You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
CAA के ख़िलाफ़ बीदर का विवादित नाटक क्या देशद्रोह है
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के बीदर ज़िले में पुलिस उस शिकायत की जाँच कर रही है जिसमें एक स्कूल के प्रबंधन पर आरोप लगाया गया है कि स्कूल के बच्चों ने एक नाटक प्रस्तुत किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान किया गया है और इस कारण उन्होंने 'देशद्रोह' किया है.
सोशल मीडिया में वायरल इस वीडियो को आधार बनाकर पुलिस से शिकायत की गई है. इस वीडियो में बच्चे एक नाटक कर रहे हैं जिसमें एनआरसी के लिए ज़रूरत काग़ज़ात दिखाते वक़्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र है.
बीदर के पुलिस अधीक्षक टी श्रीधरा ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''शिकायत में कहा गया है कि स्कूली बच्चों ने 21 जनवरी को जो नाटक प्रस्तुत किया था उसमें प्रधानमंत्री की कुर्सी जैसे संवैधानिक पद के लिए अपशब्द कहे गए थे. शिकायत के अनुसार नाटक के बोल आपत्तिजनक और देश से बग़ावत करने वाले थे.''
वीडियो में बच्चे ये कहते हुए देखे जा सकते हैं कि उनके मरे हुए माता-पिता और दादा-दादी के जन्मप्रमाण पत्र कैसे दिखाए जा सकते हैं और चाय बेच रहे बुज़ुर्ग आदमी क्या अपने सारे काग़ज़ात दिखा सकते हैं.
वीडियो में और भी कई विवादित बयान हैं.
नीलेश रक्षल नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''बच्चों को नहीं पता कि क्या सही है और क्या ग़लत. बच्चे स्कूल में शिक्षा लेने आते हैं. और ये बच्चे प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अपशब्द कहें, इससे मुझे आपत्ति है.''
रक्षल आगे कहते हैं, ''ये बच्चों की ग़लती नहीं है. ये तो स्कूल प्रबंधन की ग़लती है.''
तो क्या ये अपमानजनक है या देशद्रोह?
स्कूल प्रबंधन अपनी ग़लती मानता है. स्कूल को चलाने वाले शाहीन ग्रुप के सीईओ तौसीफ़ मेडीकेरी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत करते हुए कहा, ''सीएए-एनआरसी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ये नाटक प्रस्तुत किया गया था. बच्चों ने एक-दो वाक्य ऐसे कहे जो उनके माता-पिता ने उनको सिखाया था.''
तौसीफ़ स्वीकार करते हैं कि शिक्षकों ने नाटक के डायलॉग्स को चेक नहीं किया था.
तौसीफ़ के मुताबिक़, "ये नाटक प्रस्तुत करने के दौरान स्पॉट पर हो गया. बच्चों के माता-पिता ने भी लिखित रूप में दिया है कि ये उनकी ग़लती थी कि उन्होंने बच्चों को बताया कि नाटक में क्या बोलना चाहिए.''
बच्चों के माता-पिता से कोई बातचीत नहीं हो सकी है.
बीदर के एसपी कहते हैं, ''ये देशद्रोह का मामला है या नहीं इसकी जाँच हो रही है. आरोप सहीं हैं या नहीं ये सबूत के आधार पर तय होगा.''
कर्नाटक राज्य के पूर्व अभियोजक बीटी वेंकटेश ने बीबीसी से कहा, ''देशद्रोह और अपमान में बहुत फ़र्क़ है. देशद्रोह देश के ख़िलाफ़ बग़ावत है और आपको साबित करना होता है कि अभियुक्त ने सचमुच में देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा है.''
वेंकटेश आगे कहते हैं, "अगर इस आरोप को देखा जाए तो सीएए का विरोध करने वाले हर व्यक्ति के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए. ये अपमानजनक ज़रूर हो सकता है लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी है. लाखों लोगों ने कहा कि चौकीदार चोर है, हमारे एक गूंगे प्रधानमंत्री थे जो कभी कुछ नहीं बोलते थे, किसी को पप्पू कहा जाता है. तो ये अलग मामला है.''
तो क्या बच्चों के लिए किसी का अपमान करना सही है?
वेंकटेश कहते हैं, ''जिसने इन बच्चों को नाटक में वो सब बोलने के लिए कहा था उनकी जांच होनी चाहिए. लेकिन ये देशद्रोह का मामला नहीं है. और ये राज्य की ज़िम्मेदारी होती है किसी के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज करना न कि किसी व्यक्ति की.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)