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महाराष्ट्र पर अमित शाह बोले- "राष्ट्रपति शासन से बीजेपी का ही नुक़सान, बाक़ी दलों के लिए मौक़ा अब भी खुला है"
महाराष्ट्र में सरकार गठन के गतिरोध पर बीजेपी अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रपति शासन लगाए जाने से विपक्ष नहीं, बल्कि बीजेपी का नुकसान हुआ है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि साथी दल शिव सेना ने ऐसी शर्त रखी थी जो स्वीकार नहीं की जा सकती थी. उन्होंने कहा कि राज्यपाल की ओर से राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला सही है.
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर किसी के पास संख्या बल है तो वह आज भी राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है और राज्यपाल ने किसी को मौक़ा देने से इनकार नहीं किया है.
उन्होंने कहा, "अभी सबके पास समय है. कोई भी वहां जा सकता है. किसका मौक़ा छीन लिया, कैसे मौक़ा छीन लिया? मेरी समझ में नहीं आता कि कपिल सिब्बल जैसे विद्वान वकील बचकानी दलीलें दे रहे हैं कि उन्हें महाराष्ट्र में सरकार बनाने का मौक़ा नहीं मिला. आपके पास मौक़ा है, आप सरकार बनाओ ना."
अमित शाह ने यह भी कहा कि चुनाव अभियान के दौरान जब देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया गया तो किसी ने आपत्ति नहीं की थी.
उन्होंने कहा, "चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैंने कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि हमारा गठबंधन जीतता है तो देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे. तब किसी ने आपत्ति नहीं की. अब वे नई मांग लेकर आए हैं जो हमें स्वीकार्य नहीं हैं."
राज्यपाल ने नहीं दिया शिव सेना को 48 घंटों का वक़्त
दरअसल बीजेपी की ओर से सरकार बनाने में असमर्थता ज़ाहिर किए जाने के बाद कोई भी दल जब सोमवार शाम तक बहुमत के लिए ज़रूरी विधायकों के समर्थन की चिट्ठी राज्यपाल के सामने पेश नहीं कर सका तो राज्यपाल की सिफ़ारिश पर मंगलवार को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.
महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं लेकिन इस बार हुए विधानसभा चुनावों में कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी.
राज्यपाल ने सबसे पहले, सबसे अधिक सीट पाने वाली बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था लेकिन शिव सेना के साथ छोड़ने के बाद बीजेपी ने सरकार बनाने में असमर्थता ज़ाहिर की. इसके बाद शिव सेना को न्योता दिया लेकिन शिव सेना ने 48 घंटे की मोहलत मांगी.
राज्यपाल ने उनके इस आग्रह को अस्वीकार करते हुए उन्हें 24 घंटे की मोहलत दी. इसके बाद सोमवार देर रात को ही राज्यपाल ने एनसीपी को भी सरकार बनाने का दावा पेश करने का न्योता दिया लेकिन कांग्रेस को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया.
जिसे लेकर अहमद पटेल ने मंगलवार को नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह संविधान के अनुरूप नहीं है.
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सुप्रीम कोर्ट में अपील
उधर शिव सेना ने सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया है. शिव सेना की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल वकील हैं.
शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी सभी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आलोचना की है.
हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार समर खड़स मानते हैं कि यह राष्ट्रपति शासन जल्दी ही समाप्त हो जाएगा.
समर खड़स के मुताबिक़ "मंगलवार को जिस तरह से अहमद पटेल और शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की उससे यह साफ़ संकेत मिलते हैं कि आने वाले वक़्त में शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर सरकार बनाएंगी."
वहीं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डनवीस ने एक प्रेस बयान जारी कर राष्ट्रपति शासन लागू होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया मगर उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र में जल्दी ही एक स्थिर सरकार बनेगी.
इससे पहले गृह मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि महाराष्ट्र में कोई भी विपक्षी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं था, इसलिए राष्ट्रपति शासन बेहतर विकल्प था.
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