MTNL: 18,000 कर्मियों को तीन महीने का वेतन नहीं

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- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
एमटीएनएल के 18,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों की तन्ख़्वाह नहीं मिली है.
चेयरमैन सुनील कुमार को उम्मीद है कि एमटीएनएल दिसंबर के पहले हफ़्ते में एक महीने की तन्ख़्वाह रिलीज़ कर पाएगी.
एमटीएनएल मज़दूर संघ के धर्मराज सिंह के मुताबिक़ उन्हें आखिरी बार वेतन सितंबर में मिला था.
सुनील कुमार ने बीबीसी को बताया कि तन्ख़्वाहों में देरी का कारण "रेवेन्यू कलेक्शन में कमी" है.
मज़दूर संघ के धर्मराज सिंह के मुताबिक, "मैनेजमेंट कह रहा है पैसा नहीं है.... बैंक एमटीएनएल को लोन नहीं देते. इनकी (एमटीएनएल) बैलेंसशीट देखने के बाद बैंक कहते हैं, पैसे कहां से लौटाओगे. जब तक सरकार की गारंटी नहीं मिलती है कोई बैंक पैसा रिलीज़ नही करता."

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एमटीएनएल पर 20 हज़ार करोड़ क़र्ज़
टेलीकॉम सेक्टर पर भारी कर्ज़ है. सरकारी और निजी कंपनियों दोनों ही इसका शिकार हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक एमटीएनएल पर 20,000 करोड़ रुपए का क़र्ज़ है. बीएसएनएल पर भी क़रीब इतना ही कर्ज़ है.
एमटीएनएल मुंबई और दिल्ली में ऑपरेट करती है जबकि बीएसएनएल बाकी देश में मौजूद है.
इस बीच बीएसएनल की तर्ज़ पर बड़ी संख्या में एमटीएनएल कर्मचारी भी वीआरएस के लिए आवेदन दे रहे हैं.
वीआरएस स्कीम के तहत एक एमटीएनएल कर्मचारी सेवा अवधि के दौरान अपनी मर्ज़ी से नौकरी छोड़ने का फ़ैसला करता है.
एमटीएनएल चेयरमैन सुनील कुमार के मुताबिक़ वीआरएस के लिए उपयुक्त 16,000 कर्मचारियों में से 14,000 ने वीआरएस के लिए आवेदन दिया है.
स्कीम के मुताबिक़ 50 वर्ष या उससे ऊपर के कर्मचारी वीआरएस ले सकते हैं.

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वीआरएस में दिख रहा फ़ायदा
टेलिकॉम टेक्निकल एसिस्टेंट ब्रजेश उपाध्याय वीआरएस लेने वालों में से हैं. उन्होंने 1982 में जब सर्विस शुरू की तब इसे पोस्ट एंड टेलीग्राफ़ डिपार्टमेंट कहा जाता था.
बाद में दोनों को अलग कर दिया गया और 1986 में एमटीएनएल बना.
ब्रजेश वीआरएस लेने का कारण बताते हैं, "जब मैं वीआरएस पैकेज कैलकुलेट करता हूँ तो उससे मुझे कोई नुकसान नहीं है. जो राशि मुझे सर्विस में रहकर मिलती, मुझे उससे ज़्यादा मिल रहा है."
लेकिन ब्रजेश के मुताबिक़ तन्ख़्वाह में देरी भी वीआरएस पैकेज के लिए आवेदन देने का एक कारण है. वो वीआरएस के लिए किसी बाहरी दबाव से इनकार करते हैं.
धर्मराज सिंह के मुताबिक़ कर्मचारियों को कंपनी का बहुत अच्छा भविष्य दिखाई नहीं देता जिस कारण वो वीआरएस ले रहे हैं.
एमटीएनएल चेयरमैन सुनील कुमार ने बीबीसी से कहा, "वीआरएस स्कीम से वेतन पर होने वाला ख़र्च 2200 करोड़ से घटकर 550-600 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा."
इससे पहले बीएसएनएल प्रमुख पीके पुरवार ने बीबीसी से कहा था कि बीएसएनएल के 79,000 कर्मचारियों ने स्वैच्छिक रूप से रिटायरमेंट स्कीम (वीआरएस) के लिए आवेदन दिया है.
वीआरएस स्कीम 3 दिसंबर तक लागू है.
संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद में बीएसएनएल और एमटीएनलएल में दोबारा जान फूंकने की बात दोहराई है.
सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल में बढ़ते घाटे को देखते हुए दोनों के मर्जर, एक रिवाइवल पैकेज, संपत्ति की बिक्री और वीआरएस स्कीम की बात की है.
लेकिन बीबीसी से बातचीत में कर्मचारी कह रहे हैं, अगर वीआरएस जैसे कदमों के बाद बीएसएनएल का घाटा कम हो भी गया तब भी आगे की राह आसान नहीं.

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क्या हैं चुनौतियां
सालों से एमटीएनएल में काम कर रहे एक अधिकारी के मुताबिक कंपनी के लिए आय बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती होगी.
उनके मुताबिक, "मेरी चिंता है कि मेरे जैसे एमटीएनएल में काम करने वाले लोगों के पास ढेर सारे सुझाव हैं लेकिन मैनेजमेंट पुराने ढर्रे से चल रहा है और हमारी कोई सुन नहीं रहा. अगर हम अच्छे से काम करें तो कोई निजी कंपनी हमारा मुक़ाबला नहीं कर सकती."
उन्होंने मुझे एक व्हाट्सऐप ग्रुप दिखाया जिसमें एमटीएनएल अधिकारी वीआरएस पर अपने विचार,आइडियाज़ रख रहे थे.
मज़दूर संघ के धर्मराज सिंह कहते हैं, "हमारे पास नेटवर्क मेंटेंनेंस के लिए भी पैसा नहीं है, हमें उसके लिए ऋण लेना पड़ता है.... हमारा ज़्यादातर नेटवर्क कॉपर का है और वो उस ज़माने का है जब टेलिफ़ोन का इस्तेमाल वॉयस के लिए होता था. आज लोगों को टेलिफ़ोन डेटा के लिए चाहिए. हमें सिस्टम को फ़ायबर पर लाना पड़ेगा."
"कॉमनवेल्थ गेम्स, मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण कई जगह तार कट गए हैं. सड़क चौड़ी हो गई तो तार बीच में आ गए हैं. इस कारण हम खुदाई नहीं कर सकते. तारों के पास जा भी नहीं सकते. तो कई इलाक़े हमसे कट गए हैं. हमें नई केबलिंग करनी पड़ेगी और हमें फ़ायबर लाना पड़ेगा."
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