You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पश्चिम बंगालः सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में युवक गिरफ्तार
- Author, प्रभाकर एम.
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस में असहिष्णुता लगातार बढ़ती नज़र आ रही है. ताजा मामले में पुलिस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में हुगली जिले के सिंगुर से चंदन भट्टाचार्य (28) नामक एक युवक को गिरफ्तार कर लिया है.
इस महीने ऐसे मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है. इससे पहले प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सन्मय भट्टाचार्य को भी ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की आलोचना के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
हुगली जिले के पुलिस अधीक्षक तथागत बसु ने चंदन की गिरफ्तारी की पुष्टि की है. उन्होंने बताया,"सिंगुर थाने में मिली शिकायत के आधार पर चंदन को गिरफ्तार किया गया है. उसके खिलाफ साइबर अपराध अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज कर जांच की जा रही है."
चंदन की गिरफ्तारी तृणमूल युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शातनु बनर्जी की शिकायत के आधार पर मंगलवार रात को की गई. बुधवार को अदालत में पेश करने के लिए जाते समय तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उसे पुलिस के कब्जे से छुड़ाने का भी नाकाम प्रयास किया.
समर्थकों ने अभियुक्त को अपने हाथों में सौंपने की मांग में सिंगुर थाने के समक्ष प्रदर्शन और नारेबाजी भी की.
तृणमूल कांग्रेस का दावा
तृणमूल युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शातनु बताते हैं,"चंदन ने 28 अक्तूबर को फेसबुक पर एक पोस्ट में महिला मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी. उस दिन उसके बारे में पता नहीं चला. इसलिए अगले दिन यानी 29 अक्तूबर को उसके आवास के बारे में पता चलने पर उसके खिलाफ सिंगुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई".
तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि चंदन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ औऱ भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता है. उसके फेसबुक पेज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ के कार्यक्रमों की तस्वीरें भी हैं.
इससे पहले बीते 17 अक्तूबर को प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सन्मय भट्टाचार्य को साइबर अपराध अधिनियम के तहत उत्तर 24-परगना जिले के सोदपुर से गिरफ्तार किया गया था.
हालांकि तीन दिन बाद पुरुलिया की एक अदालत से उनको जमानत मिली. वह भी जांच में सहयोग करने और हर सप्ताह हाजिरी देने की शर्त पर.
उससे पहले इसी साल मई में ममता बनर्जी का एक कार्टून सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में हावड़ा जिले के महिला भाजपा नेता प्रियंका शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माफी मांगने के बाद ही उनको जेल से रिहाई मिल सकी थी.
और भी हैं ऐसे मामले
वैसे सबसे चर्चित मामला जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र का था.
वर्ष 2012 में सोशलल मीडिया में ममता का एक कार्टून फारवर्ड करने के आरोप में उनोक गिरफ्तार कर लंबे समय तक जेल में रखा गया था. तब तमांम बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने इसकी आलोचना की थी.
बीते साल ममता के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट के लिए त्रिपुरा के ढालाई जिले से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था.
दो साल पहले वर्ष 2017 में सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं की कमी के बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालने पर स्वासथ्य वभाग के कर्मचारी अरुणाचल दत्त चौधरी को निलंबित कर दिया गया था.
उस साल राज्य में बड़े पैमाने पर डेंगू फैला था. ध्यान रहे कि स्वास्थ्य मंत्रालय भी ममता के ही जिम्मे है.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सत्ता में आने और खासकर भाजपा के बंगाल में मजबूत होने के बाद सत्तारुढ़ पार्टी में असहिष्णुता लगातार बढ़ रही है.
कुछ कथित सरकार-विरोधी फिल्मों का प्रदर्शन रोकने के मामले भी कई बार सुर्खियां बटोरते रहे हैं.
लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर चौधरी कहते हैं, "यह सरकार अपनी आलोचना सहन नहीं कर सकती. बीते दिनों सन्मय भट्टाचार्य की गिरफ्तारी से साफ है कि सरकार में शीर्ष स्तर पर असहिष्णुता काफी बढ़ गई है."
कांग्रेस नेता सन्मय भट्ट्चार्य की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र कहते हैं, "अभिव्यक्ति की आजादी पर ऐसा अंकुश उचित नहीं हैं. सरकार और सत्तारुढ़ पार्टी को लचीला रुख अपनाते हुए और ज्यादा सहिष्णुता का परिचय देना चाहिए."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)