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अरुण जेटली के ये थे आख़िरी ट्वीट्स
बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया.
अरुण जेटली बीते कुछ दिनों से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे.
जेटली कई बीमारियों से पीड़ित थे और इसी वजह से उन्होंने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में दूसरी बार बनी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया था.
अरुण जेटली की गिनती भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं में होती थी जो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं. वो कई मुद्दों पर ब्लॉग लिखते थे. सक्रिय राजनीति से दूर होने के बाद भी ट्विटर के माध्यम से वो राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते थे.
अपने आख़िरी ट्वीट में अरुण जेटली ने तुलसीदास जयंती पर उनको नमन किया था. उन्होंने ये ट्वीट बीती 7 अगस्त को किया था. यानी एम्स में दाखिल होने के दो दिन पहले उन्होंने आखिरी ट्वीट किया था.
इससे पहले उन्होंने बीजेपी नेता सुषमा स्वराज की मृत्यु पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की थी. सुषमा स्वराज का निधन छह अगस्त को हुआ था.
उन्होंने लिखा था, "सुषमा जी की मौत से में बहुत दुखी हूं. वह मौजूदा समय की सबसे शानदार राजनेता थीं. उन्होंने हर एक पद पर शानदार काम किया. उन्होंने पार्टी, एनडीए सरकार, और विपक्ष में रहते हुए वरिष्ठ पदों पर काम किया. उनके जाने से जो जगह खाली हुई है उसे भरना आसान नहीं है."
इससे पहले छह अगस्त को ही किए एक ट्वीट में अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के फ़ैसले को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी थी. उन्होंने इस मुद्दे पर एक ब्लॉग भी लिखा था और उसका लिंक ट्विटर पर जारी किया था.
उन्होंने लिखा था, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री ने नई कश्मीर नीति पर असंभव स्थिति को प्राप्त कर लिया है. मैंने अपने ब्लॉग में इस फ़ैसले का विश्लेषण किया कि इसके क्या परिणाम सामने आएंगे और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के असफल प्रयासों की फेहरस्ति क्या है."
"पिछले सात दशकों के जम्मू-कश्मीर के इतिहास से पता चलता है कि इस अलग दर्जे के रास्ते पर चलकर अलगाववाद सामने आया है, न कि एकीकरण. इसकी वजह से लोगों के मन में अलगाववादी विचार पनपे."
बीते काफ़ी समय से थे बीमार
इस साल की शुरुआत में अरुण जेटली इलाज के लिए देश से बाहर गए थे जिसके कारण वह अंतरिम बजट पेश नहीं कर पाए थे.
मई में बीजेपी की दोबारा सरकार बनने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि वह स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में कोई ज़िम्मेदारी नहीं चाहते हैं.
उन्होंने पत्र में लिखा था कि बीते 18 महीनों से उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिसके कारण वह कोई पद नहीं लेना चाहते हैं.
वकालत से राजनीति में आए जेटली बीजेपी के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं. वह दिल्ली एवं ज़िला क्रिकेट संघ डीडीसीए के अध्यक्ष भी रहे और अभी राज्यसभा सांसद थे.
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