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शाहीन बाग़ क्या दिल्ली के चुनाव का नतीजा तय करेगा
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली के बाबरपुर में भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने दोनों हाथ ऊपर उठाकर मुट्ठियां भींचते हुए ज़ोर से भारत माता की जय का नारा लगाया और कहा, 'इस शाहीन बाग़ के जितने समर्थक हैं वहां तक आवाज़ पहुंचनी चाहिए.'
अमित शाह ने पार्टी समर्थकों से 8 फ़रवरी को दिल्ली चुनाव में ज़ोश से वोट देने की अपील करते हुए कहा, 'आपका वोट दिल्ली और देश को सुरक्षित भी करेगा और हज़ारों शाहीन बाग़ों की घटनाओं को रोकने का भी काम करेगा.'
उन्होंने कहा, 'मित्रों बटन दबाओं तो इतने ग़ुस्से के साथ बटन दबाना कि बटन यहां बाबरपुर में दबे और करंट शाहीन बाग़ में लगे.'
दूसरी ओर सोशल मीडिया पर बीजेपी के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे नारा लगा रहे हैं- देश के गद्दारों को और वहाँ मौजूद जनता कहती है- गोली मारो.....
अमित शाह के बयान पर दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी की मदद कर रहे रणनीतिकार और बिहार में बीजेपी की सहयोगी जदयू के नेता प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए कहा कि 8 फ़रवरी को इवीएम का बटन तो प्यार से ही दबेगा.
गृहमंत्री अमित शाह के इस बयान से साफ़ है कि शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहा प्रदर्शन अब बीजेपी के लिए दिल्ली चुनावों में बड़ा मुद्दा है.
सोमवार को केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शनों पर निशाना साधते हुए कहा, "शाहीन बाग़ एक विचार बन चुका है, यहां टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग हैं."
उन्होंने कहा, "केजरीवाल और सिसोदिया शाहीन बाग़ के साथ खड़े हैं, लेकिन उन लाखों लोगों की शांत आवाज़ केजरीवाल तक क्यों नहीं पहुंच रही है जिनके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जो दफ़्तर नहीं जा रहे हैं, जिनकी दुकानें बंद हैं."
उन्होंने कहा, "क्या ऐसी दिल्ली चाहिए दिल्ली के लोगों को जहां कुछ लोग अपने वोट के लिए दिल्ली को ठप कर दें.? रविशंकर प्रसाद की प्रेस वार्ता के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी शाहीन बाग़ के रास्ते नहीं खुलने दे रही है और 8 फ़रवरी को मतदान के बाद ये रास्ते खुल जाएंगे.
उन्होंने कहा, "शाहीन बाग़ में रास्ता बंद है, उसकी वजह से बहुत से लोगों को तकलीफ़ हो रही है, स्कूली बच्चों को तकलीफ़ हो रही है. एंबुलेंस के जाने में तकलीफ़ हो रही है. आधे घंटे का रास्ते में लोगों के ढाई ढाई तीन तीन घंटे लग रहे हैं. मैं इस बारे में कई बार कह चुका हूं कि इस देश के अंदर संविधान के तहत हर व्यक्ति को विरोध का अधिकार है लेकिन उसकी वजह से किसी को तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए."
केजरीवाल ने कहा, "भाजपा की केंद्र सरकार जिसके तहत दिल्ली की क़ानून व्यवस्था आती है वो इसका समाधान क्यों नहीं कर रही है. अभी रविशंकर प्रसाद प्रेस वार्ता कर रहे थे, वो वहां शाहीन बाग़ हो आते. दिल्ली की क़ानून व्यवस्था प्रेस वार्ता से नहीं काम करने से सुधरेगी.
उन्होंने कहा, "आज लिख कर ले लो, ये आठ तारीख़ तक रास्ते नहीं खुलने वाले, नौ को खुल जाएंगे. बीजेपी ये रास्ते खोलना ही नहीं चाहती."
केजरीवाल ने कहा, "मैं अपील करता हूं कि गृहमंत्री अमित शाह, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और इनके बड़े नेताओं को शाहीन बाग़ जाना चाहिए, लोगों से बात करनी चाहिए और रास्ते खुलवाने चाहिए. ये कहते हैं कि केजरीवाल से परमिशन चाहिए, आज परमिशन दे दी, अभी एक घंटे में रास्ते खुलवा दो."
दिल्ली के शाहीन बाग़ में 16 दिसंबर से प्रदर्शन जारी है जिसकी वजह से नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाली कालिंदी कुंज सड़क बंद हैं. रह-रह कर सवाल ये भी उठता रहा है कि दिल्ली पुलिस ने इन प्रदर्शनों को ख़त्म करने की कोशिश क्यों नहीं की है.
दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी सीएए क़ानून का तो विरोध करती है लेकिन उसका कोई बड़ा नेता अभी तक शाहीन बाग़ नहीं पहुंचा है. अब बीजेपी ज़ोर-शोर से शाहीन बाग़ के मुद्दे को उठा रही है.
दिल्ली में मुसलमान वोटर क़रीब 13 प्रतिशत हैं और 70 में से दस सीटों पर ये मज़बूत स्थिति में हैं. पांच सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमानों की आबादी 40 प्रतिशत से ज़्यादा है.
ये सीटें हैं बल्लीमारान, मटियामहल, चांदनी चौक और ओखला. इसके अलावा रिठाला, सीमापुरी, बाबरपुर, शाहदरा और मुस्ताफ़ाबाद में भी मुसलमानों की आबादी 30 से 40 प्रतिशत के बीच है. पिछले चुनावों में इन सीटों में से सिर्फ़ मुस्तफ़ाबाद में ही बीजेपी जीत सकी थी.
यानी कुल 10 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान नतीजे तय कर सकते हैं. सवाल यही है कि अगर दिल्ली के चुनावों में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण हुआ तो उसका नतीजों पर कितना असर हो सकता है. क्या बाक़ी साठ सीटें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं?
क्या बीजेपी को चुनावों में इसका फ़ायदा होगा? सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसायटीज़ के निदेशक संजय कुमार को ऐसा नहीं लगता.
संजय कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि शाहीन बाग़ का मुद्दा दिल्ली के चुनाव नतीजों को प्रभावित करेगा. भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश ज़रूर करेगी वहीं केजरीवाल की रणनीति होगी कि वो चुनाव के मुद्दों को विकास कार्यों तक ही सीमित रखें."
संजय कुमार कहते हैं, "बीजेपी इससे राजनीतिक फ़ायदा लेने की कोशिश करेगी. बीजेपी अपने चुनाव अभियान में इस प्रोटेस्ट के ज़रिए ध्रुवीकरण करने का प्रयास करेगी. बीजेपी का प्रयास होगा कि शाहीन बाग़ के प्रोटेस्ट को प्रायोजित प्रोटेस्ट साबित किया जा सके. अगर बीजेपी ऐसा कर पाई तो दिल्ली की राजनीति में ध्रुवीकरण तेज़ होगा. अगर ऐसा हो पाया तो बीजेपी को फ़ायदा मिलने की गुंज़ाइश दिखाई दे रही है."
लेकिन क्या ये ध्रुवीकरण इस स्तर तक होगा कि बीजेपी के चुनाव नतीज प्रभावित हो जाएं?
संजय कुमार कहते हैं, "केजरीवाल सरकार ने जो पिछले पांच साल तक काम किए हैं उनका ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा ग़रीबों और पिछड़े तबके के लोगों तक पहुंचा है. मुझे नहीं लगता कि ध्रुवीकरण से उनके वोट प्रभावित होंगे. दिल्ली की मिडिल क्लास और अपर क्लास को ये मुद्दा प्रभावित कर सकता है लेकिन वो तो पारंपरिक तौर पर बीजेपी के ही वोटर है. इसलिए मुझे लगता है कि इसका असर उन्हीं लोगों पर ज़्यादा रहेगा जो पहले से ही बीजेपी के वोटर हैं."
वो कहते हैं, "अगर बीजेपी ने शाहीन बाग़ के प्रदर्शनों को एक बड़ा मुद्दा बना भी लिया तब भी ये इतना बड़ा मुद्दा नहीं होगा कि अकेले यही चुनावों के नतीजे तय कर दे."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, "शाहीन बाग़ दिल्ली चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन ही गया है इसका एक कारण ये नज़र आता है कि अभी तक दिल्ली पुलिस ने या सरकार ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश नहीं की है. क्योंकि बीजेपी चाहती थी कि ये मुद्दा बने और कांग्रेस पार्टी और अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर स्पष्ट स्टैंड लेने के लिए मजबूर हो जाएं."
प्रदीप सिंह कहते हैं, "ख़ासतौर से शरजील इमाम का वीडियो आने के बाद ये मुद्दा और गरम हो गया है और बीजेपी इसे पूरी तरह भुनाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी चाहती है कि पोलेराइज़ेशन हो. दिल्ली चुनावों में बीजेपी के जीतने के दो ही रास्ते हैं, पहला धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण हो और दूसरा मुसलमान वोट कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बंटे. अभी मुसलमान वोट बंटते हुए लग नहीं रहे हैं. लोगों को समझ में आ रहा है कि बीजेपी से आम आदमी पार्टी ही टक्कर ले रही है."
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अरविंद केजरीवाल ने अभी तक अपने आप को शाहीन बाग़ के प्रदर्शनों से दूर रखा है. क्या वो इन प्रदर्शनों से असहज हैं. इस सवाल पर प्रदीप सिंह कहते हैं, "केजरीवाल छोटी-छोटी बातों पर धरने पर बैठते थे, उन्हें धरना कुमार तक कहा जाता था लेकिन शाहीन बाग़ के प्रदर्शनों को पैंतालीस दिन हो गए हैं लेकिन केजरीवाल वहां नहीं गए. ज़ाहिर है वो इन प्रदर्शनों को लेकर असहज हैं."
प्रदीप सिंह कहते हैं, "केजरीवाल ने अभी तक शाहीन बाग़ पर कुछ खुलकर नहीं बोला है. वो जानते हैं कि अगर वो इसके पक्ष में खुलकर आएंगे तो भी नुक़सान होगा और ख़ामोश रहेंगे तो भी नुक़सान होगा. ये ऐसा मुद्दा है जिस पर बीजेपी आक्रामक है और आम आदमी पार्टी को रक्षात्मक होना पड़ रहा है."
सिर्फ़ शाहीन बाग़ ही नहीं देशभर में सीएए के ख़िलाफ़ और सर्थन में माहौल बना है. शाहीन बाग़ सीएए के विरोध का प्रतीक बन गया है और दिल्ली चुनावों में शाहीन बाग़ के प्रदर्शन एक बड़ा मुद्दा तो बन ही गए हैं.
प्रदीप सिंह कहते हैं, "बीजेपी के पास अपने 32-34 प्रतिशत वोटर हैं और बीजेपी जानती है कि सिर्फ़ इनके दम पर चुनाव नहीं जीता जा सकता. इससे आगे बढ़ने के लिए ही बेजेपी ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है."
शाहीन बाग़ के प्रदर्शनों को हटाने की कोशिश न किए जाने पर प्रदीप सिंह कहते हैं, "दिल्ली में चुनावों के बाद हो सकता है कि पुलिस इन प्रदर्शनकारियों को हटा दे. लेकिन अभी बीजेपी इस मुद्दे को बढ़ने दे रही है क्योंकि उसे लग रहा है कि ये उसे फ़ायदा पहुंचा रहा है."
पुलिस कार्रवाई न होने के सवाल पर वो कहते हैं, "यदि पुलिस चुनावों से ठीक पहले प्रदर्शनकारियों को हटाती है तो अभी ये नहीं पता कि इसकी प्रतिक्रिया क्या हो सकती है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि पुलिस कोई कार्रवाई करेगी."