सोनिया-प्रियंका-राहुल को अब एसपीजी सुरक्षा नहीं

सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा व्यवस्था भारत सरकार ने वापस ले ली है. इसकी पुष्टि एसपीजी के सूत्रों ने बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद से की है.

स्पेशल प्रोटेक्सन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा व्यवस्था मौजूदा प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के अलावा उनके निकटम परिवार को मिलती है. गांधी परिवार के सदस्यों से एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब यह सुविधा केवल मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रही है.

गांधी परिवार के तीनों सदस्यों से एसपीजी कवर हटाए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा है. वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके उनकी सुरक्षा में रही एसपीजी को धन्यवाद किया है.

राहुल गांधी ने कहा, "एसपीजी में मेरे सभी भाइयों और बहनों को मैं धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने सालों से मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम किया. आपके समर्पण, आपके निरंतर समर्थन और स्नेह भरी यात्रा के लिए धन्यवाद. यह सफर मेरे लिए बेहद खास रहा है. एक बेहतरीन भविष्य के लिए शुभकामनाएं. "

साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ साल बाद 1988 में एसपीजी का गठन हुआ था. एसपीजी का सालाना बजट 375 करोड़ रुपये से अधिक है और इसे देश की सबसे महंगी और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है.

एसपीजी सुरक्षा व्यवस्था को सबसे चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है लेकिन इसमें कितने लोगों की तैनाती होती है, यह निश्चित नहीं होती है. यह ख़तरे की आशंका को देखते हुए ऊपर नीचे हो सकती है.

एसपीजी के बेड़े में गाड़ियों का बेड़ा और एयर ट्रांसपोर्ट का दायरा भी शामिल होता है. एसपीजी, कैबिनेट सेक्रिटेरियट के अधीन काम करता है.

उधर दूसरी ओर, गांधी परिवार के तीनों सदस्यों को अब जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था मिलेगी.

ज़ेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा एसपीजी के बाद देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. यह वीवीआईपी श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है. इस श्रेणी की सुरक्षा में 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड्स के जवान तैनात होते हैं.

इस सुरक्षा में पहले घेरे की ज़िम्मेदारी एनएसजी की होती है. इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी ज़ेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं.

कैसी होती है ज़ेड और वाई श्रेणी?

ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 22 होती है. इस श्रेणी में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) के जवान और अधिकारी सुरक्षा में लगाए जाते हैं.

इस श्रेणी की सुरक्षा में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन भी दिए जाते हैं. जबकि वाई श्रेणी में यह संख्या घटकर 11 हो जाती है. जिनमें दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफीसर्स (पीएसओ) शामिल होते हैं.

एक्स कैटगरी में मात्र 2 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं जिनमें एक पीएसओ शामिल होता है.

भारत में नेताओं या बड़ी शख्सियतों को आम तौर पर ज़ेड प्लस, ज़ेड, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाती है. इनमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, मशहूर नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं.

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