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त्रिची: दो साल के सुजीत विल्सन की मौत, डिकंपोज़्ड होने लगा था शरीर
तमिलनाडु के त्रिची शहर के नाडुकाटुपत्ती गांव में बोरवेल में गिरे दो साल के सुजीत विल्सन को जीवित नहीं निकाला जा सका.
एएनआई ने सरकारी अधिकारी जे राधाकृष्णन के हवाले से ख़बर दी है कि बच्चे का शरीर डिकंपोज़्ड होने लगा था. उन्होंने कहा कि बच्चा जिस बोरवेल में गिरा था अब वहां से दुर्गंध आने लगी थी. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
कोयंबटूर से बीबीसी के सहयोगी हरिहरन ने बताया कि बच्चे का शव निकाल लिया गया है. बच्चे का शव उसी बोरवेल से निकाला गया जिसमें वो गिरा था ना कि उस गड्ढे से जो बोरवेल के समानान्तर किया गया था.
कैसे कब क्या हुआ?
यह घटना शुक्रवार की है.
26 फ़ीट की गहराई तक गिरे सुजीत को बचाने के लिए परिवार ने पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी. शाम छह बजे तक उसे बचाने की कोशिशें शुरू हो गईं.
बच्चे को सबसे पहले ऑक्सीजन की सप्लाई दी गई. नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फ़ोर्स (एनडीआरएफ़) ने बच्चे की स्थिति पर नज़र रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे को बोरवेल में उतारा.
सुजीत को बचाने की कोशिश में एनडीआरएफ़ की छह और राज्य डिजास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स की टीमें भी लगी हुई थीं.
हाथ बांधकर खींचने की कोशिश नाकाम
पहले सुजीत के हाथ दिख रहे थे. इसलिए बचावकर्मियों ने उसके हाथों को रस्सी से बांधकर निकालने की कोशिश की जो नाकाम रही.
बाद में, अधिकारियों ने बोरवेल के समानांतर एक गड्ढा खोदने का फ़ैसला लिया. शनिवार मध्यरात्रि तक गड्ढा खोदने वाली मशीन ने काम शुरू कर दिया. 10 फ़ीट की गहराई के बाद से चट्टानें दिखने लगी थीं.
कुछ ही घंटों में पहली मशीन नाकाम हो गई और उसके बाद दूसरी मशीन ने काम शुरू किया गया था.
रविवार देर रात तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री ने भी बचाव कार्य का जायज़ा लिया था.
उन्होंने बताया था कि बचावकर्मियों ने अब तक 35 फ़ीट की खुदाई कर ली है, 45 फ़ीट की खुदाई बाक़ी है. बोरवेल पानी के लिए खुदवाया गया था. पानी न मिलने पर उन्होंने रास्ता बंद कर दिया था. हाल की बारिश के बाद, बोरवेल को ढंकने वाली रेत हटने से बच्चा बोरवेल में गिर गया.
लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद सुजीत विल्सन को ज़िंदा नहीं निकाला जा सका.