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अखिलेश ने कहा 'अब किसी पार्टी से गठबंधन नहीं'
- Author, मुकेश शर्मा
- पदनाम, संपादक, बीबीसी हिंदी
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अब किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी.
बीबीसी न्यूज़ हिंदी से ख़ास बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा, "समाजवादी पार्टी किसी दल के साथ नहीं खड़ी होगी."
अखिलेश ने और समाजवादी पार्टी ने 15 जनवरी को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को जन्मदिन के मौक़े पर ट्विटर पर बधाई दी थी. मगर उनकी बधाई का मायावती की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया.
इस बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा, "मेरा व्यवहार है, मुझे बधाई देनी चाहिए थी. उन्होंने जवाब नहीं दिया तो भी मुझे तो अच्छा लगा कि अब अगली बार से बधाई नहीं देंगे."
पिछले साल इस मौक़े पर अखिलेश यादव ने व्यक्तिगत रूप से जाकर मायावती से मुलाक़ात की थी.
उसी दिन अखिलेश की पत्नी व पार्टी नेता डिम्पल यादव का भी जन्मदिन होता है. पिछले साल मायावती ने उन्हें भी फूलों का गुलदस्ता भेंट किया था. इस साल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि जन्मदिन पर बधाई देने का मतलब ये नहीं है कि किसी पार्टी के साथ गठबंधन होने जा रहा है.
अखिलेश का कहना था, "समाजवादी पार्टी तैयारी कर रही है अकेले ही मुक़ाबला करने के लिए."
बिहार या महाराष्ट्र से तुलना नहीं
बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अकेले लड़ने पर हार जाने या महाराष्ट्र में पार्टी के अकेले पड़ जाने जैसे उदाहरणों के जवाब में अखिलेश ने कहा, "उत्तर प्रदेश की तुलना किसी अन्य प्रदेश के साथ नहीं की जा सकती. उत्तर प्रदेश की राजनीति अलग तरह की है. मेरा ये मानना है कि समाजवादी पार्टी जब अकेले ही चुनाव लड़ेगी तो भारतीय जनता पार्टी का मुक़ाबला कर पाएगी."
उत्तर प्रदेश में 2017 में पिछला विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ा था जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ मैदान में उतरी थी.
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी, लिहाजा उसने 298 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे महज़ 47 सीटें मिल पाई थीं.
जबकि बहुजन समाज पार्टी ने राज्य की 403 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें उसे महज 19 सीटें मिली थीं.
जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में थी, समाजवादी पार्टी की सीटें पांच ही रहीं जबकि बहुजन समाज पार्टी की सीटें शून्य से बढ़कर 10 हो गई थीं.
अखिलेश ने कहा, "ये केवल मेरा मानना नहीं है. समाजवादी पार्टी के सभी नेताओं का मानना यही है, हमारे कार्यकर्ताओं का मानना है और यहाँ तक जब जनता के बीच बातचीत होती है तो जनता भी यही स्वीकार कर रही है कि समाजवादी पार्टी जब अकेले लड़ेगी और अपने एजेंडे के साथ आएगी तो हम भारतीय जनता पार्टी का मुक़ाबला कर सकते हैं."
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