You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कन्नन गोपीनाथन CAA विरोध पर इलाहाबाद से जबरन लौटाए गए, अब जाएंगे वाराणसी
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पूर्व नौकरशाह कन्नन गोपीनाथन को इलाहाबाद में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ एक सभा को संबोधित करना था लेकिन ज़िला प्रशासन ने उन्हें एयरपोर्ट से ही बाहर नहीं निकलने दिया.
इसकी जानकारी ख़ुद ही कन्नन गोपीनाथन ने ट्वीट कर दी, उन्होंने लगातार दो ट्वीट किए- पहले ट्वीट में डिटेन किए जाने की बात बताई और दूसरे ट्वीट में उन्होंने इलाहाबाद एयरपोर्ट लिखा.
इलाहाबाद के पुलिस अधीक्षक एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बीबीसी को बताया, "कन्नन गोपीनाथन जी को हम लोगों ने समझाया कि क़ानून-व्यवस्था के लिहाज़ से आपका वहां जाना संवेदनशील हो सकता है. वे ख़ुद नौकरशाह रहे हैं. उन्होंने हमलोगों की बातों को समझा और वापस लौट गए."
कन्नन गोपनाथन ने ट्वीट किया है कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया और दिल्ली की फ़्लाइट में बिठा दिया गया. गोपीनाथन ने लिखा है, "इलाहाबाद एयरपोर्ट से बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिली और दिल्ली की फ्लाइट में बिठाया गया. उत्तर प्रदेश के 'इंडिपेंडेंट बनाना रिपब्लिक' मुफ़्त में दिल्ली की यात्रा करवाता है. योगी आदित्यनाथ को अभिव्यक्ति की आज़ादी से डर लगता है. मैं फिर आऊंगा. यूपी पुलिस मेरे लिए पहले से बुकिंग करा कर रखे."
यह कैसा आयोजन था और इसको लेकर क़ानून व्यवस्था की मुश्किल क्या थी?
दरअसल, यह आयोजन ऑल इंडिया पीपल्स फोरम की ओर से आयोजित था. इलाहाबाद के आलोपीबाग के सरदार पटेल संस्थान में 'नागरिकता बचाओ, संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' के नाम से आयोजित इस विचार गोष्ठी में दिन के दो बजे वक्ता के तौर पर कन्नन गोपीनाथन को बोलना था.
लेकिन जब आयोजन समिति के सदस्य उनको लेने एयरपोर्ट पर आए तो उन्हें भी कन्नन गोपीनाथन के ट्वीट से ही उनके डिटेन किए जाने का पता चला. आयोजन समिति के सदस्य कन्नन गोपीनाथन से बात भी नहीं कर पाए.
इस विचार गोष्ठी के आयोजक डॉ. कमल उसरी बताते हैं, "हमलोगों ने इस आयोजन की कई दिनों से तैयारी करके रखी थी. एक दिन पहले ज़िला प्रशासन को भी इस आयोजन की जानकारी दी थी. गोपीनाथन इसमें बोलने के लिए इलाहाबाद आए थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया."
इलाहाबाद के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज कहते हैं, "देखिए हमलोगों को गोपनीय जानकारी मिली थी कि ऐसी सभा में दहशतगर्द कुछ हंगामा कर सकते हैं, लिहाज़ा हमने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गोपीनाथान जी को कहा कि वापस लौट जाएं."
हालांकि इस विचार गोष्ठी के आयोजक कमल उसरी कहते हैं कि यह आयोजन एक बंद हॉल में होना था, जिसमें 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी. वो कहते हैं, '' यह आयोजन एक बंद हॉल में होना ता जिसमें 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी और इतने लोगों में दहशतगर्दी की बात कहकर प्रशासन पूरे मामले में लीपापोती कर रहा है और एक बड़ी शख़्सियत को अपनी बात आम लोगों के बीच रखने से रोकने में कामयाब रहा.''
'बोलने पर भी पाबंदी'
दिलचस्प यह है कि इसी आयोजन में दूसरे वक्ता के तौर पर इंसाफ़ मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद सलीम को भी आमंत्रित किया गया था. पुलिस प्रशासन ने उनको बोलने दिया. सलीम को मिर्ज़ापुर से इलाहाबाद आना था.
गोष्ठी के आयोजक कमल उसरी कहते हैं, "कन्नन गोपीनाथन गोष्ठी में शामिल होते तो हमारा आयोजन तीन घंटे तक चलता वैसे महज एक घंटे में समाप्त हो गया. लेकिन आप ये देखिए की संविधान की बात करने और लोकतंत्र की बात करने वालों पर कितनी तरह की पाबंदियां उत्तर प्रदेश में लगाई जा रही हैं."
कमल उसरी के मुताबिक़ कन्नन गोपीनाथन को इलाहाबाद से रांची जाना था, इसके लिए उनके ट्रेन का टिकट भी बुक था लेकिन अब तो उन्हें जबरन दिल्ली भेज दिया गया.
दरअसल दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में महिलाओं के बैठने की आंच देश के दूसरे हिस्सों की तरह इलाहाबाद तक भी पहुंची है, इलाहाबाद के मसूंर अली पार्क में भी नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन जारी है. इन प्रदर्शनों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हो रहे हैं जिसको ख़त्म कराने का दबाव पुलिस प्रशासन पर लगातार बढ़ता जा रहा है.
हालांकि, कन्नन गोपीनाथन को मंसूर अली पार्क से दूर शहर के दूसरे कोने में विचार गोष्ठी को संबोधित करना था. 34 साल के पूर्व नौकरशाह कन्नन गोपीनाथन पिछले साल तब चर्चा में आए थे, जब नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने का फ़ैसला लिया था.
इसके विरोध में गोपीनाथन ने सात साल पुरानी अपनी आईएएस की नौकरी से इस्तीफ़ा देते हुए कहा था कि सरकारी अधिकारी होने के नाते वे अनुच्छेद 370 के हटाए जाने पर अपने विचार व्यक्त नहीं कर सकते हैं और इसी मजबूरी की वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है.
देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 18 लोगों की मौत हो चुकी है.
उधर कन्नन गोपीनाथन ने ट्वीट पर ही जानकारी दी है कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएंगे. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री को टैग करते हुए लिखा है कि सोमवार को नागरिकता संशोधन क़ानून पर चर्चा के लिए वाराणसी जाएंगे.
बीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)