बीजेपी के नेता शाहीन बाग़ क्यों नहीं जाते?

- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान बिना केंद्र को सुने रोक लगाने से इनकार कर दिया.
कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली के शाहीन बाग में धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि कोर्ट का फ़ैसला आने तक वो धरने पर ही बैठे रहेंगे.
ठीक एक दिन पहले मंगलवार को अमित शाह ने सीएए के समर्थन में आयोजित रैली में कहा, "सीएए का जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होगा."
बीजेपी ने देश के हर राज्य में नेताओं और मंत्रियों को जाकर सीएए पर लोगों को अपनी बात समझाने का जिम्मा सौंपा है. इसी रणनीति के तहत मंगलवार को अमित शाह लखनऊ में सीएए के समर्थन में रैली में बोल रहे थे.
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बीजेपी की रणनीति
लेकिन यही रैली और सीएए को समझाने का काम बीजेपी नेता देश में जहां-जहां सीएए को विरोध हो रहा है, वहां क्यों नहीं करते?
बीजेपी नेता और प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "प्रदर्शन करने वाले तो जंतर-मंतर पर भी बैठे हैं, साल-साल से बैठे रहते हैं, तो क्या उनकी भी हर मांग को हमे मान लेना चाहिए?"
आपको बता दें कि नागरिकता क़ानून को लेकर देश भर में जगह-जगह प्रदर्शन चल रहे हैं. दिल्ली के शाहीन बाग में इस क़ानून के ख़िलाफ़ बीते 38 दिनों से महिलाएं धरना दे रही हैं. वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ पूर्वोत्तर की कई यूनिवर्सिटी इस क़ानून के विरोध में बंद हैं.
शाहनवाज़ हुसैन के मुताबिक़, "बीजेपी हर दरवाज़े पर जा रही है. लेकिन धरने पर नहीं जाएगी, धरने के आलावा कोई दरवाज़ा नहीं छोड़ेंगे. धरना, विरोध करने वालों ने तय किया है. हमने तो नहीं तय किया है."

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नागरिकता क़ानून और मुसलमान
सरकार ने सीएए को लेकर अखबार में विज्ञापन भी छपवाए हैं. लेकिन धरना और विरोध प्रदर्शन करने वालों को ये समझा पाने में सफल नहीं हो पाई है कि सीएए नागरिकता देने वाला बिल है, नागरिकता छीनने वाला बिल नहीं है.
इस पर शाहनवाज़ हुसैन कहते हैं, "मैं बड़ी ज़िम्मेदारी से कह रहा हूं इस क़ानून की वजह से एक भी मुसलमान की नागरिकता नहीं जाएगी. और अगर जाएगी तो पहला नंबर शाहनवाज़ हुसैन का होगा. मैं इसके लिए तैयार हूं"
शाहनवाज़ हुसैन को बीजेपी का मुसलमान चेहरा माना जाता है. सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों में एक बड़ी तादाद मुसलमानों की है.
इस सवाल पर थोड़े जज़्बाती होते हुए वो बोले, "आपने मेरी दुखती रग पर हाथ रखा है. छह बार मैं लोकसभा चुनाव लड़ा हूं. कई बार समझाता था. लेकिन हमारे लोग जज़्बाती ज़्यादा होते हैं. हमारे लोगों के जज़्बातों से खिलवाड़ कर रही है कांग्रेस. काग्रेस पार्टी केवल डराने का काम कर रही है. मैं मुसलमान भाइयों से कहना चाहता हूं डरने की ज़रूरत नहीं है"
वो आगे कहते हैं, "सीएए पर अपना पक्ष जनता को समझाने में बीजेपी 99 फ़ीसदी कामयाब रही है. पूरे देश में केवल 1 फीसदी लोग हैं जो इस बात को समझ नहीं पाए हैं. धीरे धीरे वो भी समझ जाएंगे. वही धरने पर बैठे हैं."

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केंद्र और राज्य सरकार में टकराव
गौरतलब है कि दिल्ली सहित देश के दूसरे राज्यों में हो रहे विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस समेत विपक्ष की पार्टियों के नेता भी पहुंचे. उनके नेताओं ने जगह-जगह जाकर धरने पर बैठे लोगों को जाकर संबोधित किया.
केरल और पंजाब में इस क़ानून के ख़िलाफ़ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है. केरल की राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया है.
तो फिर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव की स्थिति कैसे दूर होगी, इस विषय पर बीजेपी बिल्कुल पीछे हटने को तैयार नहीं है.
सवाल बीच में ही काट कर शाहनवाज़ हुसैन कहते हैं, "टकराव पड़ोसी देशों से होता है राज्यों से नहीं. संसद से जो क़ानून पास होगा उसे हर राज्य को मानना होगा. इस क़ानून को किसी राज्य से पास कराने की ज़रूरत तो है ही नहीं."
वो आगे कहते हैं, "सूरज इधर से उधर उग जाए, नागरिकता क़ानून वापस नहीं होगा. कोई इस ग़लतफ़हमी में है तो दूर कर ले."
12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन बिल को क़ानून के तौर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंज़ूरी दे दी थी.
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