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नोबेल के बाद अभिजीत बोले संकट में है भारत की अर्थव्यवस्था - पाँच बड़ी ख़बरें
भारत में जन्मे अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्टेयर ड्युफ़लो के साथ माइकल क्रेमर को 2019 के अर्थशास्त्र का नोबेल सम्मान दिया गया है.
अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी ड्युफ़लो अमरीका की मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रोफ़ेसर हैं.
नोबेल सम्मान की घोषणा होने के बाद एमआईटी में बनर्जी अपनी पत्नी के साथ पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे.
इसी दौरान उनसे एक पत्रकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि बहुत बुरी स्थिति है.
बनर्जी ने कहा कि भारत में लोग अभावग्रस्तता के कारण उपभोग में कटौती कर रहे हैं और गिरावट जिस तरह से जारी है उससे लगता है कि इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता.
बनर्जी और डुफलो एमआईटी के अर्थशास्त्र विभाग में प्रोफ़ेसर हैं. इन दोनों की शादी 2015 में हुई थी. अभिजीत बनर्जी भारत में भी कई रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब में बनर्जी ने कहा, ''मेरी समझ से भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत बहुत ही ख़राब है. एनएसएस के डेटा देखें तो पता चलता है कि 2014-15 और 2017-18 के बीच शहरी और ग्रामीण भारत के लोगों ने अपने उपभोग में भारी कटौती की है. सालों बाद ऐसा पहली बार हुआ है. यह संकट की शुरुआत है.''
पत्रकार के अनुरोध पर अभिजीत बनर्जी ने सवालों का जवाब अपनी मातृभाषा बांग्ला में भी दिया. उनकी पत्नी ड्युफ़लो फ़्रांस की हैं और उन्होंने भी अंग्रेज़ी के अलावा फ़्रेंच में जवाब दिया.
अभिजीत बनर्जी ने भारत में डेटा संग्रह के तरीक़ों में हुए विवादित बदलाव पर भी बोला. कई लोगों का आरोप है कि भारत सरकार जीडीपी ग्रोथ और राजस्व घाटे का जो डेटा दिखाती है वो असल डेटा नहीं है. ऐसा आरोप मोदी सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम भी लगा चुके हैं. अभिजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार के डेटा पर कई तरह के संदेह हैं.
तुर्की, मलेशिया और चीन से बचेगा पाकिस्तान?
फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF)की फ़्रांस की राजधानी पेरिस में सोमवार को बैठक शुरू हुई है. इस बैठक पाकिस्तान पर रिपोर्ट की समीक्षा हो रही है कि उसने आतंकवाद के वित्तपोषण को लेकर कुछ ठोस किया है या नहीं.
अगर इस बैठक में पाकिस्तान के दावों से एफ़एटीएफ़ संतुष्ट नहीं होता है और कुछ देशों का समर्थन नहीं मिला तो ब्लैकलिस्ट होने का ख़तरा है.
हालांकि चीन, तुर्की और मलेशिया के समर्थन की उम्मीद है और कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट होने से बच जाएगा.
पाकिस्तान एफ़एटीएफ़ की ग्रे लिस्ट में पहले से ही है और इस बार भी इससे बाहर निकलने की कम ही उम्मीद है. पाकिस्तान भारत पर आरोप लगा रहा है कि वो पाकिस्तान को एफ़एटीएफ़ की ब्लैकलिस्ट में डलवाने की हर कोशिश कर रहा है.
पीएम मोदी ने कांग्रेस को चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा विधानसभा के चुनावी प्रचार में बल्लभगढ़ में एक रैली को संबोधित करते हुए अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. पीएम मोदी ने कहा कि सरहद पर सेना की जान जा रही है और कांग्रेस का अनुच्छेद 370 से प्यार ख़त्म नहीं हो रहा.
मोदी ने कहा कि कांग्रेस को अनुच्छेद 370 ख़त्म होने से दुख है लेकिन वो हिम्मत दिखाए और अपने घोषणापत्र में इस बात को शामिल करे कि वो चुनाव जीतने के बाद इसे फिर से बहाल कर देगी.
जाली नोट फिर से आए: NIA
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने कहा है कि भारत में बिल्कुल असली नोट की तरह जाली नोट फिर से आ गए हैं. एनआईए के अनुसार जाली नोटों का मुख्य स्रोत पाकिस्तान है.
सरकार ने 2016 में जब 500 और 1000 के नोटों को अमान्य घोषित करने का फ़ैसला किया था तो तर्क दिया था कि इससे जाली नोट ख़त्म हो जाएंगे.
सोमवार को राज्य पुलिस के आतंक विरोधी दस्तों के राष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस में बोलते हुए एनआईए के इंस्पेक्टर जनरल आलोक मित्तल ने कहा कि जाली नोटों की छपाई में पाकिस्तान मुख्य स्रोत है. मित्तल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की मौजूदगी में यह बात कही.
पाकिस्तान की हालत ख़राब: विश्व बैंक
विश्व बैंक ने कहा है कि पाकिस्तान की आर्थिक सेहत बहुत ख़राब है. विश्व बैंक के अनुसार बढ़ता राजस्व घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पाकिस्तान का आर्थिक संकट ख़त्म नहीं हो रहा है.
इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले 10 महीने में पाकिस्तानी रुपए में 30 फ़ीसदी की गिरावट आई है. पिछले साल 18 अगस्त को पाकिस्तानी रुपया 123.35 पर था जो अब 170 के क़रीब है.
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है. हाल ही में भारत में संपन्न हुए आम चुनाव में क़रीब सात अरब डॉलर खर्च हुए हैं जबकि पाकिस्तान के पास इतना विदेशी मुद्रा भंडार बचा है. निर्यात न के बराबर हो गया है और महंगाई लगातार बढ़ रही है.
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