शराब के बाद बिहार में अब पान मसाला भी बैन

    • Author, नीरज सहाय
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार में सरकार ने लगभग तीन साल पहले पूर्ण शराबबंदी की और अब पान मसालों पर प्रतिबंध लगाया है.

यह निर्णय शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया. फ़िलहाल यह प्रतिबंध एक साल की अवधि के लिए लगाया गया है. इसके तहत अब राज्य में पान मसालों की बिक्री, उत्पादन, भंडारण, सेवन और परिवहन को अवैध माना जाएगा.

बिहार की राजधानी पटना के बोरिंग रोड चौराहे पर रमेश गुप्ता की पान-सिगरेट की दुकान है. यही छोटी दुकान इनकी आजीविका का मुख्य साधन है.

कैमरे को दुकान की ओर मोड़ते हुए सरकार के आज के निर्णय पर क़रीब 55 साल के रमेश कहते हैं, "जब सरकार ने फ़ैसला ले लिया है तो उसे मानना ही पड़ेगा."

"पान मसालों के शौक़ीन लोगों की संख्या काफी बड़ी है. सरकार को इससे घाटा होगा. ऐसा पहले भी किया जा चुका है और उसके बावजूद जिन्हें तलब होती है वे गुटखा ढूंढ ही लेते हैं."

अलग-अलग मत

सरकार के फ़ैसले पर कामोबेश यही टिप्पणी शहर के अलग-अलग इलाकों के दुकानदारों की है. उनकी बातों से जाहिर होता है कि वे सरकार इस निर्णय को व्यवहारिक नहीं मान रहे हैं.

हालाँकि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन सरकार के इस फ़ैसले को स्वागत योग्य बताते हैं.

उनके अनुसार, "इस पहल से राज्य में मुंह के कैंसर में काफी कमी आएगी. साथ ही कॉलेज-अस्पताल कार्यालय में हर दिन फैलती गंदगी से भी निजात मिलेगी. गुटखा प्रतिबंधित है, पान मसालों पर प्रतिबंध के बाद सरकार को और संवेदनशीलता दिखानी चाहिये और खैनी पर भी प्रतिबंध लगाये जाने को लेकर गंभीर मंथन करनी चाहिए."

सरकार के इस निर्णय पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार कहते हैं, "बिहार में गुटखा पहले से ही प्रतिबंधित है. आज कुछ पान मसालों पर राज्य भर में प्रतिबंध लगाया गया है."

"बाज़ार में जो पान मसाले बेचे जा रहे हैं उनके सैंपल लैब में लाये गए और जांच की गयी. जिन पान मसालों में प्रतिबंधित केमिकल मैग्नीशियम कार्बोनेट पाए जाने की पुष्टि हुई वैसे पान मसालों के भंडारण, सेवन, बिक्री, उत्पादन और परिवहन पर क़ानून के तहत एक साल के लिए रोक लगा दी गयी है."

"इस अवधि के पूर्व अगर कोई पान मसाला निर्माता कंपनी अपने उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित मापदंड के अनुरूप कर लेती है तो वह अपने उत्पाद फिर से बाज़ार में बेच सकेगी."

कितना सही है फ़ैसला

सरकार के स्वास्थ्य महकमे ने जिन 20 पान मसाला कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है उनमें रजनीगंधा, राज निवास, सुप्रीम, पान पराग, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, कमला पसंद, मधु पान मसाला आदि मुख्य हैं. इन सभी पान मसालों में प्रतिबंधित केमिकल मैग्नीशियम कार्बोनेट पाए गए हैं.

सरकार के इस फ़ैसले पर बिहार चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल कहते हैं, "शराबबंदी से सामाजिक परिस्थिति बदली, लेकिन साथ ही सरकार को राजस्व की हानि हुई और कुछ दूसरे किस्म का धंधा भी पनपा."

"आज के फ़ैसले का प्रभाव कहाँ और कैसा होगा यह भविष्य में देखने की चीज़ है. लेकिन सुनने से लगता है कि यह पहल अनुपयोगी है क्योंकि बिहार में कोई पान मसाला कंपनी है ही नहीं."

"हालाँकि सरकार ने यह जो कदम उठाया है वह बहुत सोच-समझ कर लिया होगा और सामाजिक उत्थान पर केंद्रित होगा."

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