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जामियाः वो तमंचा लहराता रहा, पुलिस हाथ बांधे खड़ी रही
दिल्ली की जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर एक युवक के पिस्तौल तानने, गोली चलाने और इस दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर काफ़ी सवाल किए जा रहे हैं .
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो में ये युवक तमंचा लहराता दिख रहा है और इस दौरान पुलिस हाथ बांधे खड़ी है.
पुलिस ने हमलावर का नाम गोपाल बताया है. जबकि हमलावर ख़ुद को रामभक्त गोपाल कहता है.
यह युवक रामभक्त गोपाल गोली चलाने से पहले फ़ेसबुक पर लगातार अपडेट कर रहा था.
पत्रकार विनोद कापड़ी ने पैंतालीस सैंकड का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें युवक तमंचा लहराता और गोली चलाता दिख रहा है और पुलिस ख़ामोश खड़ी देख रही है.
इस दौरान कुछ कैमरामैन चिल्लाकर बताते हैं कि युवक के पास पिस्टल है. गोली चलने के बाद पुलिस युवक को पकड़ लेती है और जीप में बिठाकर ले जाती है. युवक ने चिल्लाकर ख़ुद को रामभक्त बताया था.
लोग दिल्ली पुलिस को टैग करके पूछ रहे हैं कि जब ये हमलावर तमंचा लहरा रहा था तब पुलिस सिर्फ़ देखती क्यों रही. इसे पकड़ने या रोकने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया.
माया मीरचंदानी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया, "दिल्ली पुलिस उन पुलिसवालों पर क्या कार्रवाई करेगी जो हथियार लहराते और गोली चलाते युवक को देखते रहे."
उत्तर-पूर्वी ज़िले के डिप्टी पुलिस कमिश्नर चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी से बात करते हुए इन सभी आरोपों को ख़ारिज किया. चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी से कहा, "पुलिस पर आरोप लगाना कोई नई बात नहीं है. इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, हमने प्रदर्शनकारियों से मार्च न निकालने की अपील की थी."
पुलिस के हमलावर को रोकने की कोशिश न करने के सवाल पर उन्होंने कहा, "पुलिस यहां होली फ़ैमिली अस्पताल के पास ही खड़ी रहती है, प्रदर्शनकारियों के आचरण की वजह से पुलिस उनके पास नहीं थी. भीड़ पर निगरानी करने की ज़िम्मेदारी आयोजकों की भी होती है. कोई असामाजिक तत्व न घुसे ये भी आयोजकों की ज़िम्मेदारी है."
उन्होंने कहा, "वीडियो को गौर से देखिए, वो बंदा प्रदर्शनकारियों की ओर से ही आ रहा था. वो हमलावर भीड़ से निकला, आगे आया. पीछे से आ रहे हमारे पुलिस अधिकारी ने उसे क़ाबू में करने की कोशिश की है, ये भी वीडियो में दिख रहा है."
चिन्मय बिस्वाल के मुताबिक़ हमलावर युवक पुलिस की गिरफ़्त में है और उससे पूछताछ की जा रही है.
वहीं सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, "दिल्ली पुलिस, पिछले महीने जामिया में आपने जो बहादुरी दिखाई उसे क्या हुआ? अगर ख़ामोश खड़े चश्मदीदों के लिए कोई इनाम हो तो आप उसे हर बार जीतेंगे. क्या आप ये समझा सकते हैं कि गोली से घायल युवक को बैरीकेड क्यों चढ़नी पड़ी, क्या आपके सर्विस रूप आपको इंसान होने से भी रोकते हैं."
असदउद्दीन ओवैसी ने अपने इस ट्वीट के साथ पुलिस बैरिकेडिंग पार कर रहे गोली लगने से घायल युवक की तस्वीर भी साझा की है.
सिदरा नाम की एक यूज़र ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा है, "अपने आप को याद दिलाइये, आतंकवादी ........ दिल्ली में खुला घूम रहा था. उसे हथियार कहां से मिला. दिल्ली पुलिस कर क्या रही थी. शर्मनाक."
वहीं अनुभव खंडेलवाल ने गोली चलाने वाले युवक के पोस्ट शेयर करते हुए सवाल किया, "ये स्पष्ट है कि ये हमला पूर्व नियोजित था. दिल्ली पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं थी. और हमले के वक़्त वो बस हमलावर को देख रहे थे. राजनीति में सबकुछ संभव है."
वहीं राजेंद्र साहनी ने लिखा, "अगर ये सीएए के समर्थन में रैली होती और कोई हथियार लेकर आ जाता तो पुलिस निश्चित तौर पर उसे गोली मार देती. निश्चित तौर पर कैमरामैन ने पुलिस से ज़्यादा बहादुरी दिखाई और हमलावर को रोकने आगे बढ़े."
वहीं सैय्यद माज़ ने लिखा, "पुलिस बस हाथ बांध कर कैमरामैन को पोज़ दे रही थी."
पत्रकार राणा अय्यूब ने लिखा, "रामभक्त.........के फ़ेसबुक पर तलवार लहराते तस्वीर है. एक पूर्व नियोजित हमला जिसमें उसने फ़ेसबुक पर लिखा शाहीन बाग़ का खेल ख़त्म. अमित शाह निश्चित तौर पर उसकी प्रेरणा और मास्टरमाइंड है. गृहमंत्री को कौन गिरफ़्तार करेगा?"
वहीं ओनीर ने पुलिस से पूछा है, "दिल्ली पुलिस, हमलावरों की रक्षा करने के लिए आपको कौन पैसे देता है? करदाताओं का पैसा, जिससे आपको वेतन मिलता है वो बच्चों की रक्षा के लिए है, हमलावरों की रक्षा के लिए नहीं."