प्रज्ञा ठाकुर ने गोडसे वाले बयान पर माफ़ी मांगी

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बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने लोकसभा में गोडसे के अपने बयान पर माफ़ी मांग ली है. उन्होंने कहा कि किसी को ठेस पहुंची हो तो माफ़ी मांगती हूं.
उन्होंने लोकसभा में कहा, "मैं सदन में मेरी किसी भी टिप्पणी से किसी भी प्रकार से किसी को कोई ठेस पहुंची हो तो उसके लिए मैं खेद प्रकट कर क्षमा चाहती हूं."
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उन्होंने ये भी कहा कि मेरे बयान को तोड़-मोड़कर पेश किया गया है. उन्होंने इस मौके पर राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि मेरे ख़िलाफ़ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है, बिना आरोप साबित हुए मुझे आतंकवादी कहना ग़लत है.
प्रज्ञा ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा था. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें रक्षा मामले की सलाहकार समिति से हटाने का फ़ैसला किया था.
राहुल गांधी ने 28 नवंबर को ट्वीट किया था, "आतंकवादी प्रज्ञा ने आतंकवादी गोडसे को देशभक्त बताया. भारतीय संसद के इतिहास का एक उदास दिन."
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प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद हैं और उन्होंने इस साल हुए चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को हराया था.
प्रज्ञा सिंह ठाकुर 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में अभियुक्त हैं. फिलहाल वो स्वास्थ्य कारणों से ज़मानत पर बाहर हैं.
इससे पहले भी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इसे बयान के लिए वो उन्हें कभी दिल से माफ़ नहीं कर पाएंगे.
बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य रह चुकी हैं.
उन्होंने इस साल लोकसभा चुनाव में भोपाल से जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को हराया था. वे अपने बयानों को लेकर विवादों में भी रही थीं.
साल 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट में वे अभियुक्त भी हैं.
महाराष्ट्र के मालेगाँव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने 29 सितंबर 2008 की रात 9.35 बजे बम धमाका हुआ था जिसमें छह लोग मारे गए और 101 लोग घायल हुए थे.

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इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी. एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक़ यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी.
इस मामले में एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को ज़मानत दे दी थी लेकिन उन्हें दोषमुक्त नहीं माना था और दिसंबर 2017 में दिए अपने आदेश में कहा था कि प्रज्ञा पर यूएपीए (अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ प्रीवेंशन एक्ट) के तहत मुक़दमा चलता रहेगा.
प्रज्ञा ठाकुर पर समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले के अभियुक्त सुनील जोशी की हत्या का आरोप भी लगा था. जोशी की 29 दिसंबर 2007 को हत्या कर दी गई थी.
अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में भी प्रज्ञा ठाकुर का नाम आया था लेकिन अप्रैल 2017 में एनआईए ने प्रज्ञा ठाकुर, आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार और दो अन्य के ख़िलाफ़ राजस्थान की स्पेशल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी.
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