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सीएम पद शिवसेना का अधिकार, लेने का तरीका भी मालूम: संजय राउत
- Author, मयूरेश कोण्णूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शिवसेना नेता संजय राउत ने बीजेपी पर 'पलटी मारने' का आरोप लगाते हुए कहा है कि सीएम पद पर शिवसेना का अधिकार है और उन्हें उसे हासिल करने का तरीक़ा भी मालूम है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने यह तो माना कि 24 अक्तूबर के बाद से भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच सरकार बनाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है लेकिन यह दावा भी कर दिया कि शिवसेना का सीएम जल्द शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा.
उधर भारतीय जनता पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि देंवेद्र फडणवीस ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इस तरह से, साथ चुनाव लड़ने वालीं दोनों पार्टियों के बीच पैदा हुआ गतिरोध ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
हाल में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है मगर अभी तक नई सरकार के गठन का रास्ता साफ़ होता नहीं दिख रहा.
ये चुनाव सत्ताधारी बीजेपी और शिवेसना के गठबंधन ने साथ लड़े थे और 24 अक्तूबर को आए परिणाम उनके पक्ष में भी रहे. भाजपा और शिवसेना मिलकर बहुमत लायक सीटें भी ले आए हैं मगर सीएम कौन होगा, इस सवाल को लेकर दोनों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं कि वही सीएम बनेंगे मगर शिवसेना इस बात पर अड़ी हुई है कि सत्ता में बराबर हिस्सेदारी होगी और इस बार उसका भी सीएम होगा.
ऐसी चर्चा भी सामने आई है कि शिवसेना इस बार बीजेपी से अलग जाकर एनसीपी और निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है.
इस गतिरोध के बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि वह इस मामले में 'अंतिम निर्णय' के पास पहुंच रहे हैं.
सरकार बनाने को लेकर चल रही तमाम अटकलों और क़यासों को लेकर बीबीसी ने बात की शिवसेना सांसद संजय राउत से और जानना चाहा कि सरकार बनाने को लेकर क्या तैयारी चल रही है.
संजय राउत ने कहा कि 24 अक्तूबर के बाद से भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच सरकार बनाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, "अभी जो स्थिति है, उसे डेडलॉक कहते हैं. शिवसेना और बीजेपी में कोई चर्चा नहीं हो रही है. गठबंधन को जैसा जनादेश मिला है, उसके बाद तुरंत चर्चा होनी चाहिए था और राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहिए था. लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो रहा, इसे लेकर मेरे पास ज़्यादा जानकारी नहीं है."
हालांकि, संजय राउत ने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार बताते हुए कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले हुए समझौते का उल्लंघन किया है.
शिवसेना सांसद ने कहा, "ऐसी कोई बड़ी बात नहीं थी. जब गठबंधन हुआ था तो अमित शाह मातोश्री आए थे और कुछ बातें तय हुई थीं कि चुनाव के बाद सरकार बनी तो ये फ़ॉर्मूला होगा. सीएम साहब ने तब ख़ुद मीडिया के सामने कहा था, हमने नहीं कहा था. सीएम, अमित शाह और उद्धव बैठे थे. तब सीएम ने कहा था कि फ़ॉर्मूला तय हुआ है कि 50-50 पावर शेयरिंग होगी, पदों का बंटवारा भी आधा-आधा होगा और इसमें कोई कठिनाई नहीं है."
संजय राउत कहते हैं कि 'जब ये बातें सीएम, उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच तय हुई थीं और मीडिया के सामने आपने ख़ुद ऐसा कहा था तो ऐसा क्या हुआ जो सीएम ने नतीजों वाली शाम को कहा कि मैं ही सीएम रहूंगा; क्या आपको ही मैंडेट मिला है?'
'पलटी मार रहे सीएम'
इधर संजय राउत का दावा है कि ढाई साल उसका भी मुख्यमंत्री होगा और यह बात चुनाव से पहले तय हो गई थी. मगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि शिवसेना और बीजेपी के बीच गठबंधन के समय ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था.
इस बात पर संजय राउत ने कहा, "इसे मराठी में पलटी मारना कहते हैं. अगर ऐसा था तो आपने मीडिया के सामने क्यों कहा था कि पदों और सत्ता का आधा-आधा बंटवारा होगा. क्या आपके पास कोई और राजनीतिक डिक्शनरी है जिसमें इसका कुछ और मतलब होता है? जब आदमी झूठ बोलने लगता है तो वह हदें पार कर देता है."
संजय राउत ने फिर दोहराया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई और समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा, "अगर आप मुख्यमंत्री पद नहीं दे सकते तो हमें आपके साथ नहीं आना है. हम कोई डिमांड नहीं कर रहे बल्कि समझौता हुआ था. आप जाकर सरकार बनाने का दावा पेश कीजिए और बहुमत सिद्ध कीजिए."
जब संजय से पूछा गया कि चूंकि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने महायुति (गठबंधन) बनाकर चुनाव लड़ा था ऐसे में अभी सरकार बनने में हो रही देरी के लिए क्या दोनों पार्टियां ज़िम्मेदार नहीं हैं?
इस पर उन्होंने कहा, "दोनों की हो सकती है. जनादेश गठबंधन को मिला है. यह इसलिए मिला है क्योंकि दोनों में कुछ बातें तय हुई थीं और उन्हें मीडिया के सामने रखा गया था. इसलिए मिला कि शिवसेना का भी सीएम होगा और बीजेपी का भी."
महायुति ने चुनाव के दौरान जनता के बीच यह मुद्दा नहीं रखा था कि दोनों पार्टियों के अलग-अलग सीएम होंगे जो आधे-आधे समय तक रहेंगे. इस पर संजय राउत ने कहा, "शिवसेना महाराष्ट्र में बड़ी पार्टी है, हमारे विधायक कम हों या फिर ज़्यादा. शिवसेना के पास लाखों-करोड़ों समर्पित वोटर हैं. उन्होंने समझा कि शिवसेना का भी सीएम होने वाला है, इसीलिए उन्होंने महायुति को वोट दिया."
'हर हाल में शिवसेना का सीएम लेगा शपथ'
इस बीच संजय राउत ने यह दावा भी किया कि हल हाल में शिवाजी पार्क से शिवसेना का मुख्यमंत्री शपथ लेगा. जब उनसे पूछा गया कि यह कैसे संभव होगा, तो उनका जवाब था, "राजनीति में सब संभव है, ख़ासकर लोकतंत्र में. हमें पता है सीएम कैसे बनाना है. देश में तानाशाही नहीं है. लोकतांत्रिक रास्ते से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बनते हैं. अगर बीजेपी के पास 105 विधायक हैं तो वे करें सीएम पद पर दावा. लेकिन बहुमत के लिए 145 चाहिए. आप 145 विधायक जमा कीजिए."
निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर शिवसेना की संख्या 62-63 के आसपास पहुंच रही है. चर्चा है कि वह एनसीपी के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है, हालांकि एनसीपी ने ऐसी संभावनाओं से इनकार किया है.
फिर किस आधार पर शिवसेना अपने सीएम के शपथ लेने का दावा कर रही है? इस पर शिवसेना सांसद ने कहा, "सीएम कैसे बनेगा, आंकड़े कहां से लाएंगे, हमें यह राज्यपाल को बताना है और विधानसभा में पेश करना है. मीडिया के सामने बताना ज़रूरी नहीं है. हमारे पास आंकड़े हैं और वो आपको विधानसभा में पता चलेगा. लेकिन 105 विधायकों वाली सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को पहले यह भूमिका निभानी है. अगर वे कहते हैं कि सरकार नहीं बना सकते, तो हम देखेंगे."
अगर बीजेपी बिना बात किए अभी सरकार बनाने का दावा पेश करती है तो विधानसभा में उसे बहुमत साबित करना होगा. तो क्या उस स्थिति में शिवसेना अपनी पार्टनर रही पार्टी का समर्थन करेगी? इस सवाल पर संजय राउत ने कहा कि यह बात मीडिया के सामने कहने की नहीं है.
उन्होंने इस बात को भी ग़लत बताया कि सीएम पद के लिए अड़कर शिवसेना वास्तव में मज़बूत पोर्टफ़ोलियो वाले मंत्री पद चाह रही है.
उन्होंने कहा, "शिवसेना व्यापारिक लोगों की पार्टी नहीं है. हम व्यापार नहीं करते. जो है, सो है. जो हमारा अधिकार है, उसके लिए हमें क्या करना है हमें मालूम है. शिवसेना का जन्म पोर्टफ़ोलियो के लिए नहीं हुआ. रही अंतिम निर्णय की बात, वह राज्यपाल करेंगे."
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