रकार के संचार पर पाबंदी लगा दी गई, इलाक़े में कर्फ्यू लगा दिया गया और सभी स्कूल, कॉलेज और व्यवसाय बंद कर दिए गए.

बीते साल 5 अगस्त के बाद से तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई राजनीतिक नेता नज़रबंद हैं.

पीर पंजाल

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जम्मू में इंटरनेट सेवाएं शुरू कर दी गई हैं लेकिन वहां मोबाइल इंटरनेट अभी भी बंद है. कश्मीर घाटी में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लागू है (टूजी इंटरनेट सेवाएं बहाल तो की गई हैं, लेकिन ये लो-स्पीड इंटरनेट है).

नेशनल कॉन्फ्रेस के जिलाध्यक्ष बाग़ हुसैन राठौर ने बीबीसी को बताया कि 5 अगस्त के बाद घाटी में राजनीतिक गतिविधियां एकदम ठप हैं.

वो कहते हैं, "हमारे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. 5 अगस्त से बाद से ऐसा लगता है कि हमारी पार्टी तो है लेकिन अब कुछ बचा नहीं रह गया. हमें प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि हम किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा न लें. हमारा राजनीतिक भविष्य क्या होगा हमें कुछ नहीं पता."

वो कहते हैं, "हमें यह नहीं पता कि हम राजनीतिक गतिविधियां कैसे चालू रखें. ऐसा करने पर हमें गिरफ्तार किया जा सकता है. हमें रिहा करने में जो हमारी मदद कर सकते थे, हमारे उन नेताओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. हमें डर है कि क्या करें?"

रियाज़ नाज़

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पुंछ में रहने वाले रियाज़ नाज़ एक युवा गुर्जर नेता हैं और कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं. वो विधायक रहे शरीफ़ नाज़ के बेटे हैं और अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद से आज तक उन्होंने एक भी सार्वजनिक सभा नहीं की है.

वो कहते हैं, "मेरे पिता की मौत के बाद से मैं लोगों से मुलाक़ातें करता रहा हूं, पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलता रहा हूं और अपना राजनीतिक काम भी करता रहा हूं. लेकिन 370 के हटने के बाद से मेरी आवाजाही काफी कम हो गई है. लोगों को इससे धक्का लगा है और उनका मनोबल गिरा है. मैंने सुना है कि लोगों से कहा गया है कि वो राजनीतिक सभाओं, बैठकों और रैलियों से दूर रहें."

रियाज़ नाज़ से हमने पूछा कि क्या ये माना जाए कि घाटी में लोगों की आवाज़ को पूरी तरह दबा दिया गया है, तो उन्होंने कहा, "एक तरह से कहा जाए तो यही हुआ है."

वो कहते हैं, "लोगों को घरों के भीतर रहने के लिए मजबूर कर दिया गया है, डर का माहौल बनाया गया है. भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया और पूरी कोशिश की गई है कि लोगों की आवाज़ बाहर न जाए. पीर पंजाल में 5 अगस्त के बाद से कोई बड़ी राजनीतिक गतिविधि देखने को नहीं मिली. मैंने किसी भी सार्वजनिक रैली का आयोजन नहीं किया है. लोग बहुत सहमे हुए हैं. उन्हें लगता है कि अगर सार्वजनिक रैली होगी तो किसी को नहीं पता कि वहां क्या हो जाएगा."

मोहम्मद रफ़ीक़ चिश्ती

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बीजेपी का दावा है कि पीर पंजाल के पुंछ ज़िले में पांच हज़ार महिलाओं समेत, कुल पैंतीस हजार मुसलमान महिलाएं उनकी सदस्य हैं.

पार्टी ने पहले मुसलमान जिलाध्यक्ष के रूप में मोहम्मद रफ़ीक़ चिश्ती को नियुक्त किया है. चिश्ती के अनुसार वो ज़िले में पार्टी की गतिविधियों को लगातार अंजाम दे रही हैं.

जिला बीजेपी ईकाई में इस बात की खुशी है कि जिलाध्यक्ष और पार्टी सदस्यों के रूप में कई मुसलमान उनसे जुड़े हैं.

अकेले राजौरी में बीते एक साल में दो स्थानीय मुसलमान नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा है. ये दो नेता पूर्व सांसद चौधरी तालिब हुसैन और पूर्व नौकरशाह मोहम्मद इक़बाल मलिक हैं.

जब चौधरी तालिब बीजेपी में शामिल हुए, तब कांग्रेस में थे. वो पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस में थे और उससे पहले शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे थे.

राजौरी में बीजेपी का मुख्यालय

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साल 2004 से लेकर अब तक मलिक इक़बाल दो बार चुनाव लड़ चुके हैं. एक चुनाव उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था जबकि दूसरी बार वो कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे थे. लेकिन दोनों बार चुनाव हार गए थे. जून 2019 में मलिक इक़बाल भाजपा में शामिल हो गए.

मोहम्मद इक़बाल मलिक कहते हैं कि बीजेपी के दोबारा सत्ता में आने के बाद उसमें शामिल होने के पीछे मोदी 2.0 सरकार का "सबका साथ, सबका विकास" का नज़रिया है जो उन्हें आकर्षित करता है.

वो कहते हैं, "जब मोदी दूसरी बार सत्ता में आए तो उन्होंने संसद के सामने अपना सिर झुकाते हुए कहा कि वो संविधान का पालन करेंगे, संविधान ही हमारा धर्म है और यही हमारा विश्वास है. मुझे लगा कि उन्होंने लोगों को संकेत दिया है कि हमें संविधान का पालन करना चाहिए. फिर मोदी जी ने "सब का साथ सबका विकास" का नारा दिया और बाद में उसमें "सबका विश्‍वास" भी जोड़ा, जिसने मुझे प्रभावित किया. मुझे लगा कि यह मुसलमानों के लिए एक संकेत था. हम भारतीय हैं और अगर हम इस देश में रहना चाहते हैं, तो हमें उन्हें अपना विश्वास और एक अवसर ज़रूर देना होगा."

वो कहते हैं, "मोदी जी ने यह भी कहा है कि वो मदरसों के उत्थान का काम करेंगे और मदरसों के छात्रों को आधुनिक शिक्षा देंगे. इस आश्वासन ने मुझे बहुत प्रभावित किया. मुसलमानों की हमेशा से शिकायत रही है कि बीजेपी चुनाव में मुसलमानों को टिकट नहीं देती. मुझे बताएं कि जब मुसलमान बीजेपी से जुड़ेंगे नहीं, तो उन्हें चुनाव में टिकट कैसे मिलेगा. अगर मुझे चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा तो मैं कह सकता हूं कि बीजेपी ने मुझे टिकट नहीं दिया."

मोहम्मद इक़बाल मलिक

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मलिक कहते हैं कि वो अपने इलाक़े में आम दिनों की तरह ही राजनीतिक गतिविधियां कर रहे हैं और सभाओं में शामिल हो रहे हैं.

राजौरी के एक और नेता जो साल भर पहले बीजेपी में शामिल हुए थे, उनका कहना था कि जब उन्होंने पार्टी ज्वाइन की तो उन्हें लोगों के सवालों का सामना करना पड़ा था लेकिन अब सब कुछ सामान्य है.

हाल में जम्मू-कश्मीर में ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के चुनाव हुए थे जिनमें बीजेपी को राजौरी ज़िले से तीन सीटें मिलीं. जीतने वाले तीनों नेता मुसलमान थे जिनमें दो मुसलमान महिलाएं शामिल थीं.

परवीन बानो ने बीजेपी के टिकट पर बीडीसी चुनाव जीता है. वो मानती हैं कि बीजेपी ग़रीब लोगों के लिए काम करने वाली पार्टी है और इसलिए उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फ़ैसला किया.

वो कहती हैं कि बीजेपी में शामिल होने के फ़ैसले के लिए उन्हें भी समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ा था.

परवीन बानो

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राजौरी में बीजेपी के दफ्तर में मेरी मुलाक़ात परवीन बानो से हुई.

उन्होंने कहा, "बीजेपी ग़रीब लोगों के लिए काम कर रही है, उन्होंने ग़रीबों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं. जब मैंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया तब अनुच्छेद 370 को हटाया जा चुका था. आपको पता है उस वक्त माहौल में काफी तनाव था. मेरे समुदाय के लोगों ने कहा कि आपको कोई वोट नहीं मिलेगा. लेकिन इसके बाद मैंने ज़मीनी स्तर पर लोगों से मुलाक़ातें करना शुरु किया."

वो कहते हैं, "महिलाओं ने मुझे बताया कि बीजेपी ने महिलाओं के लिए काफी काम किया है. उन्होंने मुझे बीडीसी के चुनावों में खड़े होने का हौसला दिया. बाद में मुझे और लोगों ने भी कहा कि हमारी पार्टी अच्छा काम कर रही है. जिस तरह का माहौल बन चुका था, उसमें मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मुझे चुनावों में जीत मिलेगी, लेकिन मैं जीत गई."

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि पीर पंजाल रेंज में दो लाख लोग पार्टी के सदस्य हैं और उन्हें खुशी है कि इस इलाक़े में रहने वाले मुसलमान भी पार्टी में शामिल हो रहे हैं.

रविंदर रैना

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बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने बीबीसी को बताया, "जम्मू हो या कश्मीर, पूरे जम्मू-कश्मीर में ही बड़ी संख्या में मुसलमान बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. लद्दाख में भी मुसलमान पार्टी में आ रहे हैं. मुसलमान बहुल पुंछ और राजौरी में गुर्जर और चौधरी भाजपा में शामिल हो रहे हैं."

वो कहते हैं, "चौधरी तालिब हुसैन, मलिक इक़बाल और मोहम्मद रफ़ीक चिश्ती जैसे कई जानेमाने नेता पार्टी के सदस्य हैं और आने वाले वक्त में पुंछ और राजौरी से कई और बड़े मुसलमान नेता भी पार्टी में आएंगे."

मैंने उनसे पूछा कि क्या पीर पंजाल में बड़ी संख्या में मुसलमानों के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी का असर भी बढ़ा है?

उन्होंने कहा, "हां, बिल्कुल. पार्टी के पास पीर पंजाल में केवल बीजेपी के कार्यकर्ता ही थे. साथ ही वहां पार्टी स्तर पर हमारा नेटवर्क भी बड़ा नहीं था. आज हमारी पार्टी से जुड़े लोग वहां पंचायत चुनाव जीत रहे हैं. राजौरी में हमने बीडीसी चुनावों में बहुमत हासिल किया है. पुंछ जिले में हमने सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. दूसरे उम्मीदवारों को हमारे उम्मीदवारों ने बहुत मजबूती से चुनौती दी है. हमें उम्मीद है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में पीर पंजाल में बीजेपी को अभूतपूर्व सफलता मिलेगी."

रैना ने यह भी दावा किया कि पुंछ और राजौरी में दो लाख मुसलमानों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है.

जम्मू में पीडीपी पार्टी का कार्यालय

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पीडीपी का आरोप

8 जनवरी 2020 को पीडीपी पार्टी के जम्मू कार्यालय में दिवंगत नेता मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पुण्यतिथी मनाई जा रही थी. इस मौक़े पर दर्जनों कार्यकर्ता कार्यालय के अंदर और बाहर मौजूद थे.

पीडीपी नेताओं का आरोप है कि बीजेपी उन्हें स्वतंत्र माहौल में अपनी राजनीतिक गतिविधियां नहीं करने दे रही.

पीडीपी पार्टी के महासचिव सुरिंदर चौधरी ने बीबीसी को बताया, "हमारे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. अब हम अपनी राजनीतिक गतिविधियों को कैसे आगे बढ़ाएं? आज हम अपनी पार्टी के संरक्षक मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पुण्यतिथि मना रहे हैं लेकिन हमारी पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती जेल में हैं."

वो कहते हैं, "हम मुफ़्ती साहब को याद करने का समारोह सड़कों पर मनाना चाहते थे. लेकिन इसके लिए प्रशासन ने हमें अनुमति नहीं दी. हम स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों के बारे में कैसे बात कर सकते हैं?"

सुरिंदर चौधरी

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पैंथर्स पार्टी

जब मैं पैंथर्स पार्टी के वरिष्ठ नेता हर्ष देव सिंह के जम्मू स्थित उनके कार्यालय में मिलने पहुंचा, वो अकेले बैठे थे.

वो कहते हैं कि जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद से राजनीतिक पार्टियों को उनकी राजनीतिक गतिविधियों को पूरा करने की पूरी आज़ादी नहीं दी जा रही है.

पैंथर्स पार्टी के वरिष्ठ नेता हर्ष देव सिंह

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वो कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद से जिस तरह का माहौल बन गया है, राजनीतिक दलों को पूरी आज़ादी के साथ उनके विचार पेश करने का मौक़ा नहीं दिया जा रहा है. कई प्रतिबंध लगाए गए हैं. इंटरनेट पर पाबंदी है. राजनीतिक नेताओं पर रोक लगाई गई है."

वो बताते हैं, "दो महीनों के लिए मुझे हिरासत में लिया गया था. हम स्वतंत्रता के साथ राजनीतिक गतिविधि नहीं कर सकते. दिसंबर में हमने मोबाइल इंटरनेट पर लगी पाबंदी हटाने की मांग को लेकर को बंद की अपील की थी. लेकिन दूसरे ही दिन हमें गिरफ्तार कर लिया गया और संदेश स्पष्ट था कि आप बंद की अपील नहीं कर सकते."

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