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अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए मिलेंगे 20 हजार करोड़
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने धीमी पड़ती अर्थव्यस्था में जान फूंकने के लिए तीसरी बार प्रोत्साहन की घोषणा की है.
निर्यात और रियल स्टेट के लिए 70,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि औद्योगिक उत्पादन और स्थाई निवेश में सुधार के साफ़ संकेत हैं.
शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान निर्यात को बढ़ावा देने और रियल सेक्टर के विकास के लिए कई घोषणाएं कीं.
एक महीने के अंतराल में ये उनका तीसरा प्रेस कांफ्रेंस थी.
पिछले महीने ही वित्त मंत्री ने वाहन ख़रीद को प्रोत्साहित करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने के लिए कई घोषणाएं की थीं.
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी के छह सालों के न्यूनतम स्तर पर पांच प्रतिशत तक लुढ़क जाने के बाद ये घोषणाएं होनी शुरू हुई हैं.
रियल स्टेट और निर्यात के क्षेत्र में सहयोग के लिए वित्त मंत्री ने क्या-क्या घोषणाएं की विस्तार से-
वित्त मंत्री की मुख्य घोषणाएं
- अटके पड़े किफ़ायती और मिडिल क्लास हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक स्पेशल विंडो से मदद दी जाएगी. इसके लिए अलग फंड बनेगा जिसमें सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का योगदान देगी. इतनी ही राशि दूसरे निवेशकों से इकट्ठा की जाएगी. इस तरह इस फंड में 20 हजार करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध होगी.
- इस घोषणा से लगभग 3.5 लाख घर खरीदारों को फ़ायदा मिलेगा. लेकिन, ये फंड उन्हीं हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मिलेगा जो एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट) या एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) के तहत नहीं हैं.
- 45 लाख रुपये तक के घर के लिए 31 मार्च 2020 तक लिए गए ऋणों के ब्याज़ पर डेढ़ लाख रुपये तक की छूट मिलेगी.
- रेपो रोट को ब्याज दरों से जोड़कर आवासीय ऋण पर ईएमआई कम की जाएगी.
- प्रधानमंत्री किफ़ायती आवास योजना के तहत आने वाले घर खरीदारों को फाइनेंस की सुविधा के लिए बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) दिशानिर्देशों में ढील दी जाएगी.
- निर्यात बढ़ाने के लिए दुबई जैसे मेगा शॉपिंग फ़ैस्टिवल की शुरुआत की जाएगी. मार्च में भारत में चार जगहों पर इसका आयोजन होगा.
- निर्यात किए जाने वाले सामानों पर शुल्क में छूट देने की घोषणा की गई.
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तहत निर्यात ऋण के लिए 36,000 करोड़ से 68,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त जारी किए जाएंगे.
- निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरा बढ़ेगा. निर्यात के लिए कर्ज देने वाले बैंकों को ज्यादा इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा. इससे ये फायदा होगा कि बैंकों को ज्यादा सुरक्षा मिलने से वे निर्यातक को ज़्यादा कर्ज देंगे.
- हैंडीक्राफ्ट उद्योग निर्यात के लिए ई-कॉमर्स का इस्तेमाल कर पाएगा. एक्सपोर्ट का समय कम करने के लिए दिसंबर तक विशेष योजना शुरू की जाएगी.
अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार निशाने पर
इन घोषणाओं के दौरान अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमण ने सपाट जवाब दिया.
एक पत्रकार ने पूछा कि अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात को वो क्या मानती हैं- मंदी, सुस्ती या कुछ और?
उनका जवाब था, "मैं यहां नाम देने के लिए नहीं हूं. मैं यहां काम करने के लिए हूं." हालांकि, उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत जीडीपी को वो नज़रअंदाज़ नहीं कर रही हैं.
महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और अर्थव्यवस्था का सवाल राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है.
अभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 'भारत की विकास दर उम्मीद से कहीं कमज़ोर रहने वाली है.'
हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा और इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी को ज़िम्मेदार ठहराया था.
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