ऑर्डनेंस फैक्ट्री: हड़ताल पर क्यों हैं हथियार फैक्ट्रियों के कर्मचारी

    • Author, संजीव चौधरी
    • पदनाम, जबलपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

देश की 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के लगभग 80,000 कर्मचारी मंगलवार से एक महीने की हड़ताल पर चले गए हैं.

ये कर्मचारी डिफेंस फैक्ट्री जिन्हें आयुध निर्माणी भी कहते हैं, के निगमीकरण या सार्वजनिक उपक्रम बनाए जाने के विरोध में हड़ताल पर गए हैं.

मध्य प्रदेश के जबलपुर में चार आयुध निर्माणी फैक्ट्रियां हैं ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया, गन कैरिज फैक्ट्री, व्हीकल फैक्ट्री, ग्रे आयरन फाउंड्री के नाम से जाना जाता है.

जबलपुर की इन चारों फैक्ट्री के लगभग 12,000 कर्मचारी मंगलवार से शुरू हुई इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.

इस हड़ताल में ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलॉइज फेडरेशन, इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ एक साथ हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े भारतीय मजदूर संघ का ही एक अंग है.

क्या कहती है सरकार

कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार का कहना है कि ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों निजीकरण नहीं किया जा रहा है और न ही कामगरों की नौकरी की सुरक्षा पर कोई ख़तरा है.

सरकार ये कह रही है कि ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों का निगमीकरण किए जाने का प्रस्ताव है. लंबे समय में देश भर में फैले 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों की उत्पादकता और कर्मचारियों की क्षमता में सुधार के इरादे से ये कदम उठाया जा रहा है.

लेकिन कर्मचारी यूनियन सरकार की दलील से सहमत नहीं दिखते.

इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण दुबे का कहते हैं, "रक्षा मंत्री सुरक्षा संस्थान के कर्मचारियों के साथ देश को भी गुमराह कर रहे हैं. यह सुरक्षा संस्थान पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन थे, अब इनको कॉर्पोरेशन बनाया जा रहा है."

"पहले इन्हें कॉर्पोरेशन बनाएंगे फिर इनका निजीकरण करेंगे, उनकी रणनीति हमें पता है. यहां के कर्मचारियों और यहां के नौजवानों का भविष्य संकट में है इसलिए हम लोग हड़ताल कर रहे हैं."

मंगलवार से शुरू हुई हड़ताल पर आयुध निर्माणी बोर्ड, कोलकाता के महानिदेशक और अध्यक्ष सौरभ कुमार ने एक बयान जारी कर कहा, "भारत सरकार की प्रस्तावित कॉर्पोरेटाइज़ेशन नीति का उद्देश्य कर्मचारियों के रोज़ाना के कामकाज में अधिक लचीलापन लाना, निर्णय लेने की स्वायत्तता और कामकाज से जुड़े फ़ैसलों में स्वतंत्रता देना है. ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके."

जबलपुर में हड़ताल

जबलपुर पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है लेकिन इसका हड़ताल पर कोई असर नहीं दिख रहा है.

ये पहली बार देखने में आया है कि कर्मचारी अपने घरों से ही काम के लिए नहीं निकले.

इस हड़ताल के विषय में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के जॉइन्ट जनरल मैनेजर अजय राय ने बताया, "फैक्ट्रियों में ग्रुप-ए के अधिकारी ही पुलिस की सुरक्षा में प्रवेश कर पाए हैं बाकी अन्य कर्मचारी अनुपस्थित है."

हड़ताल के विषय में अजय राय का कहना है कि ये पॉलिसी डिसीजन है और मंत्रालय स्तर पर बात की जा रही है जो निर्देश होंगे उनका पालन किया जाएगा.

जीसीएफ इंटक के प्रेसिडेंट संजय सिंह का कहना है कि ऑल इंडिया लेवल पर 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में हड़ताल पूरी तरह सफल रही है. कल से आज बेहतर स्थिति है क्योंकि उपस्थिति शून्य है. फैक्ट्री के अंदर कोई भी कर्मचारी नहीं गया है. केवल क्लास वन ऑफ़िसर ही गए हैं और कर्मचारियों की उपस्थिति शून्य है. इस फैक्ट्री में लगभग 2600 कर्मचारी हैं.

जबलपुर की अहमियत

सामरिक दृष्टि से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में जबलपुर की ख़ास अहमियत है.

जबलपुर की विभिन्न ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में 155 एमएम धनुष तोप, एसॉल्ट राइफल, सेना के लिए लड़ाकू वाहन बनाए जाते हैं.

इसी तरह 150 तरह के अन्य हथियार और गोला बारूद बनने का काम हड़ताल के कारण रुक गया है.

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के मंत्री राम प्रवेश सिंह का कहना है, "जबलपुर में कुल मिलाकर चार ऑर्डनेंस फैक्ट्री हैं जिसमें जीसीएफ में धनुष तोप का निर्माण होता है. खमरिया में हर तरीके के गोला बारूद का निर्माण होता है. व्हीकल फैक्ट्री में सेना के लिए महत्वपूर्ण वाहन बनाते हैं और जीआईएफ एक सपोर्टिंग फैक्ट्री है. यदि ये हड़ताल एक महीने तक खींची तो सेना को इसकी सप्लाई में कमी पड़ेगी. जैसे हम गन बनाते हैं और खमरिया में गोलाबारूद का उत्पादन होता है, यदि वह समय पर ना पहुंचे तो वर्तमान परिस्थितियां जैसी चल रही हैं, वैसी स्थिति में देश की रक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

निगमीकरण के सवाल पर राम प्रवेश सिंह का कहना है कि पूर्व के अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं जैसे बीएसएनएल का सवाल हो या जिनका भी निगमीकरण हुआ हो. निगमीकरण की जो प्रक्रिया है वह निजीकरण की तरफ ले जाने वाली है और यदि निगमीकरण हुआ तो कर्मचारियों को काम नही मिलेगा. इससे कर्मचारियों का नुक़सान तो होगा ही देश के रक्षा उत्पादन का काम भी बाधित होगा.

ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड

देश भर में चंडीगढ़ में एक, उत्तराखंड में दो, उत्तर प्रदेश में नौ, बिहार में एक, मध्य प्रदेश में 6, पश्चिम बंगाल में चार, ओडिशा में एक, तेलंगाना में एक, महाराष्ट्र में 10 और तमिलनाडु में छह रक्षा उत्पादन इकाइयां हैं.

भारत की 40 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड संचालित करता है. इसका मुख्यालय कोलकाता में है. बोर्ड को 200 सालों का अनुभव है जो रक्षा उत्पादन, टेस्टिंग, परिवहन, शोध और विकास का कार्य करता है.

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