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दिलीप घोष: पश्चिम बंगाल में एक करोड़ और देश में दो करोड़ मुसलमान घुसपैठिए
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता से
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा है कि भारत में कुल दो करोड़ मुसलमान घुसपैठिए मौजूद हैं जिसमें से एक करोड़ पश्चिम बंगाल में ही हैं.
दिलीप घोष का कहना है कि ये सभी दो करोड़ लोग बांग्लादेश से भारत आए हैं जिनका आधी आबादी अकेले पश्चिम बंगाल में हैं जबकि बाकी आबादी पूरे देश में है. हालाँकि उन्होंने ये नहीं बताया कि उनके इस दावे का आधार क्या है.
उन्होंने दावा किया है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुंदरबन इलाक़े के रास्ते ट्रकों में भर-भरकर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में लाया जा रहा है.
बीबीसी हिंदी से हुई एक ख़ास बातचीत में दिलीप घोष ने कहा, "जो लोग राष्ट्रीय सम्पति को नुक़सान पहुँचते हैं उन्हें गोली मार देनी चाहिए".
साफ़ तौर पर उनका इशारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उनमें शामिल होने वाले लोगों की ओर था.
पूछने पर कि क्या उनका ये बयान कि "हिंसक प्रदर्शन करने वालों को कुत्तों की तरह गोली मार देनी चाहिए" भाजपा जैसी बड़ी और सत्ताधारी पार्टी के एक प्रदेश प्रमुख को शोभा देता है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा पब्लिक के बीच में बोला और लोगों से पूछा कि सही बोला या नहीं. लोगों ने कहा सही बोला. नेताओं को वही बोलना चाहिए जो पब्लिक बोले. मैं आज भी अपने बयान पर क़ायम हूँ".
इस सवाल के जवाब में कि क्या वे भाजपा प्रशासित राज्यों- यूपी, असम और कर्नाटक - में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने का समर्थन करते हैं, दिलीप घोष का जवाब था, "मैंने पश्चिम बंगाल के संदर्भ में कहा है क्योंकि यहाँ राष्ट्रीय सम्पति को नुक़सान पहुँचाया गया है. और जिन राज्यों में भाजपा सरकारें हैं और असामाजिक तत्वों पर गोली चलाकर हालात पर क़ाबू पा लिया गया, जबकि बंगाल में हिंसक विरोध के चलते 500 करोड़ रुपए की सम्पति का नुक़सान हुआ है."
मेरा सवाल था कि क्या भारतीय लोकतंत्र में अब लोगों के पास विरोध करने का हक़ नहीं है, क्या भाजपा उनसे ये हक़ छीन लेगी?
दिलीप घोष ने कहा, "कौन मना कर रहा है विरोध करने से? शाहीन बाग़ में दिन-रात बैठे हैं, कौन रोक रहा है". मैंने उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह का हाल का बयान याद दिलाया जिसमें उन्होंने, "दिल्ली में भाजपा सरकार आने के बाद शाहीन बाग़ को ख़ाली कराने की बात कही थी". दिलीप घोष ने कहा, "यूपी में क्या प्रदर्शन नहीं हो रहा, हमारी सरकार ने ही करने दिया है."
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'फ़र्ज़ी वोटर कार्ड से कोई नागरिक नहीं हो जाता'
उनके मुताबिक़ जिन लोगों ने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ हिंसक प्रदर्शन किया वे भारतीय नागरिक नहीं, घुसपैठिए हैं. पूछे जाने पर कि लगभग जिन प्रदर्शनकारियों के पास वोटर आइडी, आधार या पैन कार्ड हैं वे भी भारतीय नागरिक नहीं हैं क्या, दिलीप घोष का कहना था, "मैं ये नहीं मानता. फ़र्ज़ी वोटर आइडी बनवा लेने से कोई नागरिक नहीं हो जाता देश का. जो घुसपैठिया है, वो घुसपैठिया है".
पूछे जाने पर कि सीएए और एनआरसी जैसी प्रक्रियाओं के ज़रिए केंद्र में सत्ताधारी भाजपा भारत में रहने वाले बीस करोड़ों मुसलमानों की बेचैनी क्यों बढ़ा रही है, दिलीप घोष ने कहा, "ये ग़लत है और इनमें हिंदू-मुस्लिम की बात ही नहीं हो रही है".
मैंने पूछा क्या ये बात सही नहीं कि एनपीआर प्रक्रिया शुरू होने पर भारतीय लोगों को फ़ॉर्म में अपना धर्म लिखना पड़ेगा? उनका जवाब था, "आप उसे ख़ाली भी छोड़ सकते हैं. इसमें डरने की क्या बात है. पहले भी सेंसस होते रहे हैं और इस बार भी होगा. जिन लोगों को सत्ता छिन जाने का डर है वो ऐसे बयान दे रहे हैं कि इसके ज़रिए मुसलमानों को शिनाख्त करनी है."
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में जो सात लाख रोहिंग्या मुस्लिम आकर शरण ले चुके हैं वे मूल रूप से बांग्लादेशी ही हैं. अगर बांग्लादेश उन्हें म्यांमार वापस भेजने की बात करता है तो कोई आपत्ति क्यों नहीं उठाता. उनके लिए अलग स्टैंडर्ड और हमारे लिए अलग स्टैंडर्ड नहीं हो सकता".
घुसपैठिए हैं तो उन्हें भेजेंगे कहाँ ?
उनके इस दावे पर कि भारत में दो करोड़ मुसलमान घुसपैठिए हैं और उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए, मैंने उनसे पूछा कि आख़िर इतने लोगों को भेजेंगे कैसे, कहाँ भेज देंगे और कौन सा देश या सरकार उन्हें लेगा, दिलीप घोष का जवाब था, "ये काम सरकार का है, वो करेगी. आपको शायद पता नहीं कि घुसपैठिए बांग्लादेश सीमा पर जमा हो रहे हैं और भागने के चक्कर में हैं".
ज़ाहिर है, मेरा अगला सवाल यही था कि देश में पहले एनआरसी, फिर सीएए और अब नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) का मक़सद क्या देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों और ख़ास तौर से मुसलमानों की तादाद पता करना है. उन्होंने कहा, "ऐसा कहना बिलकुल ग़लत है. जो भारतीय नागरिक हैं उन्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं. जो नहीं हैं उन्हें डरने की ज़रूरत है."
म्यांमार के हिंदू रोहिंग्या क्यों नहीं शामिल ?
हालाँकि दिलीप घोष ने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम में अगर पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यको को शरण देने का प्रावधान है तो म्यांमार में रहने वाले हिंदू रोहिंग्या लोगों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया.
लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि अगर ज़रूरत पड़ेगी तो म्यांमार (बर्मा) में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए आगे चलकर क़ानून बनाया जाएगा.
केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन अधिनियम क़ानून बनाए जाने और उसके बाद से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बांग्लादेश के दो केंद्रीय मंत्रियों ने अपने दौरे रद्द कर दिए थे और तब से दोनो देशों के आपसी सम्बंधों में खटास भी आई है. केंद्र सरकार के कई आला मंत्रियों के अलावा बड़े नेता लगातार 'बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों' जैसे बयान भी देते रहे हैं.
दिलीप घोष अपने ऐसे सभी बयानों को सही ठहराते हुए पड़ोसी बांग्लादेश के साथ बिगड़ते रिश्तों पर कहते हैं, "हम अपने स्वार्थ को विसर्जित करके किसी के दाथ दोस्ती करेंगे, ऐसा हम नहीं करने वाले. ये समझदारी नहीं है."
दिलीप घोष ने अपनी ही पार्टी के दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा के उस बयान पर टिप्पणी करने से मना कर दिया जिसमें प्रवेश ने कहा था कि, "शाहीन बाग़ में लाखों लोग जमा हैं, दिल्ली की जनता को फ़ैसला करना होगा वरना जमा लोग आपके घरों में घुस कर आपकी बहन-बेटियों का रेप कर सकते हैं, उन्हें मार सकते हैं."
दिलीप घोष का जवाब था, "ऐसे बहुत से लोग बयान देते रहते हैं, वहाँ भी और यहाँ भी. मैं किसी दूसरे की ज़िम्मेदारी नहीं लेता. आप मेरे बयानों पर मुझसे पूछिए."
पश्चिम बंगाल में लक्ष्य
क़रीब तीस वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के बाद 2014 में दिलीप घोष भाजपा में शामिल हो गए थे और पिछले वर्षों में अपने विवादित बयानों और भड़काऊ भाषणों के चलते सुर्ख़ियों में रहे हैं.
पार्टी ने उन्हें प्रदेश की बागडोर एक ऐसे समय में दी है जब 2021 राज्य चुनाव होने हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में राज्य में कई जगहों पर राजनीतिक हिंसा हुई थी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और भाजपा के भी कई कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी.
लोकसभा चुनावी नतीजों में भाजपा ने बंगाल में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था और 42 में से 18 सीटें हासिल की थी. ज़ाहिर है, पार्टी की नज़रें अब अगले साल के विधानसभा चुनावों पर हैं.
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