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कश्मीर पर यशवंत सिन्हा: ये नॉर्मल नहीं न्यू नॉर्मल है
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
पाँच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को राज्यसभा में कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है.
अमित शाह के दावे के बाद देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक और वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण कश्मीर के दौरे पर आए हैं.
हालांकि, पिछली बार यशवंत सिन्हा को कश्मीर आने से रोक दिया गया था और उन्हें श्रीनगर हवाई अड्डे से ही बैरंग वापस लौटा दिया गया था.
बीबीसी के साथ बातचीत में यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर इस तरह की ज़िंदगी को नॉर्मल लाइफ़ या सामान्य हालात कहा जाए तो यह न्यू नॉर्मल है, पूरा नॉर्मल नहीं है.
क्या जानने कश्मीर आए?
यशवंत सिन्हा ने बताया, "यहां के बारे में बिल्कुल दो तरह की अलग-अलग रिपोर्ट आती रही हैं. एक सरकारी रिपोर्ट आती थी और एक सरकारी मीडिया की रिपोर्ट आती थी. और एक विदेशी मीडिया, यहां के बारे में रिपोर्ट करती थी. हम लोगों के आने का मक़सद मूलतः यह है कि हम ख़ुद आकर देखें कि यहां के हालात क्या हैं."
उन्होंने यहां के प्रशासन का भी शुक्रिया अदा किया जिसने पिछली बार की तरह उन्हें नहीं रोका और अंदर आने दिया.
उन्होंने कहा, "रास्ते में हम देखते आ रहे हैं कि सारी दुकानें बंद थीं. इसको अगर नॉर्मल लाइफ़ या सामान्य हालात कहा जाए तो यह न्यू नॉर्मल है, पूरा नॉर्मल नहीं है. हम लोगों के आने का मुख्य मक़सद यही था कि हम देखें कि ज़मीन पर यहां हालात क्या हैं. लोगों से बातचीत करें और उनकी तकलीफ़ों को जानें. और बंद के कारण पांच अगस्त से यहां के लोगों का जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसका आकलन करें."
राजनेताओं से भी मिलने का प्रयास
यशवंत सिन्हा के साथ कश्मीर दौरे पर आए पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक ने कहा कि वो राजनेताओं से भी मिलने की कोशिश करेंगे.
कपिल काक ने बताया, "सियासतदानों से भी मिलने की कोशिश करेंगे. पिछले तीन महीने में मेरा यहां तीसरा दौरा है और मैं देख रहा हूं कि कोई सामान्य हालात नहीं है."
उन्होंने सवाल किया कि जब आपके पास इंटरनेट नहीं है तब आप कौन-से सामान्य हालात ढूंढ रहे हैं.
उन्होंने कहा, "आज सारी दुनिया में माना जाता है कि अगर आपके पास इंटरनेट नहीं है तो आपकी एक किडनी चली गई है. दूसरा मुझे लगता है कि पांच-छह अगस्त को जो घोषणाएं की गई हैं उसका कश्मीरियों पर गहरा असर पड़ा है. मैं भी एक कश्मीरी हूं. अब 60-70 लाख लोग अपने घरों में पिछले 110-112 दिनों से रह रहे हैं, दुकानें बंद हैं तो यह एक सामान्य हालात कैसे हो सकते हैं."
उन्होंने कहा, "अब हमारी कोशिश है कि इसका आकलन करें और उसे हम सारे हिन्दुस्तान को बताएं. यह भी ज़रूरी है कि हिन्दुस्तान समझे, मीडिया पर ना जाए, वह स्वतंत्र रिपोर्ट देखे. आप जानते हैं कि यहां अभी तक 10 सिविल सोसाइटीज़ ग्रुप आए हुए हैं. यह हमारा दसवां दौरा है. इससे पहले नौ प्रतिनिधिमंडल आए हुए हैं. उन्होंने आकलन किया है और उनका आकलन पूरी दुनिया में छपा है."
ख़बर कैसे देंगे?
प्रतिनिधिमंडल के साथ आए वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण का कहना है कि अगर आप लोगों को इंटरनेट नहीं देंगे, सोशल मीडिया बंद कर देंगे तो एडिटर ख़बर कैसे देंगे.
उन्होंने कहा, "यहां से बाकी इंडिया में सही रिपोर्ट आ रही है कि नहीं यह किसी को पता नहीं है. दूसरा यह कि प्रतिबंध तो है ही, अगर आप लोगों को इंटरनेट नहीं देंगे, सोशल मीडिया बंद कर देंगे तो एडिटर ख़बर कैसे देंगे. हम इसे फ़्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं कह सकते. यहां हर आदमी की निगरानी हो रही है.
उन्होंने कहा कि पूरी बहस सुरक्षा को लेकर हो रही है, कहा जा रहा है कि पुलिस ने एक आदमी को भी नहीं मारा है और सब कुछ सामान्य है तो पुलिस हटाई क्यों नहीं जाती है.
उन्होंने कहा, "हम इस बार देखेंगे कि लोग क्या कहते हैं. क्योंकि हम सोचते हैं कि कश्मीर के जो हमारे भाई-बहन हैं वो भी भारत के नागरिक हैं. उनसे पूछेंगे कि आपको कैसा लग रहा है. आपकी लाइफ़ कैसी चल रही है. खाने-पीने का सामान घर में है कि नहीं. शादी-विवाह हो रहा है या नहीं, फ़ोन पर अपने बच्चों का हालचाल जान पाते हैं कि नहीं. जो बच्चे बाहर पढ़ रहे हैं उन्हें फ़ीस भेज पाते हैं कि नहीं. जब इंटरनेट बैंकिंग बंद है तो वो कैसे पैसे भेजेंगे. ये सब बातें हम पता करने के लिए आए हैं."
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