अमेज़न के सीईओ भारत पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं: पीयूष गोयल

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वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेज़न के सीईओ जेफ़ बेज़ोस भारत में एक बिलियन डॉलर निवेश करके देश पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं.
पीयूष गोयल ने यह बयान नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' कार्यक्रम में दिया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित इस ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा कि जेफ़ बेज़ोस ने भारत में इतनी बड़ी राशि के निवेश का फ़ैसला इसलिए लिया है ताकि वो अपने घाटे की पूर्ति कर सकें. गोयल ने कहा कि बेज़ोस भारत पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर पीयूष गोयल के इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
अमेज़न और फ़्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले संगठन 'कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' ने गोयल के बयान की तारीफ़ की है.
संगठन के अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "इससे पता चलता है कि सरकार देश के उन सात करोड़ स्थानीय व्यापारियों के हितों को लेकर संवेदनशील है जो बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों की ग़लत नीतियों की वजह से नुक़सान झेल रहे हैं."

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भारतीय विदेश मंत्रालय की चीन को नसीहत
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि कश्मीर मसले पर चीन को वैश्विक आम सहमति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए.
चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुई अनौपचारिक बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की थी लेकिन बैठक में मौजूद बाकी सदस्यों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई और बात करने से इनकार कर दिया था.
इस बारे में रवीश कुमार ने गुरुवार को कहा, "सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य चीन ने पाकिस्तान के माध्यम से कश्मीर जैसे द्विपक्षीय मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग किया है."
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को इस वजह से अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और ये अनौपचारिक बैठक बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई."
चीन ने ऐसा क्यों किया? यह सवाल पूछे जाने पर रवीश कुमार ने कहा कि यह तो चीन ही बता पाएगा कि वो बार-बार ऐसा क्यों कर रहा है.
उन्होंने कहा, "चीन को इससे सबक लेना चाहिए और भविष्य में ऐसे कदम से बचना चाहिए."
ये भी पढ़ें: कश्मीर पर चीन की तीसरी कोशिश भी नाकाम

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JNU हिंसा: जांच के लिए तैयार हैं कोमल शर्मा
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जेएनयू हिंसा मामले से सुर्खियों में आई कोमल शर्मा का कहना है कि वो जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं.
कोमल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की सदस्य हैं.
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पांच जनवरी की शाम हुई हिंसा के बाद वायरल तस्वीरों और वीडियो में चेक शर्ट पहने एक नक़ाबपोश लड़की नज़र आई थी. सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि यह कोमल शर्मा है. दिल्ली पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए भी बुलाया था.
अख़बार के मुताबिक़ कोमल शर्मा ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी (क्राइम ब्रांच) जॉय तिर्की को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें लिखा है, "सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि मैं फ़रार हो गई हैं. ये ग़लत है. मैं जांच में सहयोग देने के लिए तैयार हूं."
इससे पहले कोमल ने एक टीवी चैनल के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि चैनल ने उन्हें ग़लत तरीक़े से नक़ाबपोश हमलावर बताकर बदनाम करने की कोशिश की.

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इंटरनेट: सबसे पछड़े देशों में पाकिस्तान
'इंटरनेट की स्वतंत्रता' के बारे में कराए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाकिस्तान को सबसे पिछड़े देशों में शामिल किया गया है.
नवभारत टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार पांच मानकों को आधार बनाकर कराए गए इस सर्वे में दुनिया के 181 देशों को शामिल किया गया था. सर्वेक्षण में पाकिस्तान को तुर्की, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और इरीट्रिया के साथ सबसे पिछड़े देशों के साथ रखा गया है.
यह सर्वे टेक्नॉलजी रिसर्च कंपनी 'कंपैरीटेक' ने कराया था. सर्वे में टोरेंट, पोर्नोग्राफडी, समाचार मीडिया, सोशल मीडिया और वीपीएन की उपलब्धता को मानक बनाया गया था.
सर्वे में दक्षिण एशियाई देशों में भारत की रैंकिंग पाकिस्तान के मुकाबले काफ़ी बेहतर है. सर्वे की पूरी पड़ताल आप यहां देख सकते हैं.
अख़बार के अनुसार इस सर्वे में इंटरनेट पर पाबंदी को मानक नहीं बनाया गया था जो भारत जैसे देशों के लिए गंभीर मुद्दा है.
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