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मुर्शिदाबाद ट्रिपल मर्डर के पीछे पैसा विवाद: पुलिस
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) से, बीबीसी हिंदी के लिए.
पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद ज़िले में दशहरे के दिन हुए हत्याकांड के मामले को सुलझा लेने का दावा करते हुए कहा है कि ये हत्याएँ पैसे के विवाद की वजह से हुईं ना कि राजनीतिक या धार्मिक रंजिश से.
मुर्शिदाबाद पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया कि इस सिलसिले में शाहपुर बरला गाँव के एक युवक उत्पल बेहरा को गिरफ़्तार किया गया है जिसे मुख्य अभियुक्त माना जा रहा है.
पिछले दिनों मुर्शिदाबाद में एक परिवार के तीन लोगों - बंधु प्रकाश पाल, उनकी आठ महीने की गर्भवती पत्नी ब्यूटी पाल और सात साल के बेटे आर्य पाल की हत्या कर दी गई थी.
मुर्शिदाबाद के एएसपी मुकेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''बंधु प्रकाश पाल प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने के साथ ही कई तरह की बीमा कंपनियों के साथ काम करते थे. वो एलआइसी, एसबीआई लाइफ़, पीएनबी मेट लाइफ़ की बीमा बेचा करते थे. इसके अलावा वो एक नेटवर्किंग कंपनी ग्रीन क्लोरी से भी जुड़े थे. यह कंपनी लोन उपलब्ध कराती थी. वो शेयर मार्केट और म्युचुअल फंड के बिज़नेस में भी थे. 10 अक्टूबर को रामपुर हाट में स्टॉक गुरु नाम से एक संस्थान भी खोलने वाले थे. इससे दो दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गई.''
पुलिस ने दावा किया है कि इस सिलसिले में उन्होंने अपने गाँव और दूसरे गाँवों के कई लोगों से पैसे लिए थे.
एएसपी मुकेश कुमार ने कहा, ''उन्होंने कुछ लोगों के पैसे ले तो लिए लेकिन अपने पास रख लिए. इस कारण लोगों से उनका मनमुटाव था और उनके ऊपर पैसों की बड़ी देनदारी हो गई थी.''
'पड़ोसियों ने भागते देखा'
एएसपी ने यह भी कहा, ''बंधु प्रकाश पाल ने अपने गाँव शाहपुर-बरला के माधव बेहरा के बेटे उत्पल बेहरा से भी पैसे लिए थे. इसके बावजूद दो किस्तें जमा नहीं कराई. बंधु प्रकाश पाल से बेहरा ने अपने पैसे मांगे. नहीं लौटाने के बाद उन्होंने प्रकाश पाल की हत्या की योजना बनायी.''
एएसपी ने कहा, ''उत्पल को जियागंज में स्थित प्रकाश पाल के घर के लोकेशन की सही जानकारी नहीं थी. वो पाँच अक्टूबर को जियागंज सदर घाट स्थित अपनी बहन के घर गए लेकिन प्रकाश पाल के घर का पता नहीं लगा सका. इसके बाद सात अक्टूबर को भी रेकी की और घर का पता लगा लिया.''
एएसपी ने बताया, ''अगले दिन उत्पल उनके घर गए. बंधु प्रकाश पाल ने दरवाज़ा खोल दिया. इसके तुरंत बाद बंधु प्रकाश पाल की पीछे से वार कर उनकी हत्या कर दी. दूसरे कमरे में उनकी पत्नी ब्यूटी पाल को मारा. अंत में उसने बेटे आर्य पाल की भी हत्या कर दी. इस दौरान बंधु प्रकाश के पड़ोसियों ने उसे भागते हुए देखा था.''
पुलिस का दावा है कि कई ऐसे सबूत मिले हैं जिनके आधार पर उत्पल बेहरा को गिरफ़्तार किया गया. पुलिस का कहना है, ''उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. सदर थाने के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फ़ोन की कॉल डिटेल्स भी देखी गई है.
आरएसएस से जुड़े होने के सबूत नहीं
जियागंज थाने के लेबु बगान इलाक़े में बीते आठ अक्टूबर को शाहपुर बरला गाँव के बंधु प्रकाश पाल, ब्यूटी पाल और आर्य पाल की हत्या कर दी गई थी.
तब पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रमुख दिलीप घोष ने उनके आरएसएस से जुड़े होने की बात कही थी और इसके लिए ममता बनर्जी सरकार को कटघरे में खड़ा किया था.
राज्यपाल ने भी क़ानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल किए थे. कहा गया कि उनकी हत्या सिर्फ़ इसलिए कर दी गई है क्योंकि वो आरएसएस के थे.
मुर्शिदाबाद पुलिस ने दावा किया है कि उसे इस तरह का कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे साबित हो सके कि वे आरएसएस से जुड़े थे.
बंधु प्रकाश पाल के घरवालों ने इस गिरफ़्तारी पर संतोष जताया है. उनकी ममेरी बहन बंधु स्मृति घोष ने बीबीसी से कहा कि वो यह जानकर हैरान रह गईं कि उनके ही गाँव के उत्पल ने उनके दादा की हत्या कर दी.
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