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कश्मीर दौरे पर जाने से इस बार यूरोपीय संघ ने किया इनकार: पाँच बड़ी ख़बरें
विदेशी राजनयिकों का एक दल मोदी सरकार के न्यौते पर गुरुवार से भारत प्रशासित कश्मीर के दो दिवसीय दौरे के लिए जा रहा है मगर यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने वहाँ जाने से मना कर दिया है.
भारत सरकार के बुलावे पर अफ़्रीक़ा, लैटिन अमरीका और दक्षिण एशियाई देशों के क़रीब 15 राजनयिक श्रीनगर जाएँगे.
मगर समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ईयू के कुछ लोग जो इसके साथ जाने वाले थे उन्होंने जाने से मना कर दिया है.
यूरोपियन यूनियन के लगभग 25 सदस्यों के एक दल ने पिछले साल अक्तूबर में कश्मीर का दौरा किया था मगर इसकी काफ़ी आलोचना हुई जब इस दौरे में शामिल सदस्यों के डल झील में सैर करने की तस्वीरें सामने आईं.
लेकिन इस बार यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने कहा है कि वे गाइडेड टूर नहीं करना चाहते हैं, वो ख़ुद से लोगों से मिलना चाहते हैं.
उनके अनुसार वो पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती से भी मिलना चाहते हैं जो कि पाँच अगस्त से ही हिरासत में हैं या नज़रबंद है.
'चुनावी बॉन्ड से चंदा देने वालों के नाम होंगे सार्वजनिक'
इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वालों के नाम अब सार्वजनिक होंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो ऐसे लोगों या संस्थाओं के नामों को सार्वजनिक करें जिन्होंने राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों की पहचान गुप्त रखने की सिफ़ारिश की थी.
सीआईसी ने इस मामले से जुड़े आरटीआई आवेदन पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं करने के आरोपों पर वित्त मंत्रालय और चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया है.
आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने जुलाई 2017 में राजनीतिक दलों को चंदा देने के दौरान पहचान गुप्त रखने संबंधी दानकर्ताओं के ज़रिए लिखे गए पत्रों या याचिकाओं के बारे में जानकारी मांगी थी लेकिन उन्हें वो जानकारी नहीं मिली.
जब उन्हें हर जगह से निराशा हुई तो उन्होंने सीआईसी का दरवाज़ा खटखटाया.
चुनावी बॉन्ड स्कीम शुरू से ही विवादों में रही है क्योंकि इसके तहत किसी भी पार्टी को चंदा देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है. चुनावी बॉन्ड के ज़रिए सबसे ज़्यादा चंदा भाजपा को मिला है.
बजट से पहले अर्थशास्त्रियों के साथ मोदी की बैठक
इस बार आम बजट एक फ़रवरी को पेश किया जाएगा. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को देश के कुछ अर्थशास्त्रियों के साथ नीति आयोग में बैठक करेंगे.
आरबीआई और सांख्यिकी मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी कर कहा है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी पाँच फ़ीसदी रह सकती है जो कि पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है. ऐसे में मोदी की इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सरकार ने सुस्त रफ़्तार से चल रही अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई क़दम उठाए हैं लेकिन ऐसा लगता है कि वे क़दम अपना असर नहीं दिखा पा रहे हैं.
उम्मीद है कि इस मुलाक़ात में प्रधानमंत्री अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उनका सुझाव मांगेगे.
श्रीलंका के विदेशमंत्री दो दिन की भारत यात्रा पर
श्रीलंका के विदेश मंत्री दिनेश गुनावर्द्धना भारत की दो दिवसीय यात्रा पर बुधवार शाम नई दिल्ली पहुंचे.
नवम्बर में श्रीलंका में नई सरकार बनने के बाद वहां के विदेशमंत्री की यह पहली भारत यात्रा है.
गुनावर्द्धना भारतीय विदेशमंत्री डॉ0 एस जयशंकर से मुलाक़ात करेंगे जिनमें अन्य मुद्दों के अलावा मछुआरों के मामले तथा हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थायित्व जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.
शुक्रवार को वे बौद्धगया जाकर वहाँ महाबोधि मंदिर में दर्शन करेंगे.
नवंबर 2019 में श्रीलंका के राष्ट्रपति बनने के बाद गोटाबाया राजपक्षे भी सबसे पहले भारत आए थे.
पाकिस्तान में आर्मी एक्ट को संसद की मंज़ूरी
पाकिस्तान में संसद के निचले सदन के बाद सीनेट ने भी सेना प्रमुख की सेवा में विस्तार करने से संबंधित बिल को मंज़ूरी दे दी है.
मंगलवार को निचले सदन ने बिल को मंज़ूरी दी थी और बुधवार को संसद के ऊपरी सदन ने इसे मंज़ूरी दे दी.
इस बिल के पास हो जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पास ये अधिकार होगा कि वे थल, जल और वायु सेना तीनों के प्रमुखों की नौकरी में अधिकतम तीन साल का एक्सटेंशन दे सकते हैं. अब इस बिल पर केवल राष्ट्रपति के दस्तख़त की औपचारिकता बाक़ी है.
सुप्रीम कोर्ट ने सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की तीन साल की सेवा विस्तार पर पाबंदी लगा दी थी और उन्हें छह महीने की एक्सटेंशन दी थी.
लेकिन साथ में ये भी कहा था कि सरकार चाहे तो इस दौरान संसद से बिल पास करा सकती है.
पाकिस्तान की तीनों प्रमुख पार्टियों सत्तारूढ़ पीटीआई, पीपीपी और मुस्लिम लीग नवाज़ ने बिल का समर्थन किया लेकिन कई छोटी पार्टियों ने बिल का विरोध किया था.
बलोचिस्तान नेशनल पार्टी के प्रमुख ने कहा, ''आज मुल्क़ की तीन बड़ी पार्टियों ने मिलकर लोकतंत्र को संसद के अंदर दफ़ना दिया है.''
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