शैहला रशीदः राजद्रोह के मामले में गिरफ़्तारी से राहत

दिल्ली पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट की नेता और जेएनयू की पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष शैहला रशीद के ख़िलाफ़ सेडिशन यानी राजद्रोह का मामला दर्ज किया है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की शिकायत पर यह एफ़आईआर दर्ज की गई है. शिकायत में शैहला पर भारतीय सेना के संदर्भ में फ़ेक न्यूज़ फ़ैलाने का आरोप लगाया गया है.

मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शैहला रशीद को गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत दे दी है. इस मामले में अब अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी.

यानी उन्हें इस मामले में पांच नवंबर तक गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा.

शैहला रशीद पर इस मामले में शिकायतकर्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मैंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में ये एफ़आईआर दर्ज कराई है. उन्होंने भारतीय सेना पर झूठे आरोप लगाए थे. उन्होंने इन आरोपों का कोई आधार नहीं बताया था."

"उन्होंने बिना किसी सबूत के काफ़ी संगीन आरोप लगाए थे. उन्होंने अपने ट्वीट्स के ज़रिए देश में दंगा भड़काने की कोशिश की थी. हिंसा को भड़काने की कोशिश की थी. उन्होंने कुछ ऐसे मामलों के बारे में बताया था जो कि कभी हुए ही नहीं. इसके ख़िलाफ़ मैंने शिकायत दर्ज कराई थी."

उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर में आईपीसी सेक्शन 124A (राजद्रोह), 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से भड़काऊ बयान देना), 504 (जानबूझकर शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करना), 505 (अफ़वाह फ़ैलाने) के तहत मामला दर्ज किया गया हैं.

वकील आलेख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने इन ट्वीट्स देखने के बाद ये एफ़आईआर दर्ज कराई है.

शैहला ने जम्‍मू-कश्‍मीर राज्य के विशेष दर्जे को ख़त्म किए जाने को लेकर 18 अगस्‍त को एक के बाद एक कई ट्वीट कर ये आरोप लगाए थे.

इनमें शैहला ने सेना पर आरोप लगाया था कि भारतीय सेना रात में भारत प्रशासित कश्‍मीर के लोगों के घरों में घुसती है, ग़ैर-क़ानूनी रूप से उनके बच्चों को उठाती है, घरों में छानबीन करती है, चावल में तेल मिला देती है.

बीबीसी हिंदी ने इन आरोपों और एफ़आईआर के संबंध में शैहला रशीद का पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन ख़बर लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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