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CAA पर जस्टिस बोबड़े ने कहा, देश मुश्किल दौर में
नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता ज़ाहिर की है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि वे नागरिकता संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तब तक सुनवाई नहीं करेंगे, जब तक इस क़ानून को लेकर हो रहीं हिंसा की घटनाएं बंद ना हो जाएं.
शीर्ष अदालत ने वकील विनीत ढांडा से कहा कि 'देश मुश्किल दौर से गुज़र रहा है, इसलिए शांति बनाए रखने के प्रयास होने चाहिए. ऐसी याचिकाओं से कुछ नहीं होगा'.
ढांडा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीएए को 'संवैधानिक' घोषित करने की माँग की थी.
कोर्टरूम में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती ने बीबीसी को बताया कि चीफ़ जस्टिस बोबडे ने वकील ढांडा से कहा कि वे ऐसी याचिका दायर करके आंदोलनों को और हवा दे रहे हैं.
चीफ़ जस्टिस ने कहा, "हमने कभी ऐसा कुछ सुना नहीं कि किसी अधिनियम को संवैधानिक बनाया जाए."
हालांकि आलोचना के बावजूद शीर्ष अदालत इस याचिका पर दलीलें सुनने को तैयार हो गई है.
इस बीच केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं शीर्ष अदालत में स्थानांतरित की जाएं.
मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि वो 10 जनवरी को केंद्र की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करेगी.
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत भी इस पीठ का हिस्सा थे.
पीठ ने कहा, 'पहली नज़र में उनका मत ये है कि सीएए संबंधी याचिकाएं उच्च न्यायालय देखें और राय में मतभेद होने पर शीर्ष न्यायालय उनपर विचार करे.'
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