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छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला, तीन की मौत
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिये
छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में रावघाट रेल परियोजना के ट्रैक निर्माण में लगे डीज़ल टैंकर को माओवादियों द्वारा विस्फोट कर उड़ा दिया गया. घटना में तीन लोगों मारे गए हैं.
मारे जाने वाले सभी लोग रावघाट रेल परियोजना में कार्यरत एक निजी कंपनी के कर्मचारी बताए जा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन के आईजी सुंदरराज पी के अनुसार, "कांकेर के ताड़ोकी इलाक़े के तुमपाल में रावघाट रेल परियोजना के ट्रैक निर्माण में लगे डीज़ल टैंकर को माओवादियों द्वारा विस्फोट कर उड़ा दिया गया. जिसमें तीन लोग मौक़े पर ही मारे गये हैं."
पुलिस के अनुसार इस विस्फोट के तुरंत बाद मौक़े पर उपस्थित सुरक्षा बल के जवानों ने संदिग्ध माओवादियों को घेरते हुये फायरिंग की.
अभी भी मुठभेड़ जारी है.
आसपास के इलाक़े से बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को मौक़े पर रवाना किया गया है.
माओवादी इन दिनों नक्सल आंदोलन के 50 साल पूरे होने पर शहीदी सप्ताह मना रहे हैं.
माओवादियों ने यह हमला ऐसे समय में किया है, जब एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछली सरकार में शुरु की गई रेल परियोजनाओं और कोल खदानों को लेकर यह कहते हुये नाराज़गी जताई थी कि इससे आम जनता को क्या लाभ मिल रहा है, 15 दिनों के भीतर पहले इसकी समीक्षा की जाए.
उत्तर बस्तर के कांकेर और नारायणपुर ज़िले में स्थित रावघाट की पहाड़ियों में लौह अयस्क के छह ब्लॉक हैं, जिनमें 712.48 मिलियन टन लौह अयस्क होने का अनुमान है.
भारत सरकार के उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड यानी सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र ने पहली बार 30 अगस्त, 1983 को रावघाट की लौह अयस्क की खदानों के लिए भारत सरकार को आवेदन दिया था. लेकिन अलग-अलग कारणों से यह आवेदन रद्द होता रहा.
इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने 9 जून, 2003 को 456 मिलियन टन क्षमता वाले एफ ब्लॉक के कोरेगांव की खदान को निजी कंपनी को देने की मंज़ूरी दे दी. हालांकि बाद में 4 जून, 2009 को भारत सरकार ने भिलाई इस्पात संयंत्र को ही पूरे एफ ब्लॉक में खनन का अधिकार सौंप दिया.
इसके अलावा कई बड़ी निजी कंपनियां भी लौह अयस्क के खदानों को हासिल करने में जुटी हुई हैं.
इन्हीं लौह अयस्क की ढुलाई के लिये 235 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का काम चल रहा है.
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