You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हरियाणा: हुड्डा के हवाले होगी कांग्रेस या बनाएंगे नई पार्टी
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा अपनी ही पार्टी से बाग़ी हो गए हैं.
उनका कहना है कि हरियाणा कांग्रेस में सब कुछ "ठीक नहीं चल रहा है." क़यास लगाए जा रहे थे कि वो अपनी नई पार्टी की घोषणा करेंगे और रोहतक में एक बड़ी रैली कर उन्होंने रविवार को पार्टी हाई-कमान के सामने एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी कर डाला.
हुड्डा के मंच पर कांग्रेस के 16 में से 13 विधायक मौजूद थे.
बाग़ी होने का सबसे पहला संकेत हुड्डा ने तब दिया जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने का खुलकर समर्थन किया जबकि उनकी पार्टी का हाई कमान इसका विरोध कर रहा है.
बीबीसी से बात करते हुए हुड्डा कहते हैं कि सिर्फ़ रैली ही नहीं, उन्होंने और उनकी पार्टी के विधायकों ने राज्य की विधानसभा में भी केंद्र सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया था.
उनका कहना था, "जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लगाया गया था तब उसका औचित्य था. मगर इतने सालों के बाद अब इसका कोई औचित्य नहीं है."
हुड्डा अपनी पार्टी लाइन से अलग बोल रहे हैं. उन्होंने रैली में भी अपनी ही पार्टी की कमियों को गिनवाना शुरू कर दिया.
हालांकि हरियाणा कांग्रेस में आपसी खींचातान काफ़ी लंबे समय से जारी है और प्रदेश के नेता समय-समय पर दिल्ली में पार्टी हाई कमान से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराते रहते हैं.
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पर राहुल गांधी को काफ़ी भरोसा था. अब जब पार्टी की कमान एक बार फिर से सोनिया गांधी के हाथों में आई है, हुड्डा के क़रीबी माने जाने वाले नेताओं को लगता है कि शायद अब हरियाणा कांग्रेस में उथल-पुथल होगी.
ख़राब प्रदर्शन
हरियाणा में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा और हाल में हुए आम चुनावों में उसे एक भी सीट नहीं मिल पाई.
हरियाणा की राजनीति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि इतनी बड़ी रैली आयोजित कर हुड्डा ने कांग्रेस हाई-कमान को ये संदेश भी देने की कोशिश की कि वो आज भी हरियाणा में पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और दूसरों के मुक़ाबले उनका राजनीतिक कद काफ़ी ऊंचा है.
हरियाणा कांग्रेस की चर्चा करते हुए उन्होंने बीबीसी से कहा कि पिछले कई सालों से पार्टी का सांगठनिक ढांचा कमज़ोर होता चला गया और किसी ने भी इसे मज़बूत करने के लिए कुछ नहीं किया. उनका संकेत कांग्रेस वर्किंग कमिटी के बड़े नेताओं की तरफ़ था.
कांग्रेस छोड़ेंगे हुड्डा?
हुड्डा कहते हैं, "संगठन तो कहीं है ही नहीं. कोई ढांचा नहीं है. प्रदेश स्तर पर नेता बड़ी-बड़ी बातें भले ही कर लें लेकिन सच तो ये है कि कांग्रेस का संगठन न तो ज़िला स्तर पर है और ना ही प्रखंड स्तर पर. ऐसे कहीं चुनाव लड़ा जाता है?"
उनका दावा है कि राज्य सरकार की 'ग़लत नीतियों' के ख़िलाफ़ अगर किसी ने आवाज़ उठाई, तो वो सिर्फ उन्होंने ही, यानी हुड्डा ने ही और वो भी सिर्फ अपने दम पर.
वैसे पार्टी छोड़ने की बात पर वो कहते हैं कि अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं किया है बल्कि 25 लोगों की एक समिति बनाई है, जिसमें 13 विधायक हैं और बाक़ी के वरिष्ठ नेता हैं जो जनता के बीच जाकर पूछेंगे तब ये फ़ैसला किया जाएगा कि उन्हें अलग पार्टी बनाने की ज़रूरत है या नहीं.
वो कहते हैं, "पार्टी छोड़ना कोई छोटा फ़ैसला नहीं है. ये एक बड़ा क़दम है इसलिए सबकी रायशुमारी ज़रूरी है. इसलिए हमने 25 नेताओं की एक समिति बनाई है जो आम लोगों से बात करेगी. इसके बाद देखा जाएगा."
हरियाणा में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब कांग्रेस के किसी बड़े कद्दावर नेता ने पार्टी से बग़ावत की हो. वर्ष 1971 में चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस से बग़ावत कर लोक दल की स्थापना की थी. फिर बंसी लाल ने भी ऐसा ही किया.
बातचीत में भूपिंदर हुड्डा ने ये नहीं बताया कि वो ख़ुद की अलग पार्टी बनाएंगे या दूसरी किसी मौजूदा पार्टी में शामिल होंगे.
पूछे जाने पर वो कहते हैं, "ये एक काल्पनिक सवाल है. अभी कोई ऐसी बात नहीं है. जब वक़्त आएगा तो सब कुछ साफ़ हो जाएगा."
लेकिन हुड्डा के बग़ावती तेवर ने हरियाणा में अटकलों का बाज़ार ज़रूर गर्म कर दिया है. अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि वो भारतीय जनता पार्टी में भी शामिल हो सकते हैं.
मगर हरियाणा भाजपा ने साफ़ किया है कि 'फ़िलहाल ऐसी कोई गुंजाइश नहीं है.'
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)