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कश्मीर: स्कूल तो खुल गए अब क्या है रणनीति?
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में मंगलवार को कर्फ़्यू का 17वां दिन है और यहां एक ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जो लगातार एक सी ही बनी हुई है.
रोज़ाना शाम को जम्मू-कश्मीर का प्रशासन प्रेस कॉन्फ़्रेंस करता है और कल शाम सोमवार को भी हम प्रेस कॉन्फ़्रेंस में थे. कल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस बहुत थोड़ी देर के लिए हुई और उसमें भी पत्रकारों के सवाल नहीं लिए गए.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह भी कहा गया कि कुल मिलाकर हालात सामान्य हैं और कहीं-कहीं कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों पर पथराव करते हैं जिनसे स्थानीय स्तर पर ही निपटा जाता है.
कल कश्मीर में पांचवीं कक्षा तक स्कूल खोले गए थे. इस पर प्रशासन ने जानकारी दी कि कुछ स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 30 से 50 फ़ीसदी रही लेकिन कुल मिलाकर अधिकतर स्कूलों में बच्चे नहीं आए.
मंगलवार को प्रशासन ने आठवीं क्लास तक के स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकि अब इसे बुधवार से खोला जा रहा है.
शिक्षकों और छात्रों के स्कूलों तक न पहुंचने की एक वजह अधितकर जगहों पर सख़्त नाकेबंदी भी है. श्रीनगर के अलावा दक्षिणी कश्मीर के शोपियां, कुलगाम, बिजबेहड़ा में और बांदीपुरा, बारामुला, कुलगाम, सोपोर में सख़्त पाबंदियां हैं.
सरकार की पूरी कोशिश है कि स्कूल पूरी तरह से चालू हों लेकिन छात्रों के परिजन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं. वह चाहते हैं कि पहले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.
कर्फ़्यू में ढील नज़र आ रही है?
प्रशासन ने आदेश दिए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को किसी भी हालत में दफ़्तरों में पहुंचना है तो वह अपनी और रिश्तेदारों की गाड़ियों में दफ़्तर जाते हैं. इसके अलावा अगर कोई बीमार है तो वह भी अपनी गाड़ियों में अस्पताल तक जाता है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन बिलकुल बंद है.
इस तरह का ट्रैफ़िक सड़कों पर नज़र आता है. साथ ही कई जगहों पर सुरक्षा के नाम पर एक ओर की सड़क बंद रहती है जिसके कारण दोनों और का ट्रैफ़िक केवल एक ही सड़क पर चलता है.
आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हर नाके पर रोककर पहचान पत्र मांगा जाता है और पहचान पत्र न हो तो कर्फ़्यू पास मांगा जाता है.
पाबंदियों का सिलसिला बरक़रार है लेकिन कहा जाता है कि प्रशासन ने कर्फ़्यू में ढील दी है. कल ही प्रशासन ने पत्रकारों के लिए नए कर्फ़्यू पास जारी किए हैं लेकिन उन पर समाप्त होने की कोई तारीख़ नहीं है. इसका मतलब है कि कर्फ़्यू लंबा खिंच सकता है.
लोगों को ज़रूरतों का सामान कैसे मिल रहा है?
रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने के लिए लोगों को बहुत दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है क्योंकि बस्तियों के अंदर दूध, ब्रेड और सब्ज़ियों की दुकानें खुल रही हैं.
श्रीनगर में दो जगह पर सब्ज़ियों की मंडी है जहां सुबह 4 बजे से 8 बजे तक दुकानदार सब्ज़ियां ख़रीदते हैं लेकिन दिन निकलने के बाद हर बाज़ार और मंडी में सन्नाटा छा जाता है.
कई जगहों पर एंबुलेंस पर भी पथराव हुआ है जिसके बाद सबसे बड़े अस्पताल शेरे कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ ने आम लोगों और सुरक्षाबलों से अपील की है कि वह एंबुलेंस को न ही रोकें और न ही उसे नुक़सान पहुंचाएं.
इन एंबुलेंस में अस्पताल के लोग होते हैं जो आपातकालीन सेवाएं दे रहे होते हैं.
कहां हो रहे हैं पथराव
शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग में स्थानीय स्तर पर कई पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुईं. जिसके बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि हर शाम छापेमारी कर संदिग्ध पत्थरबाज़ों को गिरफ़्तार किया जाता है और फिर उसके विरोध में दिन में प्रदर्शन होते हैं.
वहीं, श्रीनगर का सौरा इलाक़ा प्रदर्शनों को लेकर काफ़ी तेज़ी से उभरा है क्योंकि यह इलाक़ा अस्पताल के रास्ते में पड़ता है और वहां रोज़ाना प्रदर्शन हो रहे हैं.
सरकार ने शुरू में नेताओं समेत अलगाववादियों को हिरासत में लिया था. इसके बाद उन्होंने दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं को भी गिरफ़्तार किया.
पुलिस प्रशासन का कहना है कि अब वह प्रदर्शन आयोजन करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी और फिर उसके बाद चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी.
साथ ही पुलिस ऐसे इमाम और मौलानाओं पर भी नज़र रख रही है जो अपनी तकरीर में भड़काऊ बातें करते हैं. यह प्रशासन की एक लंबी नीति है क्योंकि गतिरोध बना हुआ है. कई जगहों से कर्फ़्यू हटा भी दिया गया है लेकिन तब भी दुकानें नहीं खुल रही हैं और लोगों में ख़ौफ़ है.
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