CAA: पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन के दौरान दो की मौत

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- Author, प्रभाकर एम
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी डाट काम के लिए
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के जालंगी में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और बंद के दौरान दो गुटों की हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए.
पुलिस ने गोली लगने से दो लोगों—अनवारुल विश्वास (55) और मक़बूल शेख़ की मौत की पुष्टि की है. फ़ायरिंग में घायल दो लोगों—रिज़ानूर, अलाउद्दीन और मंटू मंडल को मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाख़िल कराया गया है.
हिंसक झड़प के दौरान कई घरों में तोड़-फोड़ हुई, मोटरसाइकिलों में आग लगा दी गई और बम फोड़े गए. फ़िलहाल इलाक़े में भारी तनाव है. पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह यादव के नेतृत्व में भारी तादाद में पुलिस के जवान मौक़े पर तैनात हैं. अब तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.
पुलिस ने फ़िलहाल यह बताने से भी इनकार किया है कि हमलावर कौन थे या मरने वाले किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े थे या नहीं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संदीप सेन ने बताया, "दो लोगों की मौत हो गई है और तीन घायल हुए हैं. इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है. अपराधियों को पकड़ने के लिए छापे मारे जा रहे हैं."

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यहां मिली ख़बरों के मुताबिक़, सीएए विरोधी नागरिक मंच नामक एक स्थानीय संगठन ने सीएए के विरोध में इलाक़े में बंद बुलाया था और प्रदर्शन कर रहे थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के जलंगी उत्तर ब्लाक के अध्यक्ष ताहीरुद्दीन मंडल के नेतृत्व में ही कुछ लोग कारों में लद कर मौक़े पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग शुरू कर दी.
इसमें पहले अनवारुल नामक एक बुज़ुर्ग को गोली लगी और उसने मौक़े पर ही दम तोड़ दिया. दूसरे घायल मक़बूल शेख़ ने बाद में अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया. इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है.
जालंगी के तृणमूल कांग्रेस विधायक अब्दुर रज़्ज़ाक़ कहते हैं, "बीते 15 दिनों से कांग्रेस और माकपा के लोग एक नए संगठन के बैनर तले सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे.
बुधवार सुबह वह लोग जबरन दुकानें बंद करा रहे थे. रज़्ज़ाक़ का आरोप है कि प्रदर्शन की वजह से सरस्वती पूजा करने वाले छात्रों को दिक्क़त हो रही थी. ताहीरुल मंडल ने मौक़े पर पहुंच कर प्रदर्शनकारियों से बाज़ार से हटने की अपील की. लेकिन उन्होंने तृणमूल के लोगों पर ही हथियारों से हमला कर दिया."
ताहीरुद्दीन का भाई मंटू मंडल भी गोली लगने से घायल है. उसे भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाख़िल कराया गया है. लेकिन भाजपा, कांग्रेस और माकपा ने इस घटना के लिए तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उसे कठघरे में खड़ा कर दिया है.

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माकपा नेता मोहम्मद सलीम कहते हैं, "राज्य में क़ानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है और प्रशासन नामक कोई चीज़ ही नहीं है. आख़िर पुलिस क्या कर रही थी?"
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा का कहना था, "बंगाल में हिंसा और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं. तृणमूल कार्यकर्ताओं के पास काफ़ी हथियार हैं."
मुर्शिदाबाद ज़िले के कांग्रेस प्रवक्ता जयंत दास कहते हैं, "मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा में सीएए-विरोधी प्रस्ताव पारित कर रही हैं और उनकी पार्टी के नेता हत्या कर रहे हैं. इससे साफ़ है कि ममता भाजपा की मदद कर रही हैं."
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थानीय संगठन ने बंद की अपील की थी लेकिन तृणमूल ने जबरन बंद ख़त्म कराने का प्रयास किया. लेकिन अब हिंसा के बाद पूरे इलाक़े में कर्फ्यू जैसा माहौल है. एक प्रदर्शनकारी इमदादुल हक़ ने बताया, "तृणमूल नेता ताहीरुद्दीन के नेतृत्व में पाँच कारों में भर कर मौक़े पर पहुंचे लोगों ने फ़ायरिंग शुरू कर दी."
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