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चिदंबरम होंगे सीबीआई अदालत में पेश, क्या होगा आगे?
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को बड़े नाटकीय तरीक़े से बुधवार रात गिरफ़्तार कर लिया और दिल्ली के लोदी कॉलोनी स्थित मुख्यालय ले गई. उन्हें गुरुवार दोपहर को सीबीआई की अदालत के सामने पेश किया जाएगा. ऐसी ख़बरें हैं कि सीबीआई उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को भी पूछताछ में शामिल कर सकती है.
कार्ति चिदंबरम ने अपने पिता की गिरफ़्तारी को राजनीति से प्रेरित क़रार दिया है. चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए कार्ति ने कहा कि कुछ ख़ास लोगों को ख़ुश करने के लिए उनके पिता को गिरफ़्तार किया गया है.
उन्होंने कहा, "ये पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित मामला है. ये साल 2008 का मामला है जिस पर 2017 में एफ़आईआर दर्ज की गई थी. इस मामले में ख़ुद मुझ पर सीबीआई ने चार बार छापा मारा था. मैं एजेंसियों के सामने 20 बार पेश हो चुका हूं और हर बार कम से कम 10 घंटे तक मुझ से पूछताछ हुई थी. मैं सीबीआई के पास 11 दिनों तक रहा था. "
"एक ऐसा मामला जो 2008 में हुआ और जिसके लिए 2017 में एफ़आरआई दर्ज की गई, और अगस्त 2019 में भी उस बारे में चार्जशीट नहीं दाख़िल की जा सकी है, इसका मतलब साफ़ है कि ये कोई केस ही नहीं है. सिर्फ़ कुछ लोगों को ख़ुश करने के लिए ये पूरा नाटक और तमाशा किया जा रहा है. गंभीर मुद्दों से भारत के लोगों का ध्यान हटाने के लिए ये सबकुछ किया जा रहा है. ये पूरी तरह से मनगढ़ंत मामला है जिसे टीवी और मीडिया के लिए किया जा रहा है."
बुधवार देर शाम बहुत ही ड्रामाई अंदाज़ में सीबीआई ने चिदंबरम के दिल्ली स्थित घर से उन्हें गिरफ़्तार किया. उन पर आईएनएक्स मीडिया केस में भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप हैं.
कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से चिदंबरम के समर्थन में खड़ी दिख रही है. बुधवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने उनके समर्थन में ट्वीट किया था. गिरफ़्तारी के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया कि बीजेपी के हाथों लोकतंत्र मर चुकी है.
लेकिन बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी शुरू से ही इस मामले में चिदंबरम को दोषी मानते रहे हैं. बुधवार को चिदंबरम की गिरफ़्तारी से पहले उन्होंने ट्वीट किया कि चिदंबरम को भगोड़ा घोषित करते हुए उनकी सारी संपत्ति ज़ब्त कर लेनी चाहिए.
चिदंबरम की गिरफ़्तारी के बाद बीजेपी आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें अप्रैल 2019 में नरेंद्र मोदी एक चुनावी रैली के दौरान कह रहे थे कि ''जिन्होंने देश को लूटा है, उनको पाई-पाई लौटानी पड़ेगी.''
उसी वीडियो में मोदी कह रहे हैं कि वो कैसे उन कथित भ्रष्ट लोगों को जेल के दरवाज़े तक ले आए हैं और अगर उन्हें एक और मौक़ा मिले तो ये सब लोग जेल में होंगे.
लेकिन सीबीआई ने जिस तरह से चिदंबरम को गिरफ़्तार किया उसको लेकर भी कई आवाज़ें उठ रही हैं. सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक एनके सिंह के अनुसार इस तरह से चिदंबरम को गिरफ़्तार किया जाना सीबीआई की ज़्यादती है.
बीबीसी से बातचीत करते हुए एनके सिंह ने कहा, ''ये बात सही है कि क़ानून की नज़र में सब बराबर है. लेकिन केस को देखना पड़ेगा कि केस है क्या. केस बहुत पुराना है. 10 साल के बाद 2017 में केस रजिस्टर किया गया. इंद्राणी मुखर्जी जो ख़ुद अपनी लड़की की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चल रहा है. वो इस केस में सीबीआई के कहने पर सरकारी गवाह बन जाती हैं और उनके बयान पर चिदंबरम के ख़िलाफ़ इस मामले की जांच हो रही है. जांच को पूरा किया जाता, अदालत के सामने रखा जाता. ये जो अभियोग है उसकी गंभीरता को देखते हुए. पुराना मामला है और इसका जो आधार है उन सारी बातों को देखते हुए मुझे तो लगता है कि ये सीबीआई का ऐक्सेसिव एक्शन यानी अत्यधिक कार्रवाई है.''
लेकिन सीबीआई ज़्यादती क्यों करेगी इस सवाल के जवाब में एनके सिंह कहते हैं कि उन्हें ज़रा भी संदेह नहीं है कि अगर सीबीआई अपने मन से स्वच्छंद रूप से काम करेगी तो ऐसा नहीं करेगी. एनके सिंह कहते हैं कि वो ख़ुद भी नहीं समझ पा रहें हैं कि आख़िर सीबीआई ने ऐसा क्यों किया.
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी भी सीबीआई के क़दम को संदेह की नज़र से देखते हुए कहती हैं कि सीबीआई को 36 घंटे रुकने में आख़िर क्या परेशानी थी, समझ में नहीं आ रहा है. सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत की याचिका पर सुनवाई करने वाली थी. नीरजा कहती हैं कि सीबीआई अभी तक चार्जशीट भी फ़ाइल नहीं कर सकी है, अदालत में भी मामला आठ महीने से लटका हुआ था, फिर अचानक सबकुछ तेज़ी से होने लगता है.
नीरजा इस केस के राजनीतिक पहलू की तरफ़ इशारा करते हुए कहती हैं, ''एक सवाल उठता है मन में कि क्या कोई संदेश देने की कोशिश की जा रही है या फिर सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ़ से छवि की लड़ाई लड़ी जा रही है. क्योंकि नरेंद्र मोदी ने बार-बार चुनावी अभियान में कहा था कि ये लोग सलाखों के पीछे होंगे.''
नीरजा चौधरी के अनुसार ये मामला अब पूरी तरह राजनीतिक बन गया है. उनके अनुसार मोदी जनता को संदेश देना चाहते हैं कि वो ताक़तवर से ताक़तवर लोगों को जेल भेज सकते हैं. नीरजा के अनुसार कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कह रही है क्योंकि चिदंबरम मोदी सरकार पर हमले कर रहे थे और ख़ुद बीजेपी से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ जो भ्रष्टाचार के मामले हैं उनमें तो सीबीआई कभी भी उस तेज़ी से काम नहीं करती है. दूसरी तरफ़ मोदी और अमित शाह लोगों को ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मज़बूती से लड़ाई लड़ेगी, सरकार मज़बूत है उसने अनुच्छेद 370 और 35ए भी हटा दिया. नीरजा के अनुसार अब इस मामले में असली लड़ाई क़ानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक है.
ड्रामाई अंदाज़ में गिरफ़्तारी
मंगलवार (20 अगस्त) को दिल्ली हाई कोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत की याचिका को ख़ारिज कर दिया था. आईएनएक्स मीडिया से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अभियुक्त बनाए गए चिदंबरम ने अग्रिम ज़मानत के लिए हाई कोर्ट में अपील की थी. अपील ख़ारिज होने के बाद चिदंबरम के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फ़ैसला किया. सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को बुधवार को उपयुक्त बेंच के सामने ले जाने को कहा
लेकिन इसी बीच सीबीआई और ईडी मंगलवार देर रात उनके घर पहुंची. चिदंबरम घर पर नहीं थे तब सीबीआई ने उनके घर पर नोटिस लगा दिया और दो घंटे के अंदर हाज़िर होने को कहा. बुधवार को दिन भर ये ख़बर चलती रही कि चिदंबरम लापता हैं और सीबीआई उनकी तलाश कर रही है. बुधवार दिनभर चिदंबरम के वकील सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अपील करते रहे लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई ख़ास राहत नहीं मिली.
आख़िरकार बुधवार शाम पांच बजे के क़रीब सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम की अपील स्वीकार तो कर ली लेकिन शुक्रवार को इस पर सुनवाई करने का फ़ैसला किया. अब सबके सामने यही सवाल था कि सीबीआई शुक्रवार तक इंतज़ार करेगी या उन्हें गिरफ़्तार करने की कोशिश जारी रखेगी. इस बीच किसी को ख़बर नहीं थी कि चिदंबरम कहां हैं.
अचानक क़रीब आठ बजे शाम चिदंबरम कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे. इस केस में उनके वकील और पार्टी के सहयोगी कपिल सिब्बल, सलमान ख़ुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी भी कांग्रेस दफ़्तर में उनके साथ थे. चिदंबरम ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वो क़ानून से भागे नहीं हैं बल्कि अपने हितों की रक्षा के लिए क़ानून की शरण में गए हैं.
अपने छोटे से बयान पढ़ने के बाद पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब दिए बग़ैर चिदंबरम अपने घर चले गए. उनके घर पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद सीबीआई की टीम उनके घर पहुंच गई. घर का दरवाज़ा बंद था. सीबीआई के अधिकारी घर का दरवाज़ा फांदकर घर में दाख़िल हुए और चिदंबरम को लेकर सीबीआई मुख्यालय चले गए. वहीं उनका मेडिकल कराया गया और फिर सीबीआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर गिरफ़्तार कर लिया.
अब आगे क्या ?
गुरुवार क़रीब दो बजे दिन में सीबीआई की विशेष अदालत में चिदंबरम को पेश किया जाएगा. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की याचिका पर जो सुनवाई होनी थी अब उसके कोई मायने नहीं हैं क्योंकि चिदंबरम आधिकारिक तौर पर गिरफ़्तार हो चुके हैं. सीबीआई अदालत से चिदंबरम की कस्टडी की ये कहते हुए मांग करेगी कि उन्हें चिदंबरम से कई अहम पूछताछ करनी है.
दूसरी तरफ़ चिदंबरम के वकील सीबीआई की उसी अदालत में रेगुलर ज़मानत की अपील करेंगे. अगर उन्हें उसी अदालत से ज़मानत मिल जाती है तो चिदंबरम फ़ौरन रिहा हो जाएंगे लेकिन अगर उनकी ज़मानत ख़ारिज होती है तो फिर उनके वकीलों को दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ेगा जिसने उनकी अग्रिम ज़मानत की अपील ख़ारिज कर दी थी.
क्या है आईएनएक्स मीडिया मामला
सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ 15 मई, 2017 को एक एफ़आईआर दर्ज की थी.
आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फ़ंड लेने के लिए फ़ॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) की मंज़ूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं.
जब साल 2007 के दौरान कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री हुआ करते थे.
चिदंबरम तब जांच एजेंसियों के रडार पर आए जब आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी से ईडी ने पूछताछ की.
ईडी ने इस संबंध में 2018 में मनी लांड्रिंग का एक मामला भी दर्ज किया था.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने अपने आरोप पत्र में लिखा है, "इंद्राणी मुखर्जी ने जांच अधिकारियों को बताया कि चिदंबरम ने एफ़आईपीबी मंज़ूरी के बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेशी धन के मामले में मदद करने की बात कही थी."
सीबीआई ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को फ़रवरी 2018 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया था.
उनके ख़िलाफ़ ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ संभावित जांच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी. बाद में कार्ति चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.
सीबीआई का कहना है कि आईएनएक्स मीडिया की पूर्व डायरेक्टर इंद्राणी मुखर्जी ने उनसे पूछताछ में कहा कि कार्ति ने पैसों की मांग की थी.
जांच एजेंसी के मुताबिक़ ये सौदा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में तय हुआ था.
इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में हैं.
एयरसेल-मैक्सिस सौदे में भी है नाम
केंद्रीय जांच एजेंसी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है.
साल 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. इस मामले में रज़ामंदी देने को लेकर चिदंबरम पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है.
वो 2006 में हुए इस सौदे के वक़्त पहली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. 2जी से जुड़े इस केस में चिदंबरम और उनके परिवार पर हवाला मामले में केस दर्ज है.
आरोप है कि विदेशी निवेश को स्वीकृति देने की वित्त मंत्री की सीमा महज़ 600 करोड़ है फिर भी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस डील को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की इजाज़त के बिना पास कर दिया गया.
लेकिन पी चिदंबरम ने हमेशा अपने और अपने बेटे के ख़िलाफ़ सभी इल्ज़ामों को ख़ारिज किया है. उनके अनुसार उनके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं.
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