अयोध्या विवाद पर हमारी सरकार के कारण आया ऐसा फ़ैसला: बीजेपी सांसद

    • Author, भार्गव परीख
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

गुजरात में भरूच से बीजेपी के एक सांसद मनसुख वसावा के एक बयान को लेकर विवाद पैदा हो गया है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के "पक्ष में" फ़ैसला सुनाया क्योंकि केंद्र में बीजेपी की सरकार है.

उनके इस बयान की कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने निंदा करते हुए उन पर "सांप्रदायिक तनाव फैलाने" का आरोप लगाया है.

सांसद मनसुख वसावा इसके पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में आते रहे हैं.

2017 में उन्होंने एक बयान दिया था कि लोग अनुसूचित जनजाति के फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र लेकर नौकरियाँ हासिल कर रहे हैं जिसे लेकर विवाद हुआ था.

अयोध्या विवाद पर फ़ैसला आने के बाद सांसद ने भरूच में गुरुवार की शाम को एक दिवाली स्नेह मिलन समारोह में कहा कि राम जन्मभूमि का मुद्दा बहुत पुराना है और ये अभियान भारत की आज़ादी के पहले से चल रहा था.

उन्होंने वहाँ कहा, "केंद्र में बीजेपी सरकार होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट को हमारे पक्ष में फ़ैसला देना पड़ा."

उनके भाषण का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

हालाँकि विवाद के बाद मनसुख वसावा ने कहा कि उनके भाषण को सही संदर्भ में नहीं लिया गया.

बीबीसी गुजराती से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका आशय ये था कि नरेंद्र मोदी की सरकार होने की वजह से इस फ़ैसले के बाद कोई गड़बड़ नहीं हुई और अगर कोई और प्रधानमंत्री होता तो अव्यवस्था फैल सकती थी.

विपक्ष ने एक स्वर में की आलोचना

मनसुख वसावा के इस बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता निसार व्यास ने बीबीसी गुजराती से कहा कि मनसुख भले ही लंबे समय से सांसद हैं मगर उन्हें सुप्रीम कोर्ट की गरिमा का अहसास नहीं है.

व्यास ने कहा, "उन्होंने एक तरह से अप्रत्यक्ष घोषणा कर दी है कि सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ईडी जैसी सरकारी मशीनरी को केंद्र सरकार ही चला रही है."

"सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं को जांचकर फ़ैसला सुनाया है मगर वह कह रहे हैं कि यह सरकार के इशारे पर हुआ है. जो लोग अपनी राजनीतिक की नैय्या राम के नाम पर चलाते थे, अब उन्हें राम ही बचा सकते हैं."

एनसीपी नेता शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि यह दुखद है कि कुछ बीजेपी नेताओं ने आसानी से चर्चा में आने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का अपमान किया है. इस तरह के बयान सुप्रीम कोर्ट का अपमान हैं.

हिंदुस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ गुजरात के अध्यक्ष हामिद भट्टी ने बीबीसी गुजराती से कहा कि गुजरात के सांसद इस तरह का बयान देकर दो समुदायों के बीच कड़वाहट बढ़ाना चाहते हैं.

मनसुख के बयान को लेकर गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जितु वाघाणी से संपर्क किया गया मगर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

बाबर के वंशज ने क्या कहा?

बीजेपी सांसद मनसुख के बयान को लेकर मुग़ल बादशाह बाबर की छठी पीढ़ी से संबंध रखने का दावा करने वाले प्रिंस टूसी ने बीबीसी से कहा कि कुछ राजनेता सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं जो कि दुखद है.

उन्होंने कहा कि 'देश की आज़ादी से पहले यह ज़मीन ब्रितानी सरकार के पास थी और वहां नमाज़ नहीं पढ़ी जाती थी.'

प्रिंस टूसी ने कहा, "हमारे पूर्वज बाबर ने अपने सैनिकों के नमाज़ पढ़ने के लिए यह मस्जिद बनवाई थी. दूसरी बात यह है कि फ़ैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुस्लिम जज भी शामिल थे. ऐसे में वह (मनसुख) ऐसा बयान देकर देश का सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं."

"देश के मुसलमानों ने जहां इस फ़ैसले को स्वीकार कर लिया है, वहीं मैं, बाबर का वंशज, भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करता हूं. लोगों को इस तरह की भड़काऊ बातें करने परहेज़ करना चाहिए.

उधर विश्व हिंदू परिषद के पूर्व नेता और राम मंदिर निर्माण के लिए सक्रिय रहे प्रवीण तोगड़िया ने मनसुख वसावा के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा, "यह सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला है, मैं सस्ती लोकप्रियता चाह रहे नेता पर टिप्पणी करके कोर्ट का अपमान नहीं करूंगा."

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