You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ट्रांज़ैक्शन फ़ेल होने पर समस्या न सुलझाई तो आपको हर्जाना देंगे बैंक - प्रेस रिव्यू
आरबीआई ने ऐलान किया है कि लेन-देन के दौरान होने वाली गड़बड़ का निश्चित समय पर समाधान न करने पर बैंक पर पेनल्टी लगेगी.
दि इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को एक समयसीमा तय की है. बैकों को इस अवधि के अंदर फ़ेल हुई ट्रांज़ैक्शन की शिकायत को सुलझाना होगा.
कई बार ऐसा होता है कि पेमेंट या फ़ंड ट्रांसफ़र के दौरान भेजने वाले के ख़ाते से तो पैसा कट जाता है मगर दूसरे के ख़ाते में वह रकम नहीं पहुंचती है.
आरबीआई के ताज़ा दिशानिर्देश कहते हैं कि अगर तय समय के अंदर यह पैसा नहीं पहुंचता है तो बैंक पर प्रति दिन 100 रुपये की पेनल्टी लगेगी.
यह नियम ई-वॉलेट, एटीएम और आईएमपीएस समेत अन्य लेन-देन पर भी लागू है.
एटीएम ट्रांज़ैक्शन पर अगर ग्राहक के खाते से पैसे कट जाएं मगर मशीन से कैश न निकले तो बैंक को पांच दिनों के अंदर यह रकम वापस ख़ाते में डालनी होगी. ऐसा न करने पर बैंक को 100 रुपये प्रतिदिन ग्राहक को देने होंगे.
कोई सामान ख़रीदने पर अगर पैसा कारोबारी के ख़ाते में जमा होने की पुष्टि न हो तो बैंक को पांच दिन में समस्या हल करनी होगी.
इसी तरह आईएमपीएस और यूपीआई के लिए यह समयसीमा एक दिन है. इसके बाद में प्रति दिन 100 रुपये की पेनल्टी लगेगी.
सोशल मीडिया के रेगुलेशन की तैयारी
केंद्र सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट से कहा है कि सोशल मीडिया को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए नियमों का मसौदा तैयार हो गया है.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक केंद्र सरकार ने कहा कि इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स 2018 के ड्राफ़्ट पर विमर्श पूरा हो गया है.
इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस का सहयोग करना होगा.
जस्टिस एम. सत्यनारायणन और एन. सेशासायी को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटस्वामी बाबू ने बताया कि नियमों अधिसूचित करने की प्रक्रिया आख़िरी दौर में है.
माना जा रहा है कि इन नियमों की मदद से पुलिस को सोशल मीडिया कंपनियों से जानकारियां जुटाने में सुविधा होगी.
साथ हों आरक्षित और सामान्य वर्ग के इंटरव्यू
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नौकरियों के लिए सामान्य और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के इंटरव्यू अलग-अलग नहीं लिए जा सकते.
हिंदुस्तान टाइम्स ख़बर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा करना ग़ैरक़ानूनी होगा. कोर्ट ने यह फ़ैसला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के लिए हुए इंटरव्यू को लेकर दिया.
ओबीसी वर्ग में चुने गए उम्मीदवार ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एल नागेश्वर राव और हेमंत रस्तोगी की बेंच ने इंटरव्यू को रद्द कर फिर से करवाने का आदेश दिया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)