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CAA: बिजनौर में प्रदर्शन के दौरान दो युवाओं की गोली लगने से मौत, पुलिस का फ़ायरिंग से इनकार
- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बिजनौर से बीबीसी हिंदी के लिए
एनआरसी और सीएए कानून के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दो युवकों की मौत हो गई. पुलिस प्रशासन ने इन दोनों मौतों की पुष्टि की है.
हालांकि, युवकों की मौत कैसे हुई, इसके बारे में फ़िलहाल ठोस जानकारी नहीं मिल रही है, हालांकि इस बात की जांच शुरू हो गई है. पुलिस ने तीन एफ़आईआर दर्ज की हैं और 65 लोगों को हिरासत में लिया है.
शुक्रवार को स्थानीय नागरिकों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं. उधर दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद उनको दफना दिया गया है.
नहटौर में हिंसा
बिजनौर में धामपुर तहसील के अन्तर्गत आने वाले मुस्लिम बहुल इलाके नहटौर में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद युवाओं की भीड़ गैस एजेंसी चौक पर तीन मस्जिदों के निकट इकट्ठा होना शुरू हुई.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "शहर के कई युवा जुमे की नमाज के बाद मस्जिद में नमाज पढ़ कर बाहर निकले. ये युवा नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए के ख़िलाफ़ नारेबाजी कर रहे थे. जिस समय युवाओं की भीड़ यहां एकत्रित होकर एक जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ने को हुई तो पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा. इसके बाद स्थिति बिगड़ गई."
शाम लगभग तीन और चार बजे के बीच पुलिस और स्थानीय नागरिकों में टकराव की स्थिति पैदा को गई. प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे थे, वे लोग एनआरसी और नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में नारे लगा रहे थे. हालांकि धारा 144 लगी होने के चलते स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई.
हालांकि प्रदर्शनकारी को नेतृत्व करने वालों में राजनीतिक दल का कोई प्रतिनिधि नहीं था. हालांकि विरोध प्रदर्शन करने वालों के साथ स्थानीय समाजवादी कार्यकर्ता भी मौजूद थे.
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प तब हिंसक हो उठी जब पुलिस की कुछ मोटरसाइकिल और दो जीपों को आग लगा दी गई, पुलिस का दावा है कि ये आग प्रदर्शनकारियों ने लगाई, इसके बाद अफ़रातफ़री का माहौल बन गया.
इस अफ़रातफ़री में फ़ायरिंग की आवाज़ सनाई पड़ी. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें नौधा गांव के निवासी 20 वर्षीय सुलेमान और 22 वर्षीय अनस की मौत हो गई.
हालांकि स्थानीय पुलिस किसी भी तरह की फ़ायरिंग से इनकार कर रही है. राज्य के पुलिस प्रमुख ओपी सिंह भी बयान दे चुके हैं कि पूरे राज्य में पुलिस की ओर से कोई फ़ायरिंग नहीं हुई है.
दफ़नाए गए शव
मृतक सुलेमान के रिश्ते के चाचा मुंसफ ने बताया कि "मैं बाहर था. मुझे फोन पर सूचना मिली कि सुलेमान को गोली लगी है. मैं तुरंत घर पहुंचा और उसे लेकर अस्पताल की ओर चल दिया. लेकिन सुलेमान ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया."
धामपुर के उप ज़िलाधिकारी धीरेन्द्र सिंह ने बीबीसी को बताया, "भीड़ में सुलेमान और अनस की मौत हुई है. उनके मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है. दोनों युवकों के शवों का पोस्टमार्टम करा दिया गया है. शनिवार सुबह उनके शवों को सुपुर्दे खाक भी करा दिया गया है."
एक सवाल के जवाब में एसडीएम ने कहा, "पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी. वैसे संभव है कि उनकी मौत गोली लगने से हुई हो. लेकिन गोली किसने मारी यह जांच का विषय है."
बिजनौर के एसीएमओ डॉक्टर एके निगम ने भी शुक्रवार रात कहा था कि ज़िला अस्पताल में तीन लोगों को भर्ती कराया गया था. उन्हें गोली लगी थी.
ज़िलाधिकारी रमाकांत पांडेय ने पत्रकारों को बताया 'नहटौर मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं हैं. जबकि 65-70 लोगों को हिरासत में लिया गया है. बिजनौर में अलग-अलग स्थानों पर हुए हिंसक प्रदर्शनों में कुल 11 एफआईआर दर्ज की गई हैं.
शहर से ग़ायब हुए कई युवा
शुक्रवार को पुलिस और स्थानीय नागरिकों में हुई झड़प के बाद दो युवाओं की मौत से शहर में शांतिपूर्ण तनाव जारी है.
एक शहरवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "दिन में हुई इस झड़प के बाद रात के वक़्त ज़्यादातर युवाओं को उनके घरवालों ने घर से दूर रिश्तेदारियों में भेज दिया. हमें डर था कि कहीं पुलिस रात में ही घरों में घुस उनको उठाकर अपने साथ न ले जाए."
एक महिला ने बताया, 'हमें लगातार पुलिस का खौफ़ है. हमारे ही बच्चे मारे गए और हमें ही डर सता रहा है."
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