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भारत में रिश्वत को लेकर नया सर्वे: हर दूसरा भारतीय देता है रिश्वत- प्रेस रिव्यू
द इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, भारत में पिछले साल के मुक़ाबले रिश्वतखोरी के मामलों में 10 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
ट्रांसपरेंसी इंटरनेशन इंडिया के 'द इंडिया करप्शन सर्वे 2019' के हवाले से ये बात कही गई है. इस सर्वे में ये भी कहा गया है कि बीते 12 महीनों में 51 फ़ीसदी भारतीयों ने रिश्वत देने का काम किया है.
ये सर्वे दिल्ली, बिहार, हरियाणा और गुजरात समेत क़रीब 20 राज्यों में किया गया था. सर्वे की मानें तो अब भी रिश्वत के लिए नकद का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा किया जाता है.
इस सर्वे में 16 फ़ीसदी लोग ऐसे भी रहे, जिन्होंने ये कहा कि वो बिना रिश्वत दिए अपना काम निकलवा लेते हैं.
सर्वे के मुताबिक़, सबसे ज़्यादा रिश्वत प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और ज़मीन से जुड़े मामलों में दी जाती रही है.
पुलिस एफ़आईआर में उर्दू, फ़ारसी का इस्तेमाल
द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि एफ़आईआर को आसान भाषा में लिखा जाए.
एफ़आईआर लिखते वक़्त उर्दू और फारसी के शब्दों का इस्तेमाल कम हो. ताकि आम जनता इसे समझ सके.
एफ़आईआर लिखते हुए रोजनामचा, गफलत, इत्तला, तहरीर, फरमाया और तफ़्तीश जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है.
कोर्ट ने पुलिस से एफ़आईआर की 100 कॉपियां मंगाईं थीं ताकि ये पता किया जा सके कि आदेश का पालन हो रहा है या नहीं.
हाईकोर्ट ने कहा है कि एफ़आईआर शिकायतकर्ता के शब्दों में होनी चाहिए. पुलिस आम आदमी का काम करने के लिए. सिर्फ़ उन लोगों के लिए नहीं है, जिनके पास उर्दू और फारसी में डॉक्टरेट की डिग्री है.
पाकिस्तान पर क्या बोले राजनाथ सिंह?
जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आतंकवादी हमलों के लिए भारत अब आसान लक्ष्य नहीं रहा.
रक्षा मंत्री ने ये बातें 26/11 हमले की 11वीं बरसी के एक कार्यक्रम में कहीं.
राजनाथ सिंह ने कहा, ''हम देश पर होने वाले किसी भी हमले से निपटने में सक्षम हैं. अगर पाकिस्तान आतंकवादियों की मदद करने से बाज नहीं आया तो हम उसे ब्लैक लिस्ट करेंगे.''
उन्होंने कहा, ''फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करना, आतंकवादियों की ताबूत में आख़िरी कील साबित होगा.''
हिंदुस्तान अख़बार की ख़बर के मुताबिक़, जाने-माने कार्टूनिस्ट सुधीर धर का मंगलवार को 87 साल की उम्र में निधन हो गया.
अपने 58 साल के करियर में सुधीर धर कई अख़बारों में अपने कार्टून्स से अलग-अलग मुद्दों पर व्यंग्य करते रहे.
धर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1961 में द स्टेट्समैन अख़बार से की थी.
दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक़, फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर सेना में पहलवान भर्ती हो रहे हैं.
अखबार लिखता है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों में युवाओं को राष्ट्रीय चैंपियन बताया गया है. हाल ही में ऐसे कई फर्जी प्रमाणपत्र सामने आए हैं.
इन प्रमाणपत्रों के आधार पर सेना में कुछ युवा भर्ती हुए थे. ऐसे क़रीब 15 पहलवानों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं.
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