You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ईरान और अमरीका में तनाव बढ़ते ही क्यों महंगा हो गया सोना
- Author, अरुणोदय मुखर्जी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमरीकी हमले में ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी की मौत के तुरंत बाद वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें 1600 डॉलर पर पहुंच गई. सात साल में पहली बार कीमतें इतनी ऊपर गईं.
भारत में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड दो प्रतिशत तक का उछाल आया है. यहां प्रति 10 ग्राम सोना 41,290 रुपये से ज़्यादा का बिक रहा है.
सोने की कीमतों रिकॉर्ड बढ़ी कीमतों और मध्य पूर्व के मौजूदा संकट के बीच सीधा-सीधा संबंध है. दरअसल वैश्विक घटनाक्रम और सुरक्षित निवेश की मांग, सोने की बढ़ी कीमतों की वजह है.
भारत जैसे देश में सोने का सांस्कृतिक महत्व रहा है. यहां सोने को गहनों में इस्तेमाल होने वाली धातु से बढ़कर देखा जाता है.
एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म, केडीएन इनवेस्टमनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल शर्मा कहते हैं, "सोने में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है. खासकर भारत में, सोने में निवेश करने की परंपरा रही है."
शर्मा कहते हैं, "अस्थिरता के वक्त में सोना संपत्ति की तरह होता है और एक तरह का विश्वास देता है."
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से मांग पर भी असर पड़ सकता है, हालांकि सोने के स्थानीय व्यापारी कहते हैं कि ये हालात ज़्यादा वक्त तक नहीं रहेंगे.
विजेंद्र वर्मा पिछले 40 साल से दिल्ली में गहने बनाने का व्यापार कर रहे हैं. वो कहते हैं कि सोना एक ऐसी चीज़ है, जिसकी मांग कभी कम नहीं होगी.
वर्मा कहते हैं, "मांग पर कुछ वक्त के लिए असर पड़ सकता है, लेकिन जिसे खरीदना है, वो तो खरीदेगा ही क्योंकि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लोग सोना लेते ही हैं. सोना वज़न के हिसाब से लिया जाता है तो ये ज़रूर हो सकता है कि ग्राहक सोना कम मात्रा में खरीदें."
भारत में जनवरी से अप्रैल तक शादियों का सीज़न होता है और इस वक्त मांग बढ़ जाती है, क्योंकि परिवारों में एक-दूसरे को सोना देना शुभ माना जाता है.
दूसरे व्यापारी भी कुछ ऐसा ही कहते हैं. उनका कहना है कि सालों के अपने व्यापार में उन्होंने कई बार सोने की कीमत में भारी गिरावट भी होती हुई देखी है मगर सोना हमेशा बहुमूल्य रहेगा.
राहुल शर्मा कहते हैं, "खदानों में सोना भी कम होता जा रहा है, इसलिए ये हमेशा क़ीमती चीज़ रहेगी और इसकी वैल्यू हमेशा बनी रहेगी."
लोग सोने के प्रति इसलिए भी इतना आकर्षित होते हैं, क्योंकि ये एक लिक्विड ऐसेट है. शर्मा कहते हैं कि सोने के बदले लेन-देन करना आसान है और इसके गिरवी रखकर लोगों को तुरंत उधार मिल जाता है.
यही वजह है कि लोग मेहनत से कमाए अपने पैसे को सोने में निवेश करते हैं, क्योंकि इसे वो सुरक्षित मानते हैं. भारत जैसे देश में तो ये निवेश का पसंदीदा ज़रिया है.
लेकिन सांस्कृतिक ज़रूरतों से इतर, कुछ विशेषज्ञ इसे एक और नज़रिए से देखते हैं.
उनका कहना है कि इस वक्त भारत की अर्थव्यवस्था मुश्किल स्थिति में है और सरकार चाहती है कि लोग पैसा खर्च करें ताकि खपत बढ़े, लेकिन वो इसके लिए संघर्ष करती दिख रही है.
आर्थिक सुस्ती की वजह से हर सेक्टर पर असर हुआ है और लोग कार-घर जैसी बड़े चीज़ों पर पैसा खर्च करने से हिचक रहे हैं.
ऐसा भी देखा गया है कि जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवार शादी-ब्याह के लिए सोने के पुराने गहनों को ही तुड़वाकर नए बनवा लेते हैं.
ख़बरों के मुताबिक भारत में पिछले साल सितंबर की तिमाही में सोने की मांग में 32% की गिरावट आई. इसकी वजह कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक सुस्ती को बताया गया.
इस बात पर ग़ौर किया जाना चाहिए की चीन के बाद भारत में सबसे ज़्यादा सोना खरीदा जाता है.
हालांकि बीते दो दिन से सोने और चांदी की कीमतों में कुछ कमी आई है, जिससे लग रहा है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी.
वैश्विक स्तर पर कीमतें उस वक्त कम होने लगी थीं, जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ये घोषणा की कि बुधवार को हुए ईरान के मिसाइल हमले में अमरीकी सैनिकों को नुक़सान नहीं पहुंचा है.
स्थिति शांत होने की वजह से भारत में भी सोने और चांदी की क़ीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई.
लेकिन क्या ये तूफान से पहले की शांति है? विशेषज्ञ कहते हैं, अगले कुछ दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव आता रहेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)