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भारतीय सेना मानवाधिकार को अहम दर्जा देती रही है: रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा
- Author, जुगल पुरोहित
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से भारत प्रशासित कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों पर लोगों की पिटाई और प्रताड़ना करने के आरोप लग रहे हैं. हालांकि सेना ने इससे इनकार किया है.
बीबीसी ने इस बारे में रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा से बात की. हुड्डा को सर्जिकल स्ट्राइक के नायक के तौर पर देखा जाता है.
सितंबर, 2016 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हुए सर्जिकल स्ट्राइक के समय उत्तरी कमान के मुखिया रहे लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा है कि भारतीय सेना मानवाधिकारों के तहत काम करती है.
वे कहते हैं कि अगर सेना के किसी व्यक्ति पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगता है तो उसकी जांच होती है और आरोप साबित होने की स्थिति में व्यक्ति को सज़ा दी जाती है.
उन्होंने कहा, "अगर ये आरोप सही हैं, तो इसमें कोई दो राय नहीं कि ऐसा करना ग़लत है. लेकिन हमें ये भी नहीं सोचना चाहिए कि पूरी भारतीय सेना ही वहां के नागिरकों के साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है. भारतीय सेना की पॉलिसी रही है कि वो मानवाधिकारों को एक अहम दर्जा देती है और यही हमने कश्मीर में भी फॉलो किया है."
वे कहते हैं, "ये मुझे मालूम है कि हर शिकायत चाहे वो ऑफ़िशियल चैनल से आया हो या फिर अनऑफ़िशियल चैनल से, सभी तरह के शिकायत की जांच होती है."
उन्होंने यह भी बताया कि सेना के अलावा पुलिस भी इसकी जांच करती है.
वे कहते हैं, "सिर्फ़ हम नहीं, पुलिस भी जांच करती है. अगर हमें लगता है कि मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ तो सज़ा दी जाती है."
वे बताते हैं, "ऐसे कई सैनिक हैं जिन्हें इसके तहत सज़ा दी गई है. एक बात और बोलना चाहता हूं कि इतनी शिकायतें आती हैं जिनमें से 90 फ़ीसदी शिकायतें ग़लत और प्रेरित होती हैं ये भी एक फैक्ट है."
संवैधानिक स्वायत्तता ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों पर पिटाई और प्रताड़ना के आरोप लग रहे हैं.
कई गाँववालों ने बीबीसी को बताया है कि उन्हें डंडों और केबल से पीटा गया और बिजली के झटके दिए गए.
कई गांव वालों ने मुझे अपने घाव दिखाए. लेकिन भारतीय सेना ने इन आरोपों को 'आधारहीन और अप्रमाणित' बताया है.
संवैधानिक स्वायत्तता ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों पर पिटाई और प्रताड़ना के आरोप लग रहे हैं. कई गाँववालों ने बीबीसी को बताया है कि उन्हें डंडों और केबल से पीटा गया और बिजली के झटके दिए गए. लेकिन बीबीसी इन आरोपों की पुष्टि अधिकारियों से नहीं कर पाया है.
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