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राम जन्मभूमि पर फ़ैसले के बाद की अयोध्या की तस्वीरें
अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद ज़मीन के दशकों पुराने विवाद में फ़ैसला आ गया है.
शीर्ष अदालत ने 2.77 एकड़ की विवादित ज़मीन पर हिंदू पक्ष का मालिकाना हक़ माना है. साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर देने का आदेश दिया है.
ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने फ़ैसले का स्वागत किया और लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है.
फ़ैसले के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश के कई शहरों समेत देश में कई संवेदनशील जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं.
40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को इस दशकों पुराने मामले में पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अपना फ़ैसला दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोर्ट ने अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान सबको धैर्य से सुना और पूरे देश के लिए ख़ुशी की बात है कि फ़ैसला सर्वसम्मति से आया, यह कार्य सरल नहीं है.
ज़मीन पर हिंदुओं का दावा उचित मानते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर अयोध्या पर एक कार्ययोजना तैयार करने का कहा है.
बाबरी मस्जिद के नीचे एक संरचना पाई गई है जो मूलतः इस्लामी नहीं थी. विवादित भूमि पर अपने फ़ैसले में अदालत ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान को नकारा नहीं जा सकता.
नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी फ़ैसले का स्वागत किया है.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सभी से संयम बनाए रखने की अपील की और 'झगड़ा-विवाद' समाप्त करने की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि इसे हार-जीत की तरह नहीं देखना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और मुसलमान पक्ष के वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने असंतोष ज़ाहिर किया है.
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह ज़मीन की लड़ाई नहीं थी, यह क़ानूनी हक़ की लड़ाई थी.
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