You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अजीत डोभाल कश्मीरियों से क्या कह रहे थे: प्रेस रिव्यू
"सब कुछ ठीक हो जाएगा, आपकी सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है." ये बात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(एनएसए) अजीत डोभाल ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां में आम लोगों से कही.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, एनएसए अजीत डोभाल ने बुधवार को कश्मीर घाटी पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लिया. उन्होंने घाटी के कुछ लोगों और सुरक्षाबलों से मुलाक़ात भी की.
उनका एक वीडियो जारी किया गया है जिसमें वह शोपियां में एक सड़क पर कुछ लोगों के साथ खड़े होकर खाना खा रहे हैं और उनसे बात कर रहे हैं.
इस वीडियो में वो लोगों से कह रहे हैं, "अल्लाह जो करता है, अच्छे के लिए करता है. अच्छे लोगों की प्रार्थना में शक्ति होती है. हम आपको भरोसा देते हैं कि हम आपकी सुरक्षा का ध्यान रखेंगे."
अनुच्छेद 370 ख़त्म किए जाने के बाद से कश्मीर घाटी में संचार साधनों पर रोक लगी है और वह देश के बाक़ी हिस्से से कटी हुई है. वहां सुरक्षाबलों का सख़्त पहरा है.
इस बीच द हिंदू अख़बार ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से ख़बर छापी है कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध जारी रहेंगे और 12 अगस्त को ईद के मौक़े पर घाटी के लोगों को कुछ राहत दी जा सकती है.
हाफ़िज़ सईद दोषी क़रार
पाकिस्तान के आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) ने बुधवार को अदालत में मुंबई हमलों के अभियुक्त और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफ़िज़ सईद को चरमपंथ के वित्तपोषण का दोषी माना है.
ये ख़बर इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने पर प्रकाशित की गई है.
संयुक्त राष्ट्र हाफ़िज़ सईद को वैश्विक चरमपंथी घोषित कर चुका है और अमरीका ने उन पर 10 लाख डॉलर का इनाम रखा है.
सईद को बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच लाहौर से 80 किलोमीटर दूर गुजरांवाला में आतंकवाद रोधी अदालत (अटीसी) में पेश किया गया था, जहां पंजाब पुलिस के आतंकवाद रोधी विभाग ने उनके ख़िलाफ़ चरमपंथ के वित्तपोषण के लिए आरोपपत्र दाख़िल किया है.
सेना अडल्ट्री के लिए दंडित नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट
सेना ने अडल्ट्री करने वाले सैन्य अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के प्रावधान को ख़त्म कर दिया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में 150 साल पुराने औपनिवेशिक 'अडल्ट्री' या 'व्यभिचार' के क़ानून को ख़त्म कर दिया था. अपने इसी फ़ैसले को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने एक सेवारत कर्नल के कोर्ट मार्शल को ख़ारिज कर दिया.
दरअसल एक सैन्य अधिकारी पर सेना मार्च 2016 से मुक़दमा चला रही थी. उन पर आरोप था कि उनका एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल की पत्नी के साथ संबंध है.
उस महिला के पति ने सेवारत कर्नल के ख़िलाफ़ सैन्य प्रशासन से शिकायत की थी.
हालांकि कर्नल ने महिला के साथ किसी तरह का शारीरिक संबंध होने से इनकार किया. उन्होंने ये ज़रूर माना कि महिला से उनकी मुलाक़ात जम्मू और श्रीनगर में हुई थी. उन्होंने कहा कि महिला ने ही उन्हें अपने सामाजिक कार्य के सिलसिले में मिलने का आग्रह किया था.
पहले के एडल्ट्री क़ानून के तहत अगर कोई मर्द किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता था, तो पति की शिकायत पर इस मामले में पुरुष के ख़िलाफ़ अडल्ट्री क़ानून के तहत मुक़दमा चलाया जा सकता था.
सुप्रीम कोर्ट ने जन्मभूमि के क़ब्ज़े का सबूत मांगा
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्मोही अखाड़े से पूछा कि क्या उनके पास विवादित स्थल पर अपना क़ब्ज़ा साबित करने के लिए कोई राजस्व रिकॉर्ड और मौखिक साक्ष्य है.
जनसत्ता के मुताबिक़ इसके बाद राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकार 'राम लला विराजमान' की ओर से दलील दी गई कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ही अयोध्या स्थल के राम की जन्म-भूमि होने का सबूत है.
'राम लला विराजमान' की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल के परासरन ने कोर्ट से सवाल किया कि इतनी सदियों बाद भगवान राम के जन्म स्थल का सबूत कैसे पेश किया जा सकता है.
परासरन ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में तीन स्थानों पर इस बात का ज़िक्र है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)