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जज लोया का केस दोबारा खुल सकता है: महाराष्ट्र के गृहमंत्री - प्रेस रिव्यू
महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बीएच लोया की मौत की दोबारा जाँच हो सकती है.
अंग्रेज़ी के अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट के अनुसार गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि जज लोया के कुछ रिश्तेदार और उनके कुछ क़रीबी लोगों से उनकी मुलाक़ात होने वाली है. मंत्री ने कहा कि इन लोगों का दावा है कि उनके पास कुछ नए सुबूत हैं.
अनिल देशमुख ने कहा कि वो ख़ुद उन दस्तावेज़ों को देखेंगे और अगर ज़रूरत पड़ी तो केस को दोबारा खोला जाएगा.
जज लोया गुजरात के सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ की जाँच कर रहे थे. उनकी मौत एक दिसंबर, 2014 को नागपुर में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. जज लोया अपने एक सहयोगी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए नागपुर गए थे.
2017 में एक पत्रिका में एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें कहा गया था कि जज लोया की मौत संदेहास्पद स्थिति में हुई थी. उसके बाद से ही उनकी मौत को लेकर सवाल उठने लगे और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
सर्वोच्च अदालत ने कुछ भी ग़लत नहीं पाया और स्वतंत्र जाँच की मांग ख़ारिज कर दी. लेकिन महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनते ही ये मांग दोबारा उठने लगी है.
निर्भया के दोषी फिर सुप्रीम कोर्ट में
निर्भया गैंगरेप और हत्या के दोषियों के ख़िलाफ़ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भले ही डेथ वॉरन्ट और फांसी की तारीख़ तय कर दी हो, लेकिन उसे रुकवाने के प्रयास भी हो रहे हैं.
अख़बार नवभारत टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर इस ख़बर को जगह देते हुए सुर्ख़ी लगाई है, ''फांसी रुकवाने के लिए निर्भया के दोषी फिर सुप्रीम कोर्ट में.''
अख़बार के अनुसार चारों दोषियों में से दो विनय शर्मा और मुकेश ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पीटिशन दाख़िल की है. सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पीटिशन ख़ारिज होने के बाद भी वो राष्ट्रपति के पास दया याचिका लेकर जा सकते हैं.
विनय शर्मा ने कहा है कि वारदात के समय उनकी उम्र सिर्फ़ 19 साल थी इसलिए उनकी सज़ा में नरमी बरती जाए. विनय के वकील ने भी दलील दी है कि उनके मुवक्किल का जेल में बर्ताव अच्छा रहा है इसलिए उनके सुधरने की गुंजाइश बाक़ी है.
'पाकिस्तान के दुष्प्रचार की खुली पोल'
जम्मू-कश्मीर का जायज़ा लेने के लिए 15 देशों के राजनयिकों का एक दल गुरुवार को कश्मीर पहुंचा.
अख़बार जनसत्ता की ख़बर के अनुसार इस दौरान स्थानीय लोगों ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार हनन के पाकिस्तान के दुष्प्रचार को सिरे से ख़ारिज कर दिया. स्थानीय लोगों ने राजनयिकों से कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग पाकिस्तान को एक इंच भी अपनी धरती नहीं देंगे.
उन्होंने राजनयिकों से गुज़ारिश की कि वो पाकिस्तान पर इस बात के लिए दबाव बनाएं कि वो कश्मीर में दख़ल न दे.
इन राजनयिकों ने पूर्व मंत्री अलताफ़ बुख़ारी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल समेत राजनेताओं से भी मुलाक़ात की. हालांकि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने इनके साथ जाने से इंकार कर दिया था और कहा था कि वे गाइडेड टूर नहीं करना चाहते हैं.
दुष्कर्म के 27.2 फ़ीसदी मामलों में ही सज़ा- एनसीआरबी
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2018 में हुए अपराधों की रिपोर्ट आ गई है. अख़बार अमर उजाला ने इसी रिपोर्ट के हवाले से एक ख़बर की सुर्ख़ी लगाई है, ''दुष्कर्म के 27.2 के प्रतिशत मामलों में ही सज़ा.''
अख़बार लिखता है कि साल 2018 में दुष्कर्म के 1.56 लाख मामलों की सुनवाई देश की निचली अदालतों में होनी थी, लेकिन महज़ 11.31 प्रतिशत की ही सुनवाई हो सकी.
इतना ही नहीं जिन मामलों में सुनवाई हुई उनमें भी महज़ 27.2 प्रतिशत में ही सज़ा हो सकी. इसका मतलब है कि 1.38 लाख मामले लंबित रह गए.
वित्त मंत्री के बिना बजट पर अहम बैठक
आम बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थशास्त्रियों और विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ गुरुवार को बैठक की. इसमें रेल मंत्री पीयूष गोयल, गृहमंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शामिल थे. लेकिन एक नाम और चेहरा जो इस बैठक में नज़र नहीं आया वो थीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण.
सारी मीडिया में इसी बात पर चर्चा हो रही कि आख़िर बजट से जुड़ी किसी मीटिंग में वित्त मंत्री कैसे ग़ायब रह सकती हैं.
अख़बार दैनिक जागरण ने सुर्ख़ी लगाई है, ''वित्त मंत्री के बिना पीएम ने बजट पर की अहम बैठक.''
अख़बार लिखता है कि देश की अर्थव्यवस्था और विकास दर के घटने के आंकड़ों के बीच पीएम मोदी ने जनता व उद्घोग जगत को भरोसा दिलाया कि इसकी बुनियाद मज़बूत है और वह जल्द पटरी पर लौटेगी.
लेकिन ख़ास बात ये रही कि बजट पूर्व इस अहम बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद नहीं थीं, क्योंकि वह भाजपा पदाधिकारियों के साथ अलग बैठक कर रहीं थीं.
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